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Bengal Shocker 2026: How Mamata Banerjee Lost Her Fortress ? | Explained | Narendra Modi | TMCvsBJP

Shubhankar Mishra 41 views
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क्या मम्ता बेनर्जी सच में बीजेपी से बंगाल में हार गई?ये सच एक बिजली के जटके जैसा है।क्योंकि पश्चिम बंगाल वो राज्य है जहांपर मम्ता दीदी की मरजी के बगाएर एक पत्ता तक नहीं हिलता था।वहीं का वोटर खामुशी से तक्ता पलट की प� राजनेतिक सोंच को पलट दिया है।क्योंकि जिस शामा परसाद मुखरजी की धरती पर बीजेपी लहर से आगे बढ़कर सुनामी से जीद दर्श करती है, बीजेपी 1950 से इससे अपने खाबों का बंगाल बनाना जाती थी।2016 तो ये जमीन तलाश रही थी।

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2021 में धरवाजे क्योंकि किले अक्सर बाहर से नहीं अंदर से गिरते हैं सवाल की दरार कहां पड़ी बीजेपी अचानक से मज्मूत हुई टीम्सी अचानक से कमजूर हुई या फिर सोची संजी तयारी थी क्या धर्म की राजनिती मम्ता बैनर्जी के बाहर जाने की वज़ा बनी या फिर जन लेकिर वहलाओने ही...खिलाफ उड़ दिया सवाल ये भी की वो मुस्लिम वोटा जिसको लेकर दीदी बहुत स्टॉंग स्टैंड लेती थी क्या वो भी छिटकर किसी और के पास गया देखे मम्ता बेनर्जी को � और आज इसे लिए जब हम विश्लेशण करेंगे तो कई बातों को समझना सरूरी है।आज के विश्लेशण में हम समझेंगे कि पश्यम बंगाल जो श्यामा प्रसाद मुखरजी की भूमी है वहाँ पर BJP के जीत के माइने क्या है?क्या बंगाल में मम्ता किला कमजोर थ योजनाओं के बावजूद बीजेपी के साथ गया?भदरलोग बीजेपी के साथ क्यों गया?मम्ता बेनरजी का आमार बांगला बाहरी बीजेपी वो क्यों नहीं चला?

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जाती समीकरण ने कैसे पटका?परवासी मजदूरों ने कैसे जटका दिया?और आर्थिक तंगी और उन बड़ी बाते बी जी पी के साफने होंगी ये सारी बाते में आपको बताएंगे इसलिए हमारी आपसे खुदारिश है कि अगर आपके पास समय है एक अच्छा विश्णिशर देखने का नूट्रल पॉंट अव्यू से तो आप इस वीडियो को देखिए नहीं समय है आपको ज�

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बहुत सारे लोग हैं यूट्यूब पर टीवी पर जो आपको बता रहे होंगे अपने अपने जिंडे से लेकिन अगर आप रुख रहे हैं तो हमारी आप से गुजारिश भी है कि आप हमारे वाटसेब चैनल से ज़रू जो अब यहाँ ठेरे हैं।

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देखी अगर आंकडों गोहर करें और गहराई समझें तो समझ में आता है कि बंगाल की जमीन पर इस बार चुनाव कोई साधरन चुनाव नहीं था, एक राजनितिक क्रांटी था।

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चार माई 2026 को जो नतीजे आए, उन्हें देखकर ऐसा लगता है क दो सो के आसपास सीटे बताई जा रही हैं बीजेपी के सो के आसपास सिमट रही है टीमसी दो चार सीट आगे पीछे हो तो उसको लेकर लोड मत लीजेगा क्योंकि वो अंकडा आगे पीछे हो रहा है लेकिन जो बड़ी बात है वो ये की पिछली बार के मुकाबले 120 सीटों से जो बताता है कि बंगाल में एक बहुत बड़ा हिस्सा है जो बदलाव के पक्षियों वोट कर रहा था वो जो 90 % वोट पड़े थे वो इसी वजासे पड़े थे क्योंकि वो बीजेपी को जिताना चाह रहे थे इसलिए सिर्फ सीटो की जीत नहीं है उस पुरानी कारिशेली को �तुकि बंगाल की इस जीत को अगर आप सिर्फ हार जीत के आंकलों से देख रहे हैं तो इस तस्वीर का एक बहुत बड़ा हिस्सा आप निस करते हैं।

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इस जीत के सबसे बड़े माइने ये है कि बीजेपी के लिए चुनाव सिर्फ एक चुनाव नहीं है।

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अपनी वैचारिक � पहले वांपन्थियों का लंबा दौर था एक ऐसा दौर जहां धर्म संस्कृती की बात करना राज्रिती के किंदर में नहीं था फिर 34 साल बाद वो हटे तो TMC आ गई उन्होंने अपनी एक अलग मजबूत शित्रे पहचान खड़ी की इस पूरी प्रक्रिया में BJP हमेशा एक � बीजेपी के ले जीद एक किसम की वैचारिक घर वापसी है क्योंकि सालों तक जिस राष्टवाद और सांस्कृतिक पहचान की बात को बंगाल के मुक्य धारा के राजनिती में हाशिय पर रखा गया आज उसी सोच को बंगाल के भद्रलोक और आम जंता दोनों ने मिलकर सहज स मुखरजी के जमीन पर कमल खिलना ये साबत करता है कि राजनिती का पईया वहीं पर आया है जहां से इसकी शुरुवात हुई थी और ये इशारा करता है कि बंगाल केवल शेत्रिय पहचान तक सीमित नहीं है मुख्यधारा की राजनिती का हिस्सा बन रहा है जिसकी नीव कभी सबसे बड़ा सवाल ही उठ रहा है जो लोग शॉक देते हैं।

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जिस भी राज में महिलाओं को लेकर तमाम स्कीम्स दी गई हैं. वहाँ पर कभी हार होई ही नहीं. फिर बंगाल मम्ता कैसे हार गई?वो तो खुद महिला थें. महिला जिसने उमीज जगाई थी।

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लेकिन 2026 के नतीजे बताते हैं कि जब बात इजद सुरक्षा गरीमा के आती है तो शायद पैसे या सरकारी मदद तुछ पड़ाती है।RG का रस्पताल जैसे डरावनी घटनाओंने बंगाल में महलाओं के सुरक्षा के दावों को पूरी तरह से के दिल में चली गई और संदेश खाली के महिलाओं ने जो दरदना का बीती सुनाई उसने पूरे बंगाल की महिलाओं को जख चोडा यही वो मोड है जहाँ TMC का सबसे मजबूत वोडड बैंक था जो BJP की पक्षम चला गया यह बात साबद करती है कि सरकारी योजनाओं का ला 2026 के चुनावी नतीजों में अगर कोई एक एसी जीत है जो उसने मम्ता बेनर्जी की सत्ता की नीव हिलाई है तो वो है पनिहटी सीट से रत्ना देवनाथ की अत्यासक जीत रत्ना देवनाथ कोई पेशेवर निता नहीं वो उस बदनसीब बेटी की मा है जिसके 2024 में आर्जी जब अपनी बेटी के इनसाफ के लिए उन्होंने हर दर्वाज़ों खरकटाया और सिर्फ राजनिती मिली तो ये तैंक किया कि सिर्फ रियाचक भी है।इनसाफ माँगना है बलकि सिस्टम के अंदर बैठ के बदलना है टीमसी का भेदगड था पनिहाटी वहाँ पर टिकेट मिला रतना देवनात ने राजनीती न इन तस्वीनों ने बंगाल की करोड़ों महिलाओं को हिला कर रख दिया उनके दिल में घर कर दिया और उन्हें लगा की रत्ना देवनाथ असली आवाज हैं जो सत्ता की कुर्सी पर बैठ कर उनकी सुरक्षा गेरंटी दे सकती हैं बीस हजार वोटो से जदा मारजिन से उनकी � जब एक मा राजनिती अखाड़े में तरती है तो बड़े बड़े किले ताश के पत्तों की थे।

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लेकिन सवाल ये क्या ये अकेला विशे था?या वाख़ई बंगाल ने मम्ता का किला कमजोर हो गया था?

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देखिए, अगर 2011 से 2021 तक के दोर को याद करें तो बंगाल में सिर्फ � अब जो नतीजे आए हैं उसे देख कर ये लगता है कि 2021 के बाद से ही बंगाल के गाउं देहाथ में TMC को लेकर भरोसा तूटना शुरू हो गया था।सत्ता के लंबे दौर मेनिश्वली अस्तर पर निताओं का जो ताना शाही रवईया था।उसने आम बंगालियों के जिनदतक डरेंगे।2026 में जब मौका लगा तो वोट की चोड से जवाब दिया।वोटर के मन की नाराज़गी एक दिन की नहीं थी ये कई सालों से धीरे धीरे बन रही थी।

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वैसे ही जैसे लिफ्ट को खाड पेका था।वैसे जो लोग बंगाल की राजनिती को समझते हैं वो जानते हैं कि नार्थ बंगाल और साऊथ बंगाल के बीच एक बड़ा अंतर था बिलकुल वैसे ही जैसे टू इंडिया भारत और इंडिया के बीच में और इस बार के नतीजे साब बताते हैं कि दोनों इलाकों ने मिलकर TNC को इस बार के वोटिंग पैटन साफ लगता है कि नौर्थ बेंगॉल ने अपनी बरसों पुराणी नाराज़गी को बीजेपी के पक्षवें वोट किया।बीजेपी ने वहाँ के स्थानिय मुद्धों, शित्रिय गॉरव की बात की।उसने लोगों को जोश भरा।अगर बात स और इन दोनों इलाकों की जुगलबंदी ने TMC की जमीन को वहाँ से बदल कर दिया इसके अलावा BJP जादा टिव भी थी हाँ नतीजे देखकर यह बात साफ होती की BJP ने सिर्फ रैलियों और भाश्रों के जरी जंग नहीं लड़ी एक उन्होंने ध्यान दिया की कोई ऐसी बाकई कारिकर्ताओं की जान भी गई।

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दिरसल बंगाल की एक कड़वी सच्चाई है कि यहाँ अकसर डर के साए में राजनीती चलती हैं।2021 के बार जो हिंसा हुई उसने आम आद्मियों खामुश किया था।लेकिन इस बार बीजेपी ने अपनी पूरी संग कि उनका वोट सुरक्षित है।रैलियों में भीड भले ही कुछ भी कह रही हो।लेकिन जब वोटिंग मशीन के सामे लोग खड़े हुए, तो संगथन की सुरक्षा कवश ने बिना खौफ के अपनी असली पसंद चुननी की ताक थे।ये डर का टूटना था जो इसने TMC के प देखी ये इस चुनाओं में सबसे दिल्चिस्प और गहरा हिस्सा है और इसे बहुत बारीकी समझने की ज़रूत है।

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सालों से मुस्लिम वोल्ड बैंक को TMC के सबसे बड़ी ताकत माना गया।अटूट ताकत।इसे हिलाना असंभव था।लेकिन 2026 के चुनावी पैटर नती कुछ निताओं ने जूस तरह के बयान दी इसका भी अफ़र गया अल सेंखेक वोटरों को लगा कि शायद emotional बातें डराने की राजनिती सिलाई बदल नहीं रही और कई सारे और political मुस्लिम निताओं भी निकल कर आए जुनकी वजा से भी मम्ता का वोट छटका नतीजों को दे�वो निता जो पश्चिम बंगाल में नई बाबरी मस्चित बना रहे थे।क्योंकि उनकी जीत भी बताती है कि बंगाल में मुस्लिम जो अबादी है वो अपने मुसल्मान निताओं को आगे बढ़ाना जा रहे थे।

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और ये भी मम्ता के लिए एक परिशानी का सबकत।वैसे ही ये माना जा रहा था कि बीजेपी की सोच और विचारधारा ये वर्क स्विकार नहीं करेगा आम मध्यमवरगी बंगाले लेकिन 2026 के नतीजों ने पुरानी सोच पर ताला लगा दिया इससे देखकर लगता है कि इस बदलाव की पीछे केवल विचारधारा की लडाई नहीं ब शायद इसी वजासे सर्कारे खैरात नहीं चेह थी एक सुरक्षिस समाच चेह था जो ममता नहीं दे पारे थी और इसलिए वो बदलाव की तरफ गया है शायद उन्हें लगा कि बंगाल की विश्व विख्यास संस्कृती अब सिंडिकेट राश की भेट चड़ गया है बीजे� इसी वजह से शायद बंगाल के स्मिता का बीजेपी को रख शका और यही वजह चायद है कि आमार बांगला ममता का नहीं चला ममता बेनरजी का सबसे बड़ा राजनतिक दाओ हमेशा से बंगाली अस्मिता था सालों तक बीजेपी को बाहरी बताकर लोगों को कहा की हम आपके हइस अमार बांगला के नारे ने पिछली बार बहुत काम किया था लेकिन 26 के नितीजों को देख कर लगता है कि इस बार बीजेपी ने इस दाव को मम्ता के ख़लाफ़ से बड़ा हतियार बनाया इसकी एक बहुत बड़ी वजा नजराती है कि टीमसी की अस्मिता बंगाल के महान रिशियों क्रांतिकारी महापुर्शों की बात के जो से आम बंगाली को एहसास हुआ कि बीजेपी उनकी जड़ों और महान इतिहास का समान कर रहे हैं और बीजेपी ने भी सुनिश्ट किया कि बीजेपी का कोई भी नेता बंगाल या बंगालियों को लेकर को� बीजेपी की जबान से कोई ऐसी बात पकड़कर हाइलाइट करने का जो बंगालीयों की सेल्फिसफिट को हट करते हैं और इसी वजह से लोगों ने महसूस किया के पहचान के नाम पर मम्ता तरक्की की दौलें पीछे छोड रहे हैं लोगों ने इस बार साफ किया बंगाल के ब लेकिन 2026 के असली कहाणी वहाँ के सामाजिक और जातिगत समीकर्णों में उलटफेर किये।मतुआ, नामशुद्र और राजबंशी जैसे बड़े समुधायों ने इस बार बीजेपी को समर्थ थे।जो इस जीत की बड़ी वजह बना थे।इन लोगों का काफी समय से ये ल�

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के बीज भी TMC खिलाफ नाराज़गी चरम पर थी।ये महसूस हुआ कि सरकारी तंथर में उनके हक मारे जा रहे हैं।बीजेपी ने इन वर्गों को मानसंबान दिया।उनकी जमीनी समस्याओं को राजनिती एक केंडर बनाया।

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नतीजों साफ लगता है कि जब ये वर्ग TMC स और रही सही का सर प्रवासी मजदूरों ने पूरी कर दी पशे मंगाल में 2026 में TMC के हार में प्रवासी मजदूर एक बहुत बड़ी भूमिका निमा रहा है गेम चिंजर है बंगाल के लाखों युवाश काम की तलाश में दिल्ली, बंबई, गुजराज जैसे राज्यों में � लोगों ने प्रदर्शन किया, लिफ्ट सरकार खिलाब, मम्ता को समर्थन दिया।लेकिन जो नई पीड़ी आई, जब वो मजदूर बनने लगी, मजबूर हो गई, तब शायद उन्हें ऐसास होने लगा कि विकास के रास से बढ़ना भी सरूरी है।और छणाव के वक्त जब उनके अपने राज में संगर्श है इन मज़दूरों के लिए ये वोट सिर्फ पार्टी को चुनना नहीं था बलकि घर में संबान के साथ वापस आने की क्रांती की तरफ ख़दल था बीजेपि निसार्थिक पीडा को भी गहराई से उठाया डबल एंजन की सरकार बोलकर चु

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Ruben, Netherlands

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में एक बड़ी जीत दरच किया।

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और इसी वजह से आर्थिक तंगी भी थी।और इसलिए सवाल, क्या आर्थिक तंगी ने बंगाल से ममता को हटाया?देखे सच कहें तो आखर में पेट की आग, खाली जेब असली हकिकत है।बंगाल में कारखान परदाश के बाहर हो गया था, BJP ने सार्थ एक परिशानी लोगों गुस्सों को ताकत बनाया, बड़े उद्योगों और नई नौकरियों का एक सपना दिखाया और इस सपने पर शायद लोगों ने यखीन कर लिया, कम से कम नतीजे ये कहते हैं शायद लोगों को यखीन हुआ थोस काम इस बार जा रहा था और उन्हें जब विकल दिखा सराखों बिठा लिया 200 पलस सीट इसी का नतीजा लगती है और इसी ने 15 साल के ताबूत में आखरी कील्ट होगी हला की पश्चिब बंगाल में बीजीपी की एतिहासिक सरकार बनने के बावजूद बंगाल की नई सर बंगाल में बीजेपी ने टीमसी को हटा कर परिवर्तन तो कर दिया विजए का शंकनात कर दिया शैमा परसाद मुखरजी के जमीन पर कमल खिला दिया लेकिन बंगाल की मुसीबितें रात और रात खतब नहीं होगी नई सरकार के सामने जो सबसे बड़ा पहार है वो है बंगा कानून और रवस्ता को इस तरह सुधारना कि आम आदमें खुद को सुरक्षित महसूस करें।बाहर के निविश्यक बंगाल की हो रहा है।यह बहुत बड़ी अगनी परिशा है।

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इसके अलावा सिक्षा के शेतर में जो गड़बड़िया हुई, उन्हें सुधारना, जिवा�पारदर्शी तरीके से नौकरियां देना ये नई सरकार के लिए भी परिशानी का सबब होगा।बहिनत पड़ेगी इसके लिए।बंगाल के समाज में दरारे आई हैं।उसे पाठ कर एक साथ लाना।विकास के नए शिक्र पढचाना।

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ये सरकार के लिए असली � अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या बीजेपी वो अमीद जगाएगी जो टीमसी से उजिल हुई है या फिर जैसे लेफ्ट से टीमसी, टीमसी से बीजेपी 95 % से जादा वोटिंग हुई है ये बताती है कि बंगाल की जंता खुद अपना भाग बदलने के लिए जोध्धा क देखिये विश्टेशर तो यही कहता है कि पुरानी सोच की जीत और पुराने कुशासन की विदाई है।राजनिती का सबसे बड़ा सबक यही है कि जिनता बदलाव का मन बनाती है तो दुनिया का कोई भी गडर रोप नहीं सकता।आज बंगाल एक नई शुरुवात कर रहे ह कि उससे सनातन का साथ मिला है हिंदुत का साथ मिला है माकाली के घर में पहली बार आशिरवाद मिला है लेकिन अशिरवाद साथ चुनोतिया भी है और ये चुनोतियों पर अगरकरेगी तो जंता फिर आशिर्वात देगी वरहां मम्ता वो भी शायद एक मौके के तलाश में होगी क्योंकि मम्ता वो कमजोर समझना बहुत बड़ी गलती हो सकती है औ एतिहास से खार और इस हार के साथ बीजेपी को बद़ाई बंगाल की जुनता जिसने वोट जिसको भी दिया उनको लोकतन्त के इस पर्व में शामिल होने के लिए बदाई इस विश्टेशन के लावा कोई और आपको वजा लगती है जो स्वज़ास से बंगाल में इस खेल हु

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