डरी हुई, मरी हुई जनता नहीं है, जंतर मंतर पर हज़ारों की संख्या में पहुंचे लोग
नमरस्कार मैं रवीश कुमार जंतर मंतर लोगों से भर गया है जंतर मंतर ने उस डर को छु मंतर कर दिया है जिससे मान लिया गया कि अब यही भारत की जनता का कैरेक्टर हो गया है डरना, दुबग जाना, सहम जाना, तमाम गलतियों को देख कर भी कुछ नहीं बोलना मगर ज जंतर मंतर की तरफ आने वाले रास्ते तुरंथ ही भरने लग गए।जमाने बाद कनाउट प्लेस उस जनता से भरा नजर आया जो खुद चलकर आ रही थी।जिसे किसी ट्रक में नहीं लाया गया।एसा नहीं था कि गोधी मीडिया पर इस आंदोलन का वाल टू वाल कबरिज ऐसा बिल्कुल नहीं था और गोधी मीडिया किस तरह से कवरिज कर रहा है आज भी आप अपने घर में नीज चैनलों पर देख सकते हैं कि जब जनता सडकों पर निकली है गोधी मीडिया कहां है दिल्ली की जनता इतनी बड़ी संख्या में उतर गई और आज उसके बारे में स� किसी तक ठीक -ठीक सूचना नहीं पहुँच रही है और सूचनाओं का तुरं -तुरंट आना समभव भी नहीं हमारे सहयोगी भी वीडियो ले चुके हैं मगर भेज नहीं पा रहे हैं क्योंकि नेटवर की भैंकर समस्या हो रही हैं उन्हें चल कर काफी दूर तक जाना पड़ � दर और भ्रम दोनों को हराते हुए लोग जंतर मंतर की तरब बढ़ते जा रहे हैं।जिस से भी पूछिये यही बता रहा है बहुत बड़ी संख्या में लोग हैं।डर का जिक्र हम इसलिए कर रहे हैं कि 2019 में नाग्रिक्ता कानून के विरोध में दिल्ली में जब आंदोलन हुआ तब उन आंदोलनों पर कितना ह धर्म के नाम पर गोली चलाते रहे उनकी तस्वीरें च्छप गईं मगर वो जेल से बाहर आ गए।
लेकिन उमर खालिज शर्जिल इमाम को आज तक जमानत नहीं मिली।गुलफिशा फातिमा, खालिश शैफी को जमानत मिली भी तो कितने साल जेल में रहने के बाद।उस आं� कितनी बार कहा गया है कि नीट कोई मुद्धा नहीं आपको गोधी मीडिया ने यकीन दिला दिया कि नीट की परिक्षा तो हो गई अब एड्मिशन की प्रक्रिया शुरू होने वाली है लेकिन इस सांधोलन में लोग केवल नीट को लेकर नहीं आए हैं उनके भीतर इस सरकार क सरकार के साथ कोड, पुलिस, मीडिया को लेकर भी सवाल नजर आते हैं इन पोस्टरों पर इस पोस्टर को ध्यान से पढ़िये क्या लिखा है ये जो जूड पे पले हैं ये जो दूद के हैं धुले इने क्या खबर कि ये लब मेरे हैं नहीं सिले मतलब जो सरकार और गोदी मी� बोलना भूल गई है, वो जनता बता रही है कि उसके होट उसके हैं, सिले हुए नहीं हैं. कितनी बड़ी बात लिखी है इस पोस्टर में
सरकार जनता को गाड देना चाहती थी लेकिन उससे पता नहीं था कि हम बीज हैं गाडोगे तो पेड़ या पौधा बनकर निकलाएंगे किसने कहा था प्रधान मंत्री मोदी ने कि आलोचना लोगतंतर की आत्मा है ये पोस्ट रीड है, रीड ही सीधी नहीं होगी तो आत्मा सायोणी गोश या त्रिनमुल के 20 सांसोदों की तरह NCPI में चली जाएगी मुझे मेरे बापने पढ़ाया है, मेरे बापने पढ़ाया है, मेरे बापने पढ़ाया है, मेरे बापने पढ़ाया है, मेरे बापने पढ़ाया है, मेरे बापने पढ़ाया है, मेरे बापने पढ़ाया है, मेरे बापने पढ़ाया है, मेरे बापने पढ़ाया है, मेरे बापने 10 -12 साल से नहीं हुआ था और अब समझ में आएगा सरकार को क्या है ये उन्हें किस सिसाबसे काम करना चाहिए हार नहीं मानेंगे हम जब तक हमें justice नहीं मिलेगा जब तक हमें एसी सरकार नहीं मिलेगी जो अक्शली में fair हो और अक्शली में bigoted ना हो तब तक हार नहीं मानेंग
बार सिर्फ हमारी आपस में भी हम एक दूरसे का ख्याज रख रहे हैं और साथ में चेक में भी रख रहे हैं कि किसी को हम option ही नहीं देंगे मौका ही नहीं देंगे बोलने का कि हम violent है इतनी बड़ी संख्या में लोग आने लगे कि सुरक्षा कारणों से मेट्रो को बंद करना पड़ा है।
जनपत, राजीव चौक, पतेल चौक, Central Secretariat, सेवातीर्थ, मेट्रो स्टेशन को बंद कर दिया गया कि और लोग ना आ जाएं।क्योंकि लोग बहुत तादाद में जंतर मंतर की तरब बढ़ने लगे थे पता चलने लगा कि वहाँ हजारों लोग पहुँच गए हैं उनके पीछे और हजार निकलने की तयारी में थे लोगों तक जंतर मंतर की सूचना हो सकता है देर से पहुँचे गोधी चैनलों पर सीमित लेकिन एक ऐसे समय में जब कोई भी नीता मैनेज हो जाता है, रातो रात बिग जाता है, जुप जा रहा है, जंतर मंतर पर पबलिक अपनी रीड लेकर आ गई हैं. घजब का नजारा है जंतर मंतर का आज. जंतर मंतर पर कई दिनों से पुलिस का इंतजाम बढ़ाया जा रहा � रविवार से उसकी तैनाती अप्रत्याशित रूप से बढ़ने लगी इन खबरों ने लोगों को आशंकित तो किया ही होगा कि इतनी पुलिस से नहीं जाते सर्विलांस कैमरा देखकर बहुत सहम गय होंगे कि बाद में उमर खालीद की तरह केस ना हो जाये और सालों साल तक ब टियर गैस गन का वीडियो वाइरल होने लगा और इसे देखते देखते शायद लोग नॉर्मल भी होने लगे कि पुलिस अब इतना ही कर सकती है पुलिस से जादा लोगों को सरकार पर शक रहा होगा कि सोमवार को दमन हो सकता है सोमवार को पुलिस कारवाई कर सकती है उसकी म�भय का विस्तार करती जा रही थी लेकिन लोगों को देख कर लोग आने लगे लोग आने लगे तो उनके बीच पुलिस को लेकर भय भी जाने लगा रभीवार उननीस जुलाई को जनतर बंतर पर भारी उमस के बीच हजारों लोगों की मौजूदगी ने पुलिस का डर उनके भीतर से खत्म कर दिया गया होगा और पुलिस को भी मेसेज गया होगा कि ये जनता का आंदुलन है उसे जनता की सुरक्षा के लिए रहना होगा ना क मूल बात है सोनम वांगचुब को उठाने के अलावा दिल्ली पुलिस अपनी ताकत से प्रदर्शन को तोड नहीं पाई क्योंकि जनता इस बार सरकार और पुलिस की डर से आजाद हो गई है उसी डर से निकली जनता ने जनतर मंतर को सुबा सुबा भर दिया उन सभी लोगों क याद कर रहे हैं हैं लोग की कहीं दमन तो नहीं होगा CRPF के 5000 जवान तैनाथ किये गए दिल्ली पुलिस की भी भारी तैनाथ ही की गई आग जनता ने पुलिस के पाउं ही बांद दी हैं जनता के साथ आप हमेशा लाठी की भाषा में बात नहीं कर सकते हैं केस और कोड से उस मगर जनता उसके बाद फिर से निकलेगी जिस तरह से 20 जुलाई को निकली।
परवेलिंस है उस बाद से आपको कोई घ़वराथ चिंदा नहीं है।
असा डजने वाला तो कोई वो नहीं है क्योंकि आप being a civil servant इतना हम history में पड़े हुआ हैं कि जितने भी freedom fighters थे वो डरती नहीं � सरकार को पहली बात तो ये है कि इतनी असमेदन सील हो गई है कि एक जिनून मुद्दा है।
मुद्दा है ये एक ऐसा कोई मुद्दा नहीं है कि धरम है या ऐसा कोई मुद्दा हो ये आम जो है स्टुडन्ट जो हैं जो मेन तबके के जो समाज में सबसे नीचे वाला तबका है उनकी आवाज है।
तो आज जब मैं यहां पहुँची मैंने ममा को बोला कि ममा don't think I am all alone. There are so many girls, there are so so many people around that I don't feel scared. आने से बिले थोड़ों से लग रहा था कि क्योंकि बहुत सारी पूलिस वाले वीडियोज भी मैंने देखे देखे. But now I am वह घर से तो रोज निकल रही थी।
दफतर जाने के लिए, सबजी खरीदने के लिए, SIR की लाइन में लगने के लिए, वोटर लिस्ट से नाम कट जाने पर भी चुप रह जाने के लिए।पश्चिम बंगाल में 27 लाख लोगों के नाम वोटर लिस्ट से कट गए, उनकी वो� 27 लाख लोग एक जग जमा नहीं हो सके क्योंकि उनके भीतर डर बैठ गया था वे अपने भीतर डर की लाश को लेकर पूरे चुनाओं ताकते रहें वोट का अदिकार छिन गया हाउसिंग सोसाइटी का एक भी कम्यूनल अंकिल नहीं बोला कि घलत हुआ इसलिए जनतर मंतर की � हाल फिल हाल के दश्को में एक बड़ी घटना है जनता आज घर से नहीं निकली है डर से निकली है और डर किन सवालों से किन सवालों को पूछने से रोकने के लिए लोगों को डराया गया यही कि नौकरी क्यों नहीं मिल रही उनका पेपर सेफ क्यों नहीं है E -20 को लेकर क्योंउनकी गाडी का माईलेज अगर कम हो रहा है तो बोलने की हिम्मत क्यों नहीं जुटा पा रहे हैं?क्यों बीस बीस लाग की कार का मालिक होकर भी थर थर काप रहे हैं?एक मंत्री जो बार -बार अपने काम में फेल होता गया लगतार उसके निगराणी में पेपर व्यवस्था खत्म होती रही करोडो चात्रों के भविश्य के सारे अवसरों को इन कारणों से रौक दिया गया उन चात्रों को यह सवाल पूछने का भी अधिकार नहीं मिला है कि क् एक महिने से जंतर मंतर का अंदोलन चल रहा है सरकार के किसी मंत्री, किसी विधायक, सचीव तक ने यहां आकर छात्रों से बात करना ज़रूरी नहीं समझा क्या हजारों छात्रों की मांग इतनी फुजूल है कि उनसे समवाद तक नहीं किया जाये बीजेपी ऐसी पार्टी नह TMC सरकार के दोरान जब संदेश खाली का मामला सामने आया तो बीजेपी के नेता पुलिस से लड़कर भी वहां तक जाना चाहते थे दिल्ली से पहुँच गए लटियन्स दिल्ली से दो किलो मीटर दूर बैठे बीजेपी के नेताओं को एक मिनट के लिए भी नहीं लगा कि कि प्रदान मंत्री को परिक्षा पे चर्चा का कारेकरम अब बंद कर देना चाहिए।अगर वे इन छात्रों से परिक्षा पर बात करने के लिए नहीं आ सके, ना बुला सके, ना किसी को भेश सके, तब फिर किस मुझ से सरकार परिक्षा में स्ट्रेस नहीं लेने की बात कह सकती गोधी मीडिया कैसा कैसा भ्रम फैलाता है कि चीन का हाथ हो सकता है क्या ये लोग चीन का आईकार्ड लेकर निकले हैं अपने ही देश के किसानों को इस गोधी मीडिया ने आतंकबादी कहा शायद इसी लिए सरकार नागरिकता के नाम पर डराती है पहले गोधी मीडिया लोग
को डराता था कि इनके पीछे सोरोस है इनके पीछे चीन है पाकिस्तान है अब सरकार नागरिकता का डर पैदा कर रही है कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है तो वोटर आईकार्ड नह दूसरा भ्रम होता है कि आंदोलन में सरकार के लोग घुस गए हैं सरकार मैनेज कर रही हैं रविवार को जब गितांजली एंग्मो ने कहा कि सोनम वांक्चुक अंशन तोड देंगे अगर राजनितिक दल के लोग उनसे मिल लेंगे और आश्वासन देंगे कि संसत के सत्र में फिर सुनम वांगचुक ने पतर लिखा वही बात लिखी कि अगर सरकार शिक्षा के शेतर में हाल की नाकामी की जबाब देही स्विकार करती है तो अंशन वापस ले लेंगे इसमें इस्तिफे की मांग ही नहीं उन्होंने इस्तिफा लिखा ही नहीं उन्होंने लिखा कि अगर कोई नहीं चाहता कि अंशन अनिश्चित काल के लिए चले और किसी की जान चली जाए लेकिन सोनम वांग्चुक के इस बयान से भरम फैला लोग सवाल पूछने लगे कि अलग अलग दल के लोग क्यों आएंगे आना तो सरकार को चाहिए बीजेपी को चाहिए जिसके एक इशा सोनम वांगचुक के इस पत्र को लोगों ने इस तरह से देखा कि या आंधोलन मैनेज नहीं हुआ है।नेता मैनेज हो सकता है।लोगों ने इस बार इस भ्रम को भी तोड़ दिया।दिया कि नेता मैनेज होते रहेंगे मगर लोगों का आंधोलन मैनेज नहीं होगा चलता रहेंगे यह बहुत बड़ा संदेश है जंतर मंतर से आज अगर सारे नेता मैनेज हो जाते हैं मालिजे ऐसी तब क्या इस देश की जनता लोगतंत्र को चबाकर निगल जाएगी?तब भी जनता जंतर मंतर के लिए निकलती रहेगी जिस तरह से आप जनता निकलें।क्योंकि एक सवाल आप खुद से पूछिए, आप कहां रहते हैं?
किस शेहर में रहते हैं?कि आपके शेहर में एक भी स हो सकता है कुछ शहरों में कुछ कॉलेज उनके नाम मिल जा लेकिन जादा तर शहरों में एक भी सरकारी कॉलेज नहीं मिलेगा जहां कम पैसे में साधारन घरीब आदमी का बच्चा अच्छी तालीम पासे के यह कैसा देश है जहां एक ढंका सरकारी कॉलेज सरकारी अस्पताल इसलिए नतीजा मेहनत करने के बाद भी नहीं आता और पीछड जाते हैं।अब इस जनता को बाबाओं के पीछे लगाया जा रहा है कि अच्छे कॉलेज से नहीं, अब बाबा का आशिरवाद आपकी किस्मत बदलेगा. नतीजा क्या होता है?कॉलेज को फीस दो, ट्यूशन में फीस दो, बर्बात करो खुद को, अपने समय को, जीवन को, आउसत पढ� जिसे भी समझ आ रहा है, वो आज जंतर -मंतर की तरफ चला जा रहा है।यह वही लोग।सिपाही को भी पता है कि उसकी नौकरी कितनी मुश्किल हो गई है।
वो किसी तरह CRPF का जवान तो बन गया, दिल्ली पुलिस का जवान तो बन गया, मगर क्या वो अपनी इस पूंज और भरती परिक्षा में पेपर लीग का शिकार हो जाएगा सिपाही बन भी जाएगा तो अगनी वीर की तरह उसकी नौकरी के नियम बदल दिये जाएगे उसकी नौकरी 4, 5, 6 साल की कर दिजाएगी तो ये चक्र बन गया है तो आज जनतर मंतर पर जनता ने डर, भ्रम और चक् दिल्ली और देश की जनता ने भी वक्त लिया कि जो अंशन पर बैठे हैं उन पर कितना भरोसा किया जाएं कल वो बीजेपी में ही मिल जाएं बीजेपी के इशारे पर ही काम करने लग जाएं लेकिन जनता ने वक्त लिया और अब समझने लगी है कि नेता इस देश में बिकविपक्ष से तोड़ कर बीजेपी की तरफ जाते रहेंगे जनता के पास सवाल है कि क्या वह भी बिक जाएगी जनता अगर खुद को बेच देगी उसे बदले में क्या मिलेगा घटीया कॉलेज घटीया अस्पताल नाली के पानी से भरी सड़क यही मिलता है जो सांसत बिकता ह इसलिए जनता समझने लगी है कि नेता बिक सकता है डल बिक सकते हैं डल तोड़े जा सकते हैं पबलिक को नहीं बिकना है और उससे नहीं डरना है विपक्षी डल भी इस डर से बाहर आ गये हैं त्रिनमुल के 20 सांसदों को रातो रात तोड़ दिया गया बीजेपी में नहीं ज इसके लोगतंत्र के साथ विपक्षी दलों में भी अब डर से निकलने की हिम्मत आ रही है।बहिशकार कर दिया क्योंकि त्रिनमुल कॉंग्रेस के 20 सांसद एक नई पाटी NCPI के नाम के साथ बैठे थे किसी ने इसका नाम तक नहीं सुना लोकसभाचुनाओं में और उस पाटी के हाथ 20 लोकसभाच सांसद हैं इस से बड़ा मजाग इस देश की जनता के साथ क्या हो सकता जनता आग जनतरमंतर पर पहुँचकर फिर से लोगतंतर में नकली घी के कारोबार को खत्म करने निकली है फर्जी से असली बनाने निकली है सरकार को लगा होगा कि जब वो इतना कुछ कर सकती है तो जनता को भी तोड सकती है डरा सकती हैविपक्ष डर से निकला तोड लो उसकी पाटियां तोड लो उसके सांसद लेकिन जो बचा हुआ है जितना बचा हुआ है वो डर कर नहीं जिये एक साथ दो बड़ी घटना दिल्ली में हुई विपक्ष आंदोलन के नेटा के मैनेज होने की आशंका अफ़वाहों को किनारे करते हुए सडकों पर आती हैं।यह दोनों नई घटना।जनता में विश्वास चला गया था कि उसकी आवाज आंदोलन में बदल सकती।
हर आदमी को लगने लगा था कि उसकी आवाज अकेले की है, डर से धरमेंद्र प्रधान इस्तीफा दें ना दें कोई फर्क नहीं पड़ता यह जनता जान गई है कि सरकार सुनती नहीं मगर जनता यह दिखाने आ गई सरकार भले न सुने जनता सुनने समझने लगी है उससे भी बड़ी बात है बोलने लगी 20 जुलाई का दिन भार जैसे देश म जंतर मंतर से लाइब कवरिज करना मुश्किल।लाइब कवरिज का संसाधन गोधी चैनलों के पास हैं।जिसे सरकार कई -कई सौ करोड के विज्यापन देती हैं।वो पैसा आपके टेक्स का है।आपके ही आंदोलन का कवरिज उस अनुपात में नहीं हो।कई लोग पूछ
किया है कितनी बातें जोड़ी हैं यह काम ग्राउंड से नहीं हो पाता ग्राउंड से भी रिपोर्टिंग बहुत ज़रूरी है हमारे सहयोगी हैं और थे तभी वहां से लोगों की प्रतिक्रियाएं पहुँच � हमारी टीम इतनी बड़ी नहीं कि चार लोग पीछे से वीडियो देख रहे हैं उसके हिसाब से स्क्रिप् लिख रहे हैं और तुरंद का तुरंद नीज चैनलों की तरह वीडियो अपलोड हो रहा है नीज चैनल में यह सब हो सकता है क्योंकि एक आदमी के पीछे बहुत लोग आज नेटवर्की भी जंतर मंतर के इलाके में काफ़ी दिक्कत हैं।इसलिए आप तक लाइब कवरेज की तरह सूचना नहीं पहुंचा पारें।अगर हम वहां होते तो अपने वीडियो के साथ यहां वहां भाग रहे होते कि किसी तरह एडिटर्स को पहुंचा दो।लेकिन अच्छी बात है कि जनता को बिना मीडिया के सडकों पर निकलना आ गया वो कवरेज के लिए नहीं अपना करेज दिखाने के लिए निकल रही है करेज के साथ साथ करेजा भी कि उसकी छाती भले ही उन इंचो जितनी ना हो लेकिन बोलना जानती है वो अपनी आबासएक दूसरे को सुनाना चाहती है यह संसद मार्च नहीं है संसद तक मार्च नहीं है यह जनता का मार्च है उसके घर से उसके डर तक निकलने का मार्च है वो घर से निकली थी और निकल गई डर से नमस्कार मै
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