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क्या 'माफ़िया' हैं कोचिंग के शिक्षक? सरकार और मीडिया पर सुनिए इनकी राय

Ravish Kumar Official21 views
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नमस्कार, मैं रवीश कुमार।बात किसी को कॉड़ी या दो कॉड़ी कहने की नहीं है।वैसे वाइरल वीडियो में एंकर ने दो कॉड़ी का नहीं कहा, मगर इंटरनेट में दो कॉड़ी, दो कॉड़ी ही चला जा रहा है।स्टार शिक्षकों पर जो टिपनी की गई, उस � एंकर ने कोचिंग को माफिया कह दिया तो जाहीर है जो टीचर हैं वो माफिया कहे जाने का विरोध तो करेंगे ही करना भी चाहिए लेकिन हमने यह वीडियो किसी और मकसद से बनाया है कोचिंग के स्टार शिक्षकों ने जो बाते कही हैं उन्हें मजा लेने और भढ़ास नि मीडिया की स्वतंत्रता, उसकी गुलामी, उसके content, fake news और public पर comment कर रहे हैं।उन्होंने अपने जवाब में जिस तारकिक्ता का प्रयोग किया है, इस्तिमाल किया है, उसमें आप आज की सरकार और मीडिया की विश्वसनियता को आसानी से देख पाएंगे।यह भी पता के उसने मोदी सरकार से पूछे जाने वाले हर सबाल का गला घोटा है हिसाब कर लिया।

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बविता त्यागी ने दो कौड़ी नहीं कहा।कौड़ी और फूटी कौड़ी से तुलना की एक टीचर को इतनी बारिखी का ध्यान रखना ही पड़ता है।

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अनजना ओम कश्षप ने टी

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बस एक एंकर ने इन शिक्षकों को छेड़ दिया और वे बाहर आकर बोलने लगे।जैसे चीफ जस्टिस की एक टिपडी ने युवाओं को छेड़ दिया और कौकरोच जनता पार्टी के इंस्टा पेज पर दो करोड से अधिक फॉलोवर हो गए।मगर इस बार कौकरोच का म बलकी अपना चेहरा लेकर कोचिंग के स्टार शिक्षक हाजिर हो गए।इस घटना को आप मिस नहीं कर सकते हैं।हमें लगता था कि fake news की घटनाएं आती हैं और चली जाती हैं लोग भूल जाते हैं।लेकिन कितने ही शिक्षकों ने अपने वीडियो में गोदी एंकरों के fake news नोटबंदी से लेकर हाल के fake news को लेकर टिपनी की है इसका मतलब है मोधी सरकार के दोर को लोगों ने ठीक से याद रखा है हमने कुछ स्टार शिक्षकों के वीडियो को पूरा सुना या देखने के लिए कि किस तरह अपनी आलुचना को रख रहे हैं उनकी बातों का आधार क् पहली धारना यही ध्वस्थ हो जाती है कि गोधी मीडिया और वाटसब युनिवर्सिटी की मदद से जिस तरह घुलाम राजनितिक समाज बनाने की कोशिश की गई धर्मांद राजनितिक समाज बनाने की कोशिश की गई वो कोशिश पूरी तरह सफल नहीं हुई यानि लोगो हजारों हजार चात्रों को पढ़ाने वाले शिक्षक

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अपने यूट्यूब चैनलों के जरिये लाकों लाक चात्रों तक पहुँचने की शम्ता रखते हैं।

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समाज ने आज के सरकार से जो सवाल पूछने की शम्ता खो दी थी वही सवाल अब ये शिक्षक पूछ रहे हैं यह कोई मामुली बात नहीं कि अपने बिजनेस को जोखिम में डाल कर कोचिंग के शिक्षक सरकार की आलोचना कर रहे हैं गोधी मीडिया की आलोचना कर रहे हैं इ लोग सिक्षा मंत्री से इस्तिफा मागने लगे हैं ये चर्चा जोरों से होने लगती है हर मकाम पर फेल होते हुए सरकारी तंत्र को जब सबसे बड़ी चुनौती टीचरों से फेल होने लगी क्योंकि जितने भी टीचर थे उन्होंने डिफरें डिफरें मंच पर ये एक ही ब जिनके मुद्धों से किसी को फ़रक नहीं पड़ता यहां रोज पेपर लीक हो जाते हैं पर किसी को फ़रक नहीं पड़ता CBSE का copy change हो जाता है first page किसी और का है बाद में किसी और का है आपको कोई फ़रक नहीं पड़ता बेरोजगारी से आपको कोई फ़रक नहीं पड़ता रो� टीचर के बिना ना डॉक्टर बनता है ना इंजिनियर और मोहतर्मा पत्रकार भी नहीं बनता।

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क्योंकि ये टीचर्स लोगों की आवाज बन रहे हैं।इनको आपत्ती है कि ये क्यों सिच्चक आवाज उठा रहे हैं।इनका बस चले तो इन्होंने बेदांत जैसे बच्चेकॉपी को बदल दिया गया उसको इन्होंने पाकिस्टानी बता दिया।आज आप देश में सवाल पूछेंगे तो आपको राष्ट भिरोधी गोशित कर दिया जाएं।और कुछ भी नहीं है।

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इसके अलाभा महङाई पर ये और इसका छोड़िये आज मैंने देखा यूपी में दस रुपे प्रती यूनिट दस परसेंट बिजली के दामों में बढ़ोतरी हुई है और ये क्या कह रहे है उपर उपर से कोई फरक नहीं पड़ता वाह कमाल हो गया सार सर्मानी चाहिए तुम लोगों हमेशा की तरह इस व और मनप्रीत जैसे कई टीचर को सुनने से बहुत सारी धारणाएं ध्वस्थ हो जाती हैं. इनकी बातें लाखो छात्रों के बीच पहुसती रही हैं. मीडिया भूल गया था कि वही मीडिया है. लेकिन उसने मजबूर भी तो किया कि विपक्ष भी मीडिया बन जाये, आम आद नीट यूजी का पेपर लीक हो गया, CBSE जैसी इंटरनेशनल स्तर के बोरड की कॉपी चेकिंग में हजारों गडबडियां पकड़ी गईं, उस पर किसे बोलना चाहिए था?CBSE के स्कूलों के टीचर को, प्रिंस्पल को, तो उन्होंने चुपी साद ली, CBSE के स्कूलों के किसी �आप बता दीजिये जो अपने चात्रों की परेशानियों को लेकर बोलने की हिम्मत कर पाते हैं।मीडिया में आकर बता रहे हूं कि उनके चात्र कितने परेशान हुए हैं।कितने दिनों से बहस चल रही है।अब जाकर मोदी सरकार ने CBSE के चेयर्मेन और सचीव को उनके प� ये काम पहले दिन करना चाहिये था।

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आपने हमारे एक वीडियो में देखा होगा कि CBC के एक आदेश पर कितने प्रिंस्पल ने उस सिस्टम की तारीफ शुरू कर दी जिससे परिशान होकर उनहीं के चार लाग चात्रों ने दोबारा कॉपी देखने का एपलिकेशन दिया था उनकी परिशानियों को नजर अंदास कर उस सिस्टम की तारीफ कर रहे हैं।और दूसरी तरफ, कोचिंग के शिक्षक हैं, जो अपने छात्रों के हितों के लिए, उनकी मेहनतों के लिए लड रहे हैं।छात्र मेहनत करता है, पेपर लीक हो रहा है, कॉपी चेक नहीं हो पाती क्या ये बड़ी बात नहीं कि प्रभावशाली स्कूलों के प्रिंस्पल डब्बू और डर्पोक निकल गए और जिन कोचिंग वालों को माफिया कहा जा रहा है उसके टीचर पब्लिक में आकर कह रहे हैं कि हम कमाते हैं करोडो कमाते हैं मगर सारा टैक्स भरते हैं क्या भारत में एक भी पब्लिक स्कूल ऐसा नहीं था या है जिसके प्रिंसपल सामने आकर कहते हम किसी से नहीं डरते क्योंकि हम अपना टैक्स सही सही भरते हैं और हमारे चात्रों के साथ बच्चों के साथ बहुत गलत हुआ है

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बच्चे और उनके माता पिता की गाधी मेहनत की कमाई का पैसा लूटने वाले कुछ कोचिंग सांटर के सेलिबरिटी टीचर्स आज भाड़े की वीडियो बना रहे हैं।

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भाड़े की वीडियो, शायब पहली वीडियो मैंने मन IIT se pass hai, gold medalist hai, Rajasthan Prashashnik Sehwaon me chayanit hai aur uske baad aaye din pariksha pass karta hai aur wo keval is baat ke liye ki jab wo koi baat bole to wo ek credibility ke saath bole आपकी तरह नहीं कि 2000 के नोट में चिप है या नहीं या आपकी तरह नहीं मेड़म कि इस प्रदान मंतरी ने क्या अच्छा किया आपकी तरह नहीं मेड़म कि धर्मेंदर जी को मरने से पहले ही सद्धान जली देते, ऐसा नहीं करते प्रयास करते हैं कि पूरी जिम्मेदारी से मेरे वीडियो में चार शिक्षकों के बाइट हैं. चार शिक्षक हमने आपके सामने पेश कियें हैं. क्या इस देश में चार पब्लिक स्कूल के प्रिंस्पल आकर कह सकते हैं?

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CBSE के चात्रों के हित में बोल सकते हैं?यही फर्क आपको दिखाना चाहता था. CBSE से जुड़े स्क आज सार्थक जैसा नौजवान जब संसत की शिक्षा कमेटी के सामने जा रहा था उस समय की तस्वीव देखीएगा मीडिया, सोषल मीडिया में आपको वो तस्वीव दिख जाएगी कितना शांदार शण है एक बच्चा दे लिएसबसे ताकतवर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की चुपी को तोड़ता हुआ चीरता हुआ संसद के गलियारे में अखेला चला जा रहा है एक बच्चा देश के सांसदों को बताने जा रहा है कि उसने CBSE के सिस्टम में क क्या सार्थक के स्कूल के प्रिंस्पल उसके साथ खड़े होने की हिम्मत दिखा सकते हैं?आपने किसी चैनल पर सार्थक के स्कूल के प्रिंस्पल का इंटरव्यू देखा कि उन्हें सार्थक जैसे चात्र पर गर्ब है या नहीं?उनकी हालत शायद खराब हो जाएगे. चार म उसका तुफानी कवरेज हुआ एंकर झालमुरी में emotion ढून लाये चुनाओं के बाद इसे मास्टर स्ट्रोक बताया गया गोधी चैनलों को देखकर आपको भी लगा होगा समाज ने भी झालमुरी को उसी तरह स्विकार किया है और वोट शायद इसी से मिला है मगर कोचिंग के उनकी बातों से लगता है कि ज्हाल मुरी के कवरेज को समाज के एक तबके ने वैसे पसंद नहीं किया जैसे बताने की कोशिश हो रही थी।अगर गोधी एंकर ने कोचिंग के शिक्षकों को नहीं छेडा होता तो ज्हाल मुरी को लेकर दूसरी राय क्या है आप तक नहीं पह बढ़हा चड़ा कर किये गए कवरेज का तिरसकार कर रहा था।

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हमारे प्राइम टाइम की ख़बरे बन जाती हैं जहाल मूडी में खुश्बू कैसी है कौन सा तेल है दस रुपे की है और मैं देख रही थी अंजना ओम कशप के कारणामों में तो उन्होंने बांगला देश क

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इसी तरह आप अगर सबी शिक्षिकों के वीडियो को सुनेंगे तो बहुत सारी ऐसी बातें कहते हुए मिलेंगे जिनने कहने की हिम्मत ना तो आपके पडोसी में बची है ना वॉट्सप में आपके अंकिलों में बची है और ना मीडिया में. मगर शिक्षक खुलकर वही बाते कह रहे हैं. कोचिंग को लेकर बहस होनी चाहिए. मगर इसका सवाल पहले ठीक से तै कर लिया जाये, बहस का मुद्दा क्या हो, दाइरा क्या हो. अगर कोचिंग का विरो� शिक्षा तो बात की बात है पत्रकारिता के बारे में हजारों विद्वानों ने कितनी बार लिखा या धन्दा नहीं है लेकिन धन्दा हो गया है बना दिया गया है तो शिक्षा के कमर्शियलाजेशन से पहले मीडिया के कमर्शियलाजेशन के खिलाब बहस होनी चाहिए कि सरक भारत की सेना को इसलामाबाद से आगे पहुचा दिया जिसके कारण दुनिया भर में भारत और भारत के मीडिया की नाग कटी क्या मीडिया के व्यावसाय करण का विरोध गोधी चैनल कर सकता है उसके पैनल में बैटकर आप ऐसा नहीं कर सकते हैं शिक्षा को धन्दे में बदइनी चैनलों को लेकर ब्रॉटकास्टर्स की संस्थाने कितनी बार आदेश दिये हैं कि इनोंने fake news फैलाया और नफरती news फैलाये इन पर जुर्माने लगाए गए इनकी निनदा की गई इन खबरों को क्या गोधी च चला सकते हैं?शिक्षा को धन्दे में बदलने के लिए सरकारी कॉलेजों को खत्म कर दिल्ली के ही आसपास कई सारे प्राइवेट कॉलेज खोले गए?वो क्या है?शिक्षा की सेवा है?क्या उसका इन चैनलों ने कभी विरोत किया?

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क्या वो शिक्षा का कमर्शेलाजेशन नह हम उस कंट्री से आते हैं जहांपे स्कूल सिस्टम के ऊपर कोई सवाल नहीं उठाय गाता है खास करके गॉर्णमेंट स्कूल के ऊपर अगर गॉर्णमेंट स्कूल बहुत अच्छा होता तो क्या जिस चीज के ऊपर आपने एलिगेशन लगाया है कोचिंग सेंटर क्या उनकी � Main Media क्या बात करता है आप सुनते जाओ Main Media बात करता है रिलीजियन की बात करता है 24 में से 23 गंटे यही बात होती है साथ में होती है कास्ट की बात फिर बचा खुछा जो टाइम बचता है उसमें बात होती है पाकिस्तान की और जो एक आजकल एक और वारल चल रहा है Melody की बात होत बात होती है हर एक मुद्दे को लेकर पाकिस्तान के ओपर इन सब के ओपर जो है इंडिया में में मेडियाबात करता है बात क्या करनी चाहिए उसको उसको बात करनी चाहिए कि neat जो paper है इतना prominent इतना जो है बहुत ही prestigious एक्जाम है neat का जो एक्जाम है NTA करवाता है उसको वो leaked क्यों हुआ उसके प बात ये होनी चाहिए।

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अगर किसी में दम है तो वो चलेगा अब क्योंकि इस पीड़ी के टीचर्स दमदार हैं उनके बात करने का तरीका ऐसा है कि बच्चों तक वो बात पौछती है तो ये हमें देखना पड़ेगा हमको जो हम टीचर्स और स्टुडेंट्स हैं कि अब जब राजनिती अपने सबसे एक उस पर आ गई है न कि कुछ भी हो रहा है कि किसी को फ़रक ही नहीं पढ़ रहा पेपर लीक हुआ है एक बार तो क्या समल नहीं जाना चाहिए बार बार गलती बार बार गलती बारवी के उस बच्चे ने अपना पेपर री चेकिंग के लिए भेजा तो उसमें गलती यानी � महंगे प्राइवेट अस्पताल क्या हैं?

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देश का प्राइवेट मीडिया गोधी एंकर की घलती को सही ठहराने के लिए शिक्षा और स्वास के व्यावसाय करण के खिलाब चर्चा करा रहा है जिस मीडिया की साख अब नहीं बची जिसने कभी शिक्षा और स्वास के व्यावसकरण को लेकर कभी किसी मंत्री से टब सवाल नहीं किया हो बहस ना की हो वह केबल कोचिंग के व्यावसाई करण को लेकर क्यों बहस कर रहे हैं अब क्यों कर रहे हैं उनके कारिक्रमों में तो कोचिंग के ही स्टार शिक्षक मेह तब क्या पुछा गया कि आप लोग शिक्षा को बरबात कर रहे हैं आप लोग माफिया हैं कभी इन चैनलों में हेल्थ को लेकर होने वाली बहस देखीएगा जिन डॉक्टरों का लगातार इंटरव्यू चलता है जिनने हीरो बनाया जाता है उनकी लिस्ट बनाईएगा तो प बड़ी बात है कि अपने बिजनेस को खत्रे में डाल कर उन्होंने ये सबाल उठाए हैं और आज के दोर में जब सब को डरा दिया गया है मान लिया गया है कि हिंदुस्तान को डरपोक बनाने का प्रोजेक्ट सौफिसत पूरा हो गया है आवाजें यहां वहां से फूट कर बा तुम बोल रहे हो जो सुबा से शाम तक सिर्फ फर्जी न्यूज देते हो बिना हॉमवर्क की न्यूज देते हो तुम 2000 के नोट में चिप लगा देते हो ऐसी चिप कि अगर जमीन में भी पैसा गाड दोगे तो आर्बियाई को पता लग जाएगा ऐसे ऐसा मिस गाइड करते हो उनका मृति हो चुका है आप भावनाव को नहीं छोड़ते बाद में सोरी बोल देते हो सुशान सिग राजपुद केस में आपने एक फादर की जूटी वाटसब चार्ट बहुत आपको पता होगा बहुत वाइरल हुई जूटी फेक उसका कोई छोड़ो तुम देश की अर्थ

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में जब आजादी को टाइम पे सिर्फ बानविलाक ही उस टाइम पर पाकिस्तान गए थे मतलब कोई चीज़ ऐसी नहीं बिना हुमग के तुम चीज़े लेकर आते हो तुम्हारा सुबह स हम views के लिए ऐसा कर रहे हैं और हम पैसे बटोर रहे हैं हम चात्रों का भविश्य खराब कर रहे हैं आप तो देश का भविश्य खराब कर रहे हैं तुम्हारी रोटी सिर्फ TRP पे चलती है आज सरकारी कॉलेजों की हालत बेहत खराब है कब तक आप IIT को गिना कर लाज बचात जहां admission लेने के लिए लोग दौड रहे हूं।

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Ruben, Netherlands

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क्यों गए इस दोरान लाखो बच्चे अमेरिका, बृतें, जर्मनी पढ़ने के लिए?2025 का आकड़ा है भारत के 18 लाग सदिक चात्र विदेशों में पढ़ने चले गए।ये क्या है?

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शिक्षा का व्यावसाई करण या शिक्ष लेकिन तुमको समस्या किसे है ब्लेक बूर्ड पे पढ़ारा टीचर से है और मैं कहूं जो तुम लोग ये टेली प्रॉम्प्टर देख के स्क्रिप्टे पढ़ रहे हो हमको भी इससे समस्या है कि लिख कोई और आया और तुम सर्फ पढ़ के ही नाम कमार रहे हो अगर स्कूलउसे पता है कि ये विवस्ता उसे मजबूर कर रही है।इसकूलों में नहीं पढ़ा है जारा।इसकूल बंद हो रहे हैं।इसकूलों में एक सिच्चक है।महिलाओं के लिए टॉयलेट नहीं है इसकूलों में।

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क्योंकि हमारे देश के नेटा प्राइवेट स्कूलों का उ� किसने समाली सिच्चा विवस्ता?

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तमाम टीचर आए उस टाइम यूट्यूब पे जिनोंने लोगों की जिंदगी बदल के रख दी अब करोड़ो बच्चों को सिच्चा तुम पहुंचा रही थे कुछ भी आके बोल देना है मज़ाग चल रहा है माफी मांग लेना यह सबसे ब स्कूलों के शिक्षिकों के साथ सरकारे क्या करती हैं दिन भर अभ्यानों और सर्वे में शिक्षिकों को लगाए रखती हैं पढ़ाई का उस से कितना नुकसान होता है प्रधानमंत्री मोदी की रैली होती है उसके आगे पीछे सबसे पहले स्कूल बंद किये जाते हैं प्रध गोधी मीडिया ने कभी कोई अभियान चलाया?सरकारी स्कूल हजारों की संख्या में देश भर में बंध हुए?क्या इसे लेकर कोई बहस हुई?क्या तब शिक्षा का व्यावसाय करण नहीं दिखा था?

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स्कूलों में जो कमीया हैं उनपर काम क्यों नहीं करवाते?सरकार तुम्हारी अगर सुनती है क्या हम सब नहीं जानते?स्कूलों में टीचर्स की भर्ती नहीं होती?कितने स्कूल्स हैं जो दस्मी के बाद साइन स्ट्रीम पढ़ाते ही नहीं हैं गाओं का कोई लड़का लड� इसलिए अंजना उम कशब जैसे लोगों को डी ग्रेट होके उन्होंने देश का भी बंटाधार कर दिया पहले आपके लिए एक गुड़ एडूकेशन सिस्टेम करने के लिए होगा और मैं अगर एडूकेशन बहुत बहुत करता होगा एडूकेशन बहुत प्राइ� राहूल गांधी के इस बयान को ही गोधी मीडिया अपनी बहस में शामिल करने की हिम्मत करेगा?

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कितनी बार दिखाया है?

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हम जैसे टीचर और बहुत सारे टीचर उनको भी Reels और YouTube पे आना पड़ा क्योंकि उसके माध्यम से वो बच्चों को कुछ समझा रहे हैं बता रहे हैं वो एक एवन्यू खोल रहे हैं लेकिन आपको तो लगे की वाई वीवरशिप तो सारा वाई लूट के लेके जा रहे हैं बताओं इसके पीछे कारण क्या है कारण यही है क्योंकि ऐसे टीशर जिनक

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वीवर्शिक मिलियन्स में हैं वो एक किसी बात को बड़े अच्छे से समझा देते हैं जिसको आपने कहा एक्जांपलर यूज करते हैं आप लोग इतने डिबेट करा के जो हॉरर शो दिखाते हो कहने के ल इस गोधी मीडिया ने दिल्ली आये किसानों को आतंखवादी कहा आप याद कीजिए किसान आंदुलन में आये किसान गोधी मीडिया के इस वेहवार से कितने आहत हुए उन्हें यकीद नहीं हुआ कि इस देश में वे सरकार से अपनी मांग को लेकर लड़ने आये और उन्हें हमारे यहां अधिकार भी जब चोरी चुपे मिलने लगते हैं तो वो ब्रस्ठाचार का रूप ले लेते हैं हाना कि BBC भी बृतेन के अंदर funded by government है और अलजजीरा भी funded by government in Qatar hai. Chahe wo CBC ho, chahe ABC news channels ho, ye sabhi government dwara supported rahe hain aur rehte hain. भारत का गोधी मीडिया अब जनता के बीच पहचाना जा रहा है।

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पहचान तो बहुत पहले लिया गया था, मगर अब लोग बोलने लगे हैं।अब न्यूस चैनलों को पहले की तरह नहीं देखते हैं।है।बहुत सारे लोग मिलेंगे जिनोंने शाम को नीज चैनल देखना बंद कर दिया है।इन चैनलों के सामने विश्वसनियता का संकर्ट तो है।कोचिंग के शिक्षक भी यही बात समाज के एक वर्छ से मीडिया की या आलोचना लोकतंत्र के लिए बहुत सुखत घड़ी है।

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इसे आप माफिया की बोली बता कर नहीं नकार सकते हैं।सच्चाई यह है कि गोधी मीडिया हिंदी प्रदेश के माफियाओं के खिलाब रिपोर्ट करने में कांप जाएगा।बि असली माफिया से लड़ नहीं पाते तो कोचिंग माफिया की मूर्ती बनाकर मीडिया उस से लड़ने चला है।नीट यूजी की परिक्षा का पेपर लीक हुआ, महरास्त के एक कोचिंग चलाने वाले का नाम आया।उसे माफिया कहा जा सकता है।

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लेकिन सभी शिक्षकों को आ और पढ़ाने से पहले घंटो मेहनत करते हैं तब जाकर छात्रों के बीच इनकी लोगप्रियता बनी हैं आप हमें धन्दा बोल रही हो कोचिंग माफिया बोल रही हो और बाकी माफिया तो देश में है ही नहीं उनके लिए तो आप सवाल उठा नहीं सकते आप शायद मुद् वीडियो उन तक कल पहुँची है इसलिए उन्होंने जवाब दे लेकिन इतना एहंकार का जवाब इतना एहंकार अभी भी आपको कोई शर्मिंदगी नहीं कि आपने कैसे शब्दोंप्रियोग मैं ऐसे शब्दों का प्रियोग नहीं करूँगी क्योंकि मुझे अपनी मर्यादा पता है मुझे पता है कि मैं अध्यापक हूँ मेरे बच्चे मुझसे क्या सीखने वाले है क्योंकि आपके तो लखो फोलोवर्स हैं।बिल्कुल आप ऐसा कर सकती हैं।आपके पास बहुत बड़ा मंच है, ताकत है, सब कुछ है, तो आप ऐसा बोल सकती हैं।

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परन्तु मैं ऐसे शब्दों का, किसी गाली का, किसी गलत शब्द का आपके लिए प्रियोग नहीं करूँगी लेकिन एक बात और सुनते जाएगा एक सच और सुनते जाएगा हमारे सचाई अगर जाननी हैं तो एक बार उठाकर मेरे वीडियो का कॉमेंट सेक्षन देख लीज़ेगा और बच्चे मैं चाहूंगी की बढ़िया से बढ़िया बढ़िया से बढ मेराम मैं आपको एक फैक्ट बताता हूँ आपको जानकर सर्प्राइज होगा यूट्यूब एलगोरिधम है मेरे पास 30 से अधिक उम्र के जो सुनने वाली आडियन्स है आज वो 65 परसेंट से जादा है मैंडम इसका मतलब समझती है वो एकजाम नहीं दे रहा है 35 साल से उपर 50 परसेंट से उपर आडियन्स होने का मतलब जानी है मैंडम वो एकजाम नहीं दे रहा लेकिन फिर भी मुझे सुन रहा हाँ आपके पास जाते जरूर हैं इवन हम लोग भी चले आते हैं आप लोगों के पास कारण क्या है क्योंकि आपके पास अभी भी वो authority है कि सरकार आप ही के माध्यम से बयान देगी गोधी मीडिया को गंभीरता से सरकारी कॉलेजों को लेकर बहस करने की जरूरत है बहस से जा

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है क्योंकि टीम उन्हीं के पास है जनता के टैक्स के पैसे का हजारों करोड का विग्यापन इनी गोधी मीडिया और अखबारों में बढ़ता है गुजराज से गोधी मीडिया अपना काम शुरू कर सकता है कि वहां के जि किसी जमाने में इसके बारे में पता कर लीजीएगा।आज इसकी रेंकिंग क्या है यह भी पता कर लीजे।जुलाई 2025 की खबर है।पत्ना युनिवर्सिटी के पांच कॉलेजों में लॉटरी निकाल कर प्रिंसिपल का चुना हुआ।राजभवन के आदेश पर ऐसा क इसी Science College के एक चात्र राजीव गौबा भारत के लंबे समय तक Cabinet Sachiv के पद पर रहे।मोधी सरकार के दौर में इस वक्त नीति आयोग के सदस्य हैं, Cabinet Sachiv से पहले ग्रिश सचिव रहे।

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सिस्टम के भीतर का इतना प्रभावशाली व्यक्ती अपने ही College की हालत को लेकर क्या कर पाय गोधी मीडिया उनसे पूछ पाएगा?साइंस कॉलेज में आर्ट्स की टीचर को प्रिंस्पल क्यों बनाया गया?मगद महिला कॉलेज में प्रोफेसर एनपी वर्मा को प्रिंस्पल नियूक्त किया गया या अपने आप में दुरलब था कि महिला कॉलेज में पुरुष को प्के चुनाओ जीज़ जाते हैं मगर परिक्षा उनकी और उनकी पार्टी की कई सरकारे नहीं करा पाती हैं कोई कोचिंग वाला सवाल उठाता है कि पेपर लीक हो गया वो अंधुलन करना चाहता है तो उसके संस्थान को सील कर दिया जाता है प्रयाग राज में ऐसा ही हुआ टी seal करने से पहले क्यों नहीं सोचा गया?गोधी मीडिया अपने आप में एक राष्ट्रिय समस्या है नैशनल प्रॉबलम अगर आप कोचिंग में पढ़ाने वाले शिक्षकों को ध्यान से सुनेंगे तो आपको एक एंकर को लेकर नहीं बलकि पूरे गोधी मीडिया के तंत्र को आप इस देश के बारे में दुनिया में कुछ भी बता दीजे, लोग मुस्कुरा देंगे. मगर गोधी मीडिया दिखा कर आप इस देश पर ना तो यहां के गाओं में, ना वाशिंग्टन में गर्व कर सकते हैं. इस मीडिया को राष्ट्रिय शर्म का तुरंत ही दर्जाद द

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