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42 महीने के रिकार्ड पर महंगाई, रूपए की ऐतिहासिक गिरावट, कहाँ भाग कर जाए आम आदमी

Ravish Kumar Official6 views
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नमस्कार, मैं रवीश कुमार।14 माई को 10 ग्राम सोने का भाव 1 ,62 ,000 हो गया।1 ,62 ,000 के भाव पर सोना कौन खरिद रहा है?वो लोग तो बिलकुल नहीं जो गैस का सिलेंडर नहीं मिलने पर शहर चोड़कर गाओ चले गए।वो भी नहीं जिनोंने कमर्शल सिलेंडर 3000 से इस तबके के लोग तो सोना ठोक में खरीद ही नहीं सकते।फिर सोना कौन खरीद रहा है?

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भारत के प्रदान मंत्री से आप कुछ भी उम्मीद ना करें या आपकी समस्या है।लेकिन जब वे देश से अपील कर रहे हैं कि सोना मत खरीदिये तो उन्हें बताना चाहिए कि एक लाग से उपर के भाव पर सोना खरीदा है?कितना सोना खरीदा है?उनकी संख्या कितनी है?असली गेम यहाँ है. अपील उनसे की जा रही है जो सबजी खरीदने तक का हिसाब अपनी डाइरी में लिखते हैं और उनके बारे में बताया भी नहीं जा रहा जो एक ही बार में यब भारत का रुपया है आपको मैं सितंबर 2024 की छपी हुई खबर दिखा सकता हूँ कि एशिया के 48 देशों में पहले नंबर पर बंगादेश का टाका और दूसरे पर भारत का रुपया सबसे खराब प्रदर्शन कर रहा है सितंबर 2024 की खबर जनवरी 2025 की खबर दिखा सकता ह� और आपको फर्वरी 2025 की खबर दिखा सकता हूँ कि भारत का रुपया एशिया में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा है उस समय एक डॉलर का87 रुपे 58 पैसे हो गया आपको आज की 14 मई की खबर दिखा सकता हूँ, CNBC ने लिखा है कि भारत का रुपया पूरी दुनिया में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बन गया है।

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अगर युद्ध के कारण संकट आया है तो भारत का ही रुपया दुनिया भर में सबसे खराब प्रदर्शन क्यों कर बलकि उसके पहले से ही जब रुपया सत्तर के पार चला गया इस सवाल पर हम लोटकर आएंगे लेकिन इस समय जो देश में ड्रामा चल रहा है उसकी भी बात कर लेते हैं जिनसे देश के लिए कुछ ना हो सका वो देश के लिए कुछ करने के नाम पर पाँच कारों की जगा दो कारों से चलने लगे हैं कितना त्याग करने लगे हैं उन्नीस अप्रेल 2017 को मोधी सरकार ने लाल बत्ती पर बैन लगाया खुब हेडलाइन मची की देश में वी आईपी संस्कृती पर हमला हुआ वी आईपी संस्कृती खत्म हो गई जनता की आखो तो ये कौन से VIP बच गए थे जो 10, 20, 50 कारों का काफिला लेकर चल रहे थे मंत्री से लेकर BJP के साधारन नेताओं के काफिले के वीडियो आपने देखे होंगे अब वही लोग 10 कारों की जगए 2 कारों से चलने का फैसला कर रहे हैं महान बता रहे हैं गोधी मीडिया बता रहा ह क्या कोई बताएगा कि 11 माई के पहले प्रधान मंत्री मुख्यमंत्री राज्यपालों के काफिले में कितनीचला करती थी और उनका सालाना खर्चा कितना है इसलिए इसे मैंने ड्रामा कहा लाल बत्ती हटा कर वी आईपी संस्कृती खत्म करने का दावा एक अलग ड्रामा था अब दो कारों से चलने का � जो सरकार मेडिकल की प्रवेश परिक्षा बिना चोरी के नहीं करा सकती उसके मंतरी कारे घटा कर त्यागी बन रहे हैं अख्बारों में क्या हो रहा है कोई यह नहीं बता रहा कि 12 साल से एक ही व्यक्ति के हाथ में नित्रित्व होने के बाद भी देश की अर्थव्यवस्था की हालत ऐसी क्यों है कमियों को गिनाना न पड़ जाए इसलिए सारे मिलकर उपाय सुझा रहे हैं और उपाय सुझाने के नाम पर विशलेशन का पन्ना � उपाय सुझाने वाले लेकों से सावधान रहिये ये अनंत नागेश्वरन हैं भारत के मुख्य आर्थिक सलाकार इनके बयान के आधार पर इंडियन एक्सप्रेस ने 13 माई 2026 को लिखा रुपय को अब और गिरने से बचाना होगा सरकार की बड़ी प्रात्मिक्ता होगी कब कह पाँच महिने पहले जब एक डॉलर नव्य रुपए इकीस पैसे का हुआ तब यही अनंत नागेश्वरन क्या कह रहे थे तब कह रहे थे मैं इसे लेकर अपनी नींद नहीं खोना चाहता जब डॉलर का भाव 90 .21 रुपए पर था तब तो ये चैन की नींद सोना चाहते थे क्या 95 रुपए के भाव पर कोई अलार्म लगा है जिसके बचते ही उन्हें रुपए को गिरने से बचाने का ध्यान आ गया रुपए के गिरने का हंगाम तो तब से हो रहा है जब एक डॉलरसत्तर रुपय का हो गया लेकिन 2024 के बाद से इसे लेकर गंभीर बहस होने लगी दो साल से अधिक समय से रुपया गिरता जा रहा है सरकार ने कभी इन सबालों की परवार नहीं की कि रुपया 2024 में गिरा 25 में � लेकिन कमजोर होते रुपय के कारण मेहङाई के रूप में उसके घरों तक संकट जरूर पहुँच गया अब युद्ध के बहाने रुपय के गिरने पर बयान दिये जा रहे हैं सबाल है अगर युद्ध नहीं होता क्या तब भी रुपया इतना नहीं गिरता तब भी तो गिरता जा रहा था 22 निसंबर 2025 को CNBC के वेबसाइट पर नो मुरा और S &P Global Market Intelligence के हवाले से रिपोर्ट छपी है इसमें अमेरिका के साथ ट्रेट डील के विवाद और भारत के बाजार से विदेशी निवेशकों की रवानगी को कारण बताया गया है और आशंका जता लेकिन भारत का रुपया तो उसके पहले ही जन्वरी 2026 में 92 पर पहुँच गया और मार्च में रुपया 95 पार कर गया बार बार याद दिला रहा हूं कि सितंबर 2024 से ही रुपया के गिरने को लेकर लिखा जाने लगा था कि या अच्छा संकेत नहीं है भारत की अर्थविवस् 28 वरवरी को इरान पर हमला हुआ लेकिन उसके एक हपता पहले ही रुपय का भाव 90 .95 पर पहुँचा और रिपोर्ट थी कि RBI डॉलर बेच रहा है ताकि एक्स्चेंज रेट को संभाला जा सके 14 वरवरी को फिच रेटिंग एजन्सी ने कहा कि रुपया सेके अन्त तक 93 तक पहुँझ सकता है मार्च में ही हिन्दू बिजनेस लाइन के गुरुमुर्ती के की रिपोर्ट आई कि आने वाले महीनों में रुपया 95 .30 के पार जा सकता है उस समय रुपया 93 .98 के रेट पर चला गया था लेकिन कुछी हवतों में रुपया 95 के पार नीचे चला गया एक अप्रेल 2026 को ब्लूमबर्ग ने कहा कि सौ के पार भी जा सकता है जब आप पुरानी खबरों को इस तरह से जोड कर देखते हैं तो पाते हैं कि भारत का रुपया 2024 के पहले से ही कमजोर होने लगा था यानी युध से पहले सरकार को डो ढाई साल का वक्त मिला और इस दोरान मोदी सरकार रुपय के गिरने को नहीं � इस असफलता को छिपाने के लिए युद के बाद के वैश्विक संकटों का जाप बार बार किया जा रहा है हमारे कारण नहीं वैश्विक संकट के कारण रुपया गिर रहा है मार्च के महिने में समाजवादी पाटी के सांसद धरमेंद्र यादव ने वितमंत्री निर्मला सी क्या आज आप इस बात में काईम हैं कि प्रदान मंत्री जी की साक रुपए के साथ गिर रही है या नहीं?

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जो 60 रुपए का 94 -95 रुपए हा हो गया है उसका इसपस्ट जबाप चाहिए क्योंकि चुनाव जीतने के लिए आप लोगी बातें कुछ होती हैं और नीतियां बनाने क के हमारी अर्थवेवस्ता दूनी हो गई, ती नंबर पर पहुँच गई, चार नंबर पर पहुँच गई

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गई और जब अर्थव्यवस्ता के लिए आप जवाब देते हैं रुपाई के मुकावले पे तो आप उधारन के तोर पे दच्चिर कोरियाई बोट कहते हैं थाई बाट को कहते है धरमेंद्र यादव ने 30 मार्च को यह सवाल पूछा था जिस दिन पहली बार रुपिया 95 के पार गया अब आप सुनीएं कि धरमेंद्र यादव के सवाल का जवाब वितमंत्री किस आत्मविश्वास से दे रही हैं मुश्कंत समझ रहे हैं येसे लिए बुसी के उपर प्रेश्टचिन हुटाया जा रहा है।पूरे दुनिया में प्रसंचा हो रही है।और ये भी है, अमारे फौरिन एक्स्ट्रेंज, रिसर्व, इतना साथ, बर्करा है, सॉलिड भी है।इसके कारण आज हम डॉलर का कोड़ा प्रसंचा हो रहे हैं।पूरे दुनिया देख रही है, हर एक emerging market का economy के साथ बारत को थुलने में हमारे रुपया टीक चल रही है।और रुपया को टीक चल रही है।

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रुपी के exchange rate के उपर अगर इतना चिंता है, मैं इनसे याद दिलाना चारी हूँ।बाकी साब macro economic fundamentals जब नीचे गरगे और fragile five में हम आ हम जताया जब पहली बार रुपया 95 के पार गया वित्मंत्री कह रही है कि रुपया गिर रहा है सिर्फ एक विशय को पकड़ कर अर्थ विवस्था की काम्याबी को कम किया जा रहा है।

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उनके लिए रुपय का गिरना सिर्फ एक विशय है।आपने नोट नहीं किया क्योंकि जनता धर्म के नाम पर गर्व करने में लगा दी ग उसे उसका अपना हाल नहीं दिख रहा कि 12 साल में उसकी आर्थिक तरक्की कितनी हुई जब रुपया 95 के पार जा रहा है तब वित्मंत्री दावा कर रही हैके एकार्मी के सारे फंडामेंटल्स ठीक हैं और तब भी रुपया घिर रहा है उस समय भी खबरे छप रही थी कि रुपया घिरता जा रहा है 22 मार्च की मोनोजीत साहा और अंजिली कुमारी की कुछ डीलरों से बात कर लिखी गई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि रिजर्ब बैंक ने चार अरब डॉलर बेचे तब जाकर 23 मार्च को रुपया 93 .72 पर टिका नहीं तो 95 पर पहुँँच जाता इसके बाद भी रिजर्ब बैंक की तमाम कोशिशों के बावजूद एक हाफ़ते बाद ही रुपया पंचानवे पार कर गया।News Laundry में विवेक कॉल ने लिखा है कि सोना नहीं खरिदने की प्रधान मंत्री मोदी की अपील के पीछे असली कारण है डॉलर की समस्या।जिसके कारण रुपय पर बहुत दबाओ पढ रहा है।भारत अपनी जरूर और industrial input भी बड़ी मात्रा में आयात होते हैं इन सब का भुक्तान डॉलर में किया जाता है इसमें आप चीन के साथ भारत के 112 अरब डॉलर के व्यापार घाटे को भी जोड लिजे चीन से आयाग पर भारत की निर्भरता इन 12 वर्षों में बढ़ती चली गई इसका मतलब है भार इसके अलावा युद्ध, हुर्मूस, तेल की दाम इन सब के कारण होता है जिस समय पर डॉलर की मांग बढ़ रही है

15:25

उसी समय पर डॉलर के आने की उमीद कम होती जा रही है।इसी वज़से रुपया धबाव में है।रिजर्ब बैंक को अपना फोरेक्स बेचना पढ़ रहा है।यह सब विवेक कॉल कह रहे हैं।इन बातों का यही तो मतलब है कि 12 साल में तेल का उत्पादन नहीं बढ़ा सके, खाददान तेल के उत्पादन में आत्म निर्भर नहीं हो सके, आयात पर निर्भर होते चले गए, Make in India फेल हो गया. पिछले 12 साल की असफलताओं का धेर लग गया और उसी धेर से रुपया लु लोगों को विदेश यात्राओं पर नहीं जाना होगा सोना नहीं खरीदना होगा work from home करना होगा प्रदान मंत्री मोदी को सबसे पहले इसका जबाब देना चाहिए कि रुपय के गिरने को लेकर 2013 में जो कहा करते थे उनकी समझ में कुछ बदलाव आया है या नहीं या तब उन कि दिल्ली सरकार और रुपिये के बीच में कॉंपिटिशन चला है कि इसकी आगुरुद तेजी से घिरती चली जा रहा है कौन आगे गया है इसकी कॉंपिटिशन चला है देव जब आजान हुआ तब एक डौलर, एक रुपिये के बाराबएक रुपिये में एक डौलर पित्ता था जब अतल्जी की सरकार थी अतल्जी जब पहली बार सरकार बन रहे था तब तक मामला पहुँच गया था 42 रुपिये से था और अतल्जी ने जब छोड़ा तब 44 पर पहुँचा था चार कोटि� उस समय लोगों को लगा होगा रुपय की कितनी समझ होगी मन मोहन सिंग् तो समझने के लायक भी नहीं अब क्या लग रहा है पता नहीं चुनाओं जीतना और अर्थ विवस्था को मैनेज नहीं कर पाना दोनों अलग अलग चीजें हैं अर्थ विवस्था को बिना मैनेज किये लेकिन घर -घर में आपको धर्म की राजनिती के एक्सपर्ट मिल जाएंगे।

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कोविट के समय जब विपक्ष आरोप लगा रहा था भारत की अर्थविवस्था इसलिए संकट में हैं क्योंकि मोदी सरकार की नीतियां भी फेल रही हैं।केवल गलूबलाइजेशन कारण नहीं देखिये आपकी इच्छा रहती है ने

19:14

पंडिशी का नाम नहीं बोलता हूँ आज मैं बार -बार बोलने वाला हूँ आज तो नेहरू जी ही नेहरू जी मजा लीजी आज आपके नेटा कहेंगे बजा आगया मांने देखिए पंडिश नेहरू जी ने लाल किले पर से कहा था उस समय नेहरू जी लाल किले से देश को संभोजन करते हुए क्या कह रहे हैं कभी कभी कोरिया में कोरिया में लडाई भी हमें प्रभावित करती है इसके चलते वस्तों की कीमते बढ़ जाती है इती नेहरू जी बारत के पहले प्रदान मंत्री कभी कभी कोरिया में लडाई भी हमारे नियंत्रण से भी बहार हो जाती हैं देश के सामने देश का पहला प्रदानमंत्री हाद उपर कर देता हैं हाद उपर कर देता हैं आगे क्या कहते हैं देखो जी आपके काम की बात हैं आगे कहते हैं पंडित नहरू जी आगे कहते हैं आगे आगे

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इस बयान को चलाकर लोग प्रधान मंतरी मोदी से पूछ रहे हैं आपने क्या हाथ खड़े कर दिये जो अपील कर रहे हैं रुपया क्यों कमजोर हो रहा है इसके कारणों को दो हिस्सों में बांट कर देखा जाना चाहिए युद्ध के पहले दो ढाई साल से क्या हुरा था और युद्ध के बाद दो महिनों में क्या हुआ?अगर युद्ध कारण है तब फिर अमेरिका के आगे इतनी चुप्पी क्यों?क्या सरकार ने अमेरिका की आलोचना की कि उसके नजायस युद्ध के कारण भारत की आर्थिक कि अमेरिका के राजिदूत शपत ग्रहंड समारों में जाने लगे हैं तो कम से कम उसके बदले टैरीट से लेकर तेल और गैस की सप्लाई में उस अमेरिका ने क्या मदद की यह भी बता दीजिए यही विदेश नीती की असफलता है लेकिन हम बात आर्थिक नीती की असफलता क अमेरिका ने कहा रूस से तेल लेना बंद कीजिए बंद कर दिया उसके पहले दलिले दी गईं देशित में जहां से भी सस्ता तेल मिलेगा भारत खरीदेगा अमेरिका ने जैसे कहा खरीदना बंद हो गया अब क्या हो गया है रूस तेल देना चाहता है और भारत तैयार नहींरूस से तेल खरिदीने का साहस नहीं दिखाना चाहिए।रॉय्टर्स में क्रिष्ण एन दास और निधी वर्मा की रीपोर्ट है कि एलेंजी की कमी होने के बावजूद भारत ने रूस के एक टैंकर से एलेंजी लेने से मना कर दिया।जबकि अप्रेल से ही ये टैंकर � जिस दिन Reuters की रीपोर्ट आई उसे दिन Bloomberg में आई ये रीपोर्ट बता रही है कि Fertilizer से लदा हुआ एक Tanker जो भारत की तरफ आ रहा था उसका ओडर कैंसिल कर दिया गया है. April में tender जारी होने के बाद Tanker की Booking की गई थी लेकिन शक हो गया कि Shipment इरान से जुड़ा हो सकता है इस तो दूसरी तरप यह भी रिपोर्ट आ रही है कि भारत ने अमेरिका से मांग की है कि रूस के तेल पर मिली छूट की मियाद बढ़ा दिजाएं ब्लूम बर्ग में रुची भाटिया राकेश शर्मा ने सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट किया है सब कुछ सूत्रों के हवाले स सुनो इस बार गले नहीं लगेंगे, इस बार नए टैरिफ लगाएंगे।

24:50

तक नहीं निकली, आज तक गाएम हैं।

25:00

जंता का ध्यान वहाँ ना चले जाए तो पारलमेंट में दो दिन ड्रामा चलाया सच्चाई है कि आर्थिक तुफान आने वाला है गोविड आया था नरेंद्र मोदी जी जी ने थाली बज़वाई मोबाईल फोन की लाइट दिखवाई अब आर्थिक तुफान आ रहा है सामन राहूल गांधी ने उसके पहले से कितनी बार कहा GST के कारण चीजे महँगी हो गई दुकांदार से लेकर खरीदार दोनों तबा हो गए हैं भारत में खपत इसलिए घटी क्योंकि लोगों के पास पैसा नहीं बचा मगर सरकार उनकी बातों का मजाक उडाने लगी गोधी मीड नतीजा यह हुआ कि लोगों ने तभी खरिदिना कम कर दिया क्योंकि रेट कम होने वाले थे।कंपनीयों के हाथ पाऊं फूल गए और जनता यह सब भूल गई।GST में जो सुधार हुआ उसका क्या असर हुआ?अगर बहुत बड़ा असर हुआ होता तो आज तक इसकी र इसके बाद भी GST और नोटबंदी उनके भाशनों में एक बड़ा फैक्टर है

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Narendra Modi ji ne note bandi ki, galat GST lagu kar di, aur desh me jo bhi chote chote, choti choti campaniya thi, karkhane thi, industry thi, un saro ko jaan mooch ke Narendra Modi ne khatam kar diya, maad diya. Narendra Modi ji janta ke liye kuch nahi karte, 2 -3 narab patiyon ke liye kaam karte hai aur poora ka poora fayda yaar Narendra Modi ko jaata hai, या पिर बीजेपी के नेताओं को और बीजेपी के संगठन को जाता है।

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हिडलाइन से जनता मैनेज हो जाती होगी, मगर देश मैनेज नहीं होता हम 2025 की बात कर रहे हैं उसी साल विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारत का खेल समझ लिया यहां के मार्केट से अपना उननीस दशमलव साथ बिलियन डॉलर यानी करीब एक लाक असी हजार करोड रुपया निकाल ले गए इस साल के चार महिने में ही इतना निकाल चुके हैं लेकिन पैसा तो वे युद्ध के पहले से निकाल रहे थे तब घरेलू सांस्थानिक निवेशक DII और म्यूच्वल फं� सरकार ने विदेशी निवेशकों के निकलने के सबालों को भी ठोकर मार कर उड़ाया था क्योंकि वद चुनाओं जीत रही थी और जिसके चुनाओं जीतने पर वोड चोरी से लेकर वोड काटने तक के तमाम आरोप लग रहे थे निरमला सिता रमण का वो बयान याद कीज़े अगर वो जाने के लिए जाने के लिए जाने के लिए जाने के लिए जाने के लिए जाने के लिए जाने के लिए जाने के लिए जाने के लिए जाने के लिए जाने के लिए जाने के लिए जाने के लिए जाने के लिए जाने के लिए जाने के लिए जाने के लिए जाने के लिएविदेशी निवेशक भारत को निवेश लायक नहीं समझ रहे हैं और वित्मंत्री कह रहे हैं परवा नहीं एक और बात आपने नोट की होगी प्रधान मंत्री मोदी ने विदेशी निवेशकों से अपील क्यों नहीं की कि आप भारत में पैसा लगाईए निकाल कर मत ले जाए विदेशी निवेशकों से अपील नहीं करते और भारत की अंजान और आम जनता से अपील की जा रहे हैं आप लोग आगे आईए विदेशी मुद्रा बचाईए तेल कम खाईए तेल कम भराईए विदेश मत जाईए जो लोग विदेशी मुद्रा यानी डॉलर निकाल कर जा र कोई भी फंक्षन हो, कोई भी कारकम हो हम सोने के गेहने नहीं खरिदेंगे सोना नहीं खरिदेंगे विदेशी मुद्रा बचाने के लिए हमारी देध भक्ती हमें चुनोती दे रही है और हमें इस चुनोती को स्विकार करते हुए विदेशी मुद्रा को बचाना हो� संकट से हाथ खड़े करने का अवसर के उसके कारण यह संकट नहीं है युद के कारण गोधी मीडिया आपको समझा देगा और आप गर्व करते रह जाएंगे बारा साल से गर्व करने का एक फाइदा तो हुआ के नुकसान होने पर भी आपको पता नहीं चलता इसलिए गर्व कजो लोग भारत में धर्म के नाम पर गर्ब करने में लगे हैं वही लोग अपने बच्चों को विदेशों में भेज रहे हैं और डॉलर भेज रहे हैं कुछ देश भक्ती का काम इन माबाब को भी मिलना चाहिए कहना चाहिए कि आप अपने बच्चों को बुला लीजिये डॉल जो 12 साल में भारत की नागरिक्ता को नमसकार कर विदेशों में बस गए और जनता को मुसल्मानों से नफरत करने के लिए नागरिक्ता का मुद्धा थमा गए हम भारत की अर्थविवस्था की बदहाली के कारणों की ही बात कर रहे हैं हिंदु बिजनिस लाइन ने एक विशलेशन किया है भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 27 परवरी को 728 .5 बिलियन डौलर था एक माई को घटकर 690 .7 बिलियन डौलर हुआ लेकिन हंगरी और चिले भी तेल और गैस के आयात पर निर्भर देश हैं इनका विदेशी मुद्रा भारत जितनी गिरावट नहीं आई उनकी गिरावट मामुली रही विशलेशनों के बीच -बीच से इस तरह की जानकारी छान कर लाया हूं तब आपको दिखा रहा हूं कि सरकार बताते वक्त क्या -क्या नहीं बताती है युद्ध के कारण संकट विकराल हुआ है मगर संकट तो युद के कई साल पहले से आने लगा था. 2025 में भी तो भारत का शेयर बाजार नेगेटिव रिटर्न देता रहा, इसे आप कैसे भूल गए?सितंबर 2024 में निफ्टी 50, 26 ,277 पर पहुँचा, दो साल में वहाँ से 5 -10 प्रतिशट नीचे आ गया. Business Standard में सामी मोदक की रिपूर्ट है कि Global Market Cap में भारत का हिस्सा तीन फीसत से नीचे आ गया है जबकि Market जब अपने शीर्ष पर था तब Global Market Value में उसका हिस्सा तीन.73 फीसत था कुछ भी 28 फरवरी के बाद अचानट नहीं हुआ लेकिन गोधी मीडिया ठेल ठेल कर यही समझाएगा सब कुछ 28 फरवरी के बाद से हुआ वैश्विक संकट आया है कि आ� सुबास चंद्रगर्ग का विशलिशन पढ़ा क्विंट में च्ःपा है आप जिन अख़बारों को पढ़ते होंगे उसमें शायद सुबास चंद्रगर्ग का लेक च्ःपे क्योंकि वे सरकार के हर दावों का गुनगान नहीं करते हैं सबाल और आलोचना को हटाते हटाते भी क्विंट में पुर्ववित सचीव सुभास चंद्र गर्ग ने बताया कि 2025 में भारत का स्टॉक मार्केट सबसे खराब बाजारों में रहा है जबकि दुनिया के दूसरे बाजारों में तेजी देखी गई 2026 में भारत का शेयर बाजार पीछे दिखाई दे रहा है गरक का कहना है कि भारत का स्टॉक मार्केट घटे हुए रिटर्ण के लंबे दौर में प्रवेश कर सकता है क्योंकि भारत का कॉर्परेट निवेशकों को भारत के IT और स्कार्टब सेक्टर का हाई ग्रोथ एज़ चला गया है AI, Chip और Energy Transition के शेतर में भारत की कोई खास भूमिका दिखाई नहीं दे रही 2019 के बाद से Corporate Tax, Income Tax, GST में रियायत दी गई लेकिन उससे कुछ समय के लिए फाइदा हुआ मगर जो बढ़थ मिली थी वो अ एक समय पर SIP, Retail Apps, Gold Fund वेगरा के कारण बाजार में तेजी आई लेकिनसे अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेश्कों ने भारत के बाजार से 3 .6 लाग करोड रुपए निकाल लिये हैं निर्यात कमजोर, आयाग पर निर्भरता बढ़ती जा रही, Forex पर दबाव बढ़ रहा और वित् GDP के दावे भरोसे के लायक नहीं रहे इसलिए अब स्टॉक मार्केट में फिर से तेजी दिखाई देने के आसार कम होने लगे हैं भारत को इस वक अगर डॉलर ही डॉलर चाहिए तब फिर निर्याद पर रोक क्यों लग रही है?

35:08

30 सितमबर तक कची, रिफाइंड, सफेध चीनी क्या अब उसे डॉलर नहीं चाहिए।आपको याद होगा पस्चीम बंगाल में 23 अप्रेल को मतदान हो रहा था।उस दिन कोटक इंस्टिटूशनल एक्विटीज की रिपोर्ट आई कि तेल मार्केटिंग कंपनीयां भयंकर घाटे में जा रही हैं।इसलिए चुनाओं के ब हमें सबसे खराब इस्थिती के लिए भी खुद को तैयार कर लेना होगा।उदै कोटेक ने अब क्यूं कहा कि हमें आने वाले खत्रे के लिए पहले से तैयारी कर लेनी चाहिए?खत्रा क्या चुनाओं जीतने के बाद नजर आया?

36:07

या दो साल पहले से नजर आने लगा था?मह अप्रेल में थोक मुल्य महँगाई दर 8 .30 प्रतिशत हो गई हैं, 3 .5 साल में उच्छितम स्तर पर हैं।इस रफ्तार से महँगाई आपके जीवन में प्रवेश करने वाली है खुद्रा मेहगाई 14 महिनों में सबसे अधिक स्तर पर है बिजली और इंधन की मेहगाई दर में अप्रेल के महिने में 24 दशमलब 7 .1 प्रतिशक्ति व्रिध्धी हुई है इन सब का असर उन तमाम चीजों पर पड़ेगा जिनका उपभोग आप करते हैं 14 मयी को 1 डौलर 95 रु� अब 96 रुपय पर पहुँचने की बात होने लगी हैं बात करते करते भारत की अर्थविवस्था अपनी जगसे और नीचे फिसल जाती है हमारा वीडियो लंबा होना ही है अगर हम पहले की बातों को जोड़कर नहीं बताएंगे आपको पता नहीं चलेगा क्या हुआ और क्या � समाल यह होना चाहिए कि 2021 से 25 के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी विदेश यात्राओं पर 460 करोड से अधिक खर्च किये किस बात के इतने खर्च हुए हैं उन विदेश यात्राओं का नतीजा क्या निकला इस पर बहस होनी चाहिए मगर चर्चा इस पर चलाई जा रही फिर सौ कारों के काफिले का एश और कुछ समय के बाद दस कारों को घटा कर देश के लिए त्याग का जलवा नमस्कार मैं रवीश कुमार

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