China’s Silent Invasion? | India Losing Land In Arunachal? | Govt Says All Is Well | Akash Banerjee
अन्राचल पदेश में रहने वाले भारत के एक आम नागरिक केरू चादेर ने पिछले महिने अपने जिले के डेपिटी कमिशिनर को एक लंबा चोड़ा मेमरांडम भेजा ये memorandum एक local tribal community ना welfare society के तरफ से भेजा गया था जिसमें इस community की ancestral जमीन पर पडोसी मुल्क चीन के कभजे की बात लिखी गई थी इस letter में बताया गया कि कैसे जिन hunting areas में जिन जगों में अभी कुछ सालों पहले तक उनकी community मवेशी चराने जाते थे ग्रेजिंग के लिए जाते � इस पत्र में डीटेल में बताया गया कैसे अरुराचल के अपर शुबहनसीरी डिस्ट्रिक्ट के पाँच एरियाज ओइंग, पानियार, मारपन, पोट्रॉंग लेक और तीन दीन तंग जो 2020 तक उनकी जमीन हुआ करती थी वो अब चाइना के PLA के कबजे में आ चुकी है वहाँ चाइना ने रोड्स बनाने शुरू कर दिया है, मिलिटरी कैम आप खुद देखें इन सैटलाइट इमिजेस को. दो सैटलमेंट्स आपको यहां साफ दिखेंगी. हेली पैड्स, सोलर पैनल, सिमेंट मिकसिंग फिसिलिटी सब कुछ साफ साफ दिख रहा है. बीजेपी के अलावा इस वक्त देश में कोई भी और सरकार होती तो इस ख़बर स प्रेशभक्त ने राष्ट्री सुरक्षा को मद्दे नजर रखते हुए इस बामले में कुछ दिनों तक तो हमने टिपड़ी नहीं की।लेकिन अब 15 दिन हो चुके हैं और हमने देखा कि सरकार के तरफ से डिफलेक्शन और डिनायल के एलावा और कोई एक्शन नहीं दिख रनहीं वहां कोई हमारी सीमा में गुसाया है नहीं कोई गुसा हुआ है नहीं हमारी कोई पोस्ट किसी दूसरे के कभजे में है।NetNet सरकार के तरफ से पिछले दो हफतों से बयान यही आया है कि अर्राचल में चाइनीज इंकरजन के जो रिपोर्ट्स हैं वो घलत हैं बे गुनियाद हैं जैसा की हमेशा होता है और किरिन रिजीजू ने क्लैरिफाई Incursion, Transgression, English is a very funny language. BJP ke Rajya Sabha MP Tai Tagak ne toh yahan tak keh diya ki yeh sabh purane photos hain. Monsoon ke baad hum verification karenge ab yeh sabh chup chaap baith jao. Matlab ya to Arunachal Pradesh ke jo local tribe hai wo jhoot bol rahi hai. Ya to Sarkar China se conflict avoid karne ke chakkar me kuch bolna nahi chahati hai. Chahe dheere dheere zameen China ke hawale kar de. अब ना ट्राइब जूट क्यों बोलेंगी, उसका मोटिव यहां क्या है, इसके बारे में तो हमें पता नहीं।लेकिन सरकार के काम करने के जो तरीके हैं, जो तौर तरीके हैं, उससे हम अच्छे तरीके से वाकफ हो चुके हैं।चाइना को अपीज करने के लिए भारत आज क या innocent transgression हैं?
क्यों सबूत होने के बावजूद मोधी सरकार local tribes के claims को deny कर रहा हैं?क्यों China एक के बाद एक हमारे territory पर घब्जा किये जाता है और हम कुछ कर नहीं पाते हैं?क्यों ये सरकार China को लालाग दिखाने की जगए उसके सामने जुग जुग कर बात करती हैं?और ऐसा क्यहो रहा है कि ये सब होने के बाद हम कभी भी कोई कड़ा एंटी चाइना मेजर नहीं ले पाते हैं?जैसे कि हमारे हाथ बधे हुए हैं इंडिया में एक पूरी intelligence apparatus काम करती है. RAW है, IB है, Army Intelligence है, Satellite Monitoring होता है, Border Patrol होता है. ये सब agencies हजारों करोरों रुपई, Taxpayer के रुपई के budget से चलती हैं. लेकिन फिर भी आप note करोगे कि हर major जो intrusion होता है हमारे देश के अंदर, इसकी खबर agency से पहले local tribe से आती है. चाहे अगर आप याद करें कारगिल जंग के पहले जेनरल परवेज मुशर्रफ की जो चालवाजी चल रही थी या फिर गालवान क्राइसिस के पहले लदडाप के कुछ हिस्सों में चीन की जो घुस्बैट हो रही थी हर बार ये लोकल कम्यूनिटीज ही हैं जो सबसे पहले द याद रहे आपके और हमारे लिए ये दूरदरास के इलाके हैं लेकिन ये जो लोकल कुम्यूनिटीज हैं ये जो ट्राइब्स हैं उनकी जिंदगी इस जमीन से जुड़ी हुई है इस जमीन का एक छोटा सा भी हिस्सा अगर दुश्मन के देश के कंट्रोल में चले जाता है त एक प्रभाव पड़ता है।
उनके लिए matter करता है।एसी ही एक frontier region में रह रही है एक community नह।इस community के लोग high altitude areas में जाते हैं।शिकार के लिए जाते हैं।जड़ी मूठी के लिए जाते हैं।अपने मवेशी चराने के लिए जाते हैं।
बीते कुछ सालों में जो इन्होंने अ� खबर बहर आई, तो अलग -अलग एनलिस्ट ने सैटलाइट इमिजरी की पड़ताल शुरू की. Military camps, bunkers, civilian quarters, साफ उनको दिखे. पता चला कि 2024 से ही नए सैटलमेंट्स डेवलप हो रहे थे. दो हेलिपैड्स, completed buildings, parked vehicles, solar panels, सबकुछ दिखा थे.BJP के अपने MP तापिर गाओ जो इस एरिया से है उन्होंने 2019 में ही संसद में जीहाँ पारलेमेंट में ये कहा था कि चाइना इस region में 50 से 60 केलो मेटर इंडियन टेरिटरी पर कभजा कर चुका है 2022 में एक सत्रा साल के अरुनाचरली लड़के को चाइनीज आर्मी ने पकड़ लिया ये शियोंगला रीजन में जड़ी बूटी खटे करने गया था वो कोई कमांडो तो था नहीं कि चाइनीज टेरिटरी में घुस गया हो एक लड़का जो अपनी टेरिटरी में काम कर रहा था तो बीजेपी ने एक्शन लेने के जगए इसे एकनॉलेज्ज ही नहीं किया।इस बार फिर से सरकार का वही रवईया हमें दिख रहा है।ये एक पैटर्ण बन चुका है।जब भी चाइना के बारे में कोई अंकॉंफ़टिबल सवाल या सच सामने आता है तो पहला रिस्प सरकार चीजे कितना भी डिनाइ कर ले चाइना अपना लॉंग गेम खेले जा रहा है भारत देश के खिलाफ. बहतर तो यही होगा कि देश की जंता इस खेल को समझे और आने वाले सालों में सरकार को तयार होने के लिए बोल दे क्योंकि चाइना पीछे हटने वाला नहीं है. दरसल चाइना और राचल प्रदेश को साऊथ टिबेट या फिर जैंग नैन कहता है पूरे स्टेट के 80 ,000 स्क्वेर किलोमेटर से जादा एरिया चाइना इसे अपना हिस्सा मानता है याद रहे ये कोई चुड़बईया नेता नहीं है जो ये बयान दे रहा है ये Official China के Ministry of External Affairs की Spokesperson है लेकिन ये कोई नया क्लेम नहीं है ये डशको पुराना क्लेम हैलेकिन इस क्लेम को अब इनफोर्स करने के तरीके नए और जादा एगरेसिव हो जा रहे हैं पहला मेथड 2017 में चाइना ने अरुनाचल पदेश के 6 जगों के नाम ही बदल दिये।
2021 में 15 और जगे और 2023 में 11 और जगे के नाम बदल दिये।स्टैंडर्ड गेजिटीर के थुरू ओफिशल नेम्स बदले जा रहे हैं चाइना के ओफिशल मैप्स में।जिसको बाई देवे दुनिया भर यानि मैप्स के जरीए अपना एगरेशन दिखाना अपना कबजा दिखाना दूसरा मेथरड विलिजेज़ 2017 में टिबेट अटॉनॉमस रीजन ने अनॉंस किया कि सरहत पर वो भारी तादात पर गाउं बसाएंगे. 2018 से लेकर 2022 के बीच में 600 से जादा गाउं बसाए गए. एक छोटा सा हिस्सा है कि डिस्प्यूटेड टेरिटरी में ऐसे डिफेंस विलिजस बना दो इसका मकसद विलिजस दिखने में तो सिविलियन होते हैं लेकिन ये डिउल यूज होते हैं दिखने में सिविलियन इस्तमाल में मिलिटरी यानी रोड से कनेक्टेड होते हैं हेलीप तीसरा मेथरड इन्फरस्ट्रक्चर 37 एरपोर्ट्स और हेलिपोर्ट्स टिबेट और शिंजियंग में 2017 से अपग्रेड होने शुरू हो गई इंडिया के बॉर्डर के आसपास इसे किया जा रहा है पी एले का एफ बने चाइनीज एरफोर्स के लिए ये नए नोडल पॉइं�इसके तहथ चाइनीज आर्मी हमारी जमीन थोड़ी थोड़ी करकर कैप्चर करता रहता है एक बार नहीं लिटल बाई लिटल ताकि जादा बवाल ना मचे और अपना काम भी धीरे धीरे होता रहे चाइना के बास बहुत पेशन्स है वो कोई जल्दबाजी में नहीं है तो एक रोड बनाना शुरू कर दो और इससे पहले कि कोई सवाल उठाए अगर उठा भी दिया तो बोलो आपको और हमारा जो डिफरिंग पर्सेप्शन है हमें तो लगा कि यह हमारा जमीन है इसलिए हम इसपर काम कर रहे हैं तो दूसरी तरफ बोलने से पहले या कोई काम उठाए य तो क्या हम यहाँ एलार्मिस्ट हो रहे हैं?ऐसा कुछ है नहीं चाइना का स्कीम हम जादा ही चाइना को ओवर एस्टिमेट कर रहे हैं?अरे चलिए अरुनाचल प्रदेश की बात हम साइड़ में रखते हैं दूसरी जगे का एक्साम्पल दे लेते हैं क्योंकि ये एक पैट जून 2020 में गालवान में गहमसान हो जाती हैं बीस इंडियन सोलजर्स शहीद हो जाते हैं आज तक चाइना ने बताया नहीं है कि हमने उसके कितने लोग मारे लेकिन फैक्ट तो यही है कि 1962 के बाद इंडिया चाइना रिलेशन्स में ये एक नू लोपॉइंट बन गिया लेकिन नहीं कोई गुसा हुआ है।
फिर सालों तक बाचीत होती रही कि कैसे डिस इंगेज किया जाएं. फाइनली उक्टोबर 2024 में पेट्रोलिंग अरेंज्मेंट होता है गालवान के पास और इंडिया ने इसे डिपलोमेटिक साथडिकलेयर करने की कोशिश की।लेकिन क्या चाइना सची में वापस गया?नहीं।दरसल बॉफर जोन्स बनाए गए।लेकिन मिलिटरी एक्सपर्ट्स का कहना है कि जदातर ये जो बॉफर जोन्स हैं ये इंडिया की क्लेम्ड टेरिटरी के उपर आते हैं यानी शांती भाली तो हो गए कुछ हद तक लेकिन हम उन इलाकों में अप पेट्रोलिंग नहीं कर सकते हैं जहां दशोकों तक पहले कर प्रदान मंत्री मोदी चाइना गए ट्रम्प से बार बार धंकी खाने के बाद हमने चाइना के तरफ फिर से रुख किया साथ साल में पहली बार प्रदान मंत्री मोदी चाइना जाते हैं शी से मिलते हैं चैनजिंग में कहा जाता है कि भारत और चाइना अब पार्टनर्स बने लगडाक को कहीं न कहीं भुला कर आगे बढ़ने की कोशिश होती है इस आशा में कि चाइना अब और बत्तमीजी नहीं करेगा पीट पर खंजर नहीं भोकेगा. चाइना हमारे पीट में 70 सालों से खंजर ही भोकते आया है और अब तो और confidence से भोकेगा. इसकी बज़ा है Economics. इंडिया -चाइना Bilateral Trade 2024 -2025 में 127 बिलियन डॉलर खता. लेकिन इंडिया का Trade Deficit जो चाइना के साथ था वो 99 बिलियन से जादा थ इंडिया चाइना से एक सो तेरा एक सो चोदा बिलियंड डौलर का माल खरीदता और चाइना इंडिया से सिर्फ चोदा बिलियंड डौलर का साबान लेता तो डिफरेंस हुआ करीबं सो बिलियंड डौलर का इतना पैसा हमारे देश से बाहर जाता है चाइना को मिलता है और ये
और हम उस चाइना से एक सो तेरा बिलियन डॉलर का सामान करीते हैं हर साल Chinese Apps, TikTok, Investment Rules को टिटन कर दिया इस सब को मास्टर स्ट्रोक के तरह पेश करने की कोशिश की गए कि देखा हमने चाइना को कैसे सबक सिखा दिया हरगो का अब हम लुक्सान कर देंगे चाइना के लिए लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं।जो core imports हैं, वो रुके नहीं।Actually, Galwan के बाद चाइना से जो हमारी imports हैं, वो धडडडड बड़े हैं।Record level पर बड़े हैं।तो सवाल ये है कि आखिर क्यों हम एक ऐसे देश के साथ ट्रेड बढ़ाय जा रहे हैं जो हमें नीचा दिखाने का एक मौका एक अफसर नहीं छोड़ता है कल फिर से गलती से पीट दिखा दी तो खंजर फिर से भोग देगा और अर्राचल के लोगों के साथ चाइना क्या करता हम वीजा कैसे दे सकते हैं एक इंडियन सिटिजन अपने ही देश के एक राज से इंडियन पासपोर्ट लेकर चाइडा नहीं जा सकता है अभी पिछले साल ही एक अर्राचली महिला जो चाइना से बस ट्रांजिट कर रही थी जा भी नहीं रही थी उसे शैंगाई एर्पोर्टहमें जलील करता आया है।
भारत और चीन के बीच में जब भी कोई conflict होता है तो एक बात सामने जरूर आती है और वो है Differing perception of LAAC उसको लेकर दोनों देशों के बीच में जो समझ है वो अलग है।इंडिया और चाइना के बीच में बनी इस line of actual control दोनों देशों के लिए de facto border तो है।लेकिन actuality में ये line कहा पड़ती है इस पर कोई consensus नहीं है।1962 के war के बाद जब चाइना ने unilaterally cease fire announced किया तो LAC more or less उस समय जो troops जहां स्थित थे उसी position को LAC मान लिया गया।अब इंडिया के according � आप मान सकते हैं कुछ बिंदूएं हैं जिन्ने जोडने के कई तरीके हो सकते हैं यही नहीं दोनों देशों की LAC की लंबाई में भी एक दो नहीं बलकि 1300 -1400 किलोमेटर से जादा का फर्क है यह perception में फर्क है भाई इतना गलत कैसे कोई हो सकता है कि एक मैप में 1300 -1400 किलोमेटर इंडिया चाइना के boundary disputes आज से नहीं है, बहुत पहले से है, 1962 से भी नहीं है, independence से पहले है, British राज के समय से है, अगर उसको समझना है तो पूरा एक episode बना कर रखा है, History of the Boundary, उसको जा कर देख लीजेगा की इतने पुराने issues कहां से आते हैं. मान लीजी 150 -200 साल पुराना ये मामला है. इस border की कहाणी में वैसे बहुत कुछ आता है. Johnson line आता है, Treaty of Titalia आता है, Shimla Agreement आता है, Treaty of Punakha, McMahon line आता है, और पता नहीं ही और भी बहुत कुछ आता है. एपिसोड आराम से देख लेना. लेकिन कहा जाता है कि गलती नेहरू की है. देशफाक्ट तो यही है कि चाइना शायद चाहती नहीं है कि लकीर बन जाए चीजे लॉक हो जाए क्योंकि अगर अग्रीमेंट हो जाएगा लकीर खिज जाएगी चीजे डिसाइड हो जाएगी तो फिर वो धीरे धी ये बात भी सच है कि चाहे नरेंदर मूदी होते या कोई और प्रधान मंतरी होते चीन वाली प्रॉबलम का सामना किसी भी प्रधान मंतरी को करना होता सबाल डिफरेंट ये है कि क्या कोई और प्रधान मंतरी सच्चाई को दबाने की चुपाने की कोशिश करते या जनता के सा� और उधर अगर आप लेजर आईज को देखो, लेजर आईज ने भी तो आत्मसमर्पन कर दिया है, on record जाकर बोल रहे हैं कि अरे भारत अपने से बड़े economy के साथ जगडा कैसे मोल सकता है?
चाइना हमें लम्मे समय तक कैसे घेरने की, अर्राचल को छीनने की तयारी कैसे कर रहा है, आप इस बात से अंदाजा लगा सकते हों कि चाइना दुनिया का सबसे बड़ा हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट, साथ हजार मेगावाट का मेडॉंग हाइड्रो पावर स्टेशन, चा तीन गुना जादा बड़ा होगा एस्टिमेटिट कोस्ट एक त्रिलियन यौन मने आप सभज लिजे करीबन एक सो तीस चालीस बिलियन डौलर का डिसेंबर 2024 में इसे अप्रूफ किये गा था जुलाई 2025 में कंस्ट्रक्शन शुरू और 2030 -33 के आजपास इसका कमर्शल इस डैम का दूसरा लक्ष भारत पर दबाव बनाना ब्रह्मपुत्र नदी का जो फ्लो है उसे चाइना से कंट्रोल करना कितना खतरनाक यहाँ चाइना का मंसूबा है हमने आपको इस एपिसोड में बना कर बताया था कि क्या -क्या प्लैनिंग है और कितनी लंभी औरदूर तक की प्लैनिंग चाइना कर रहा है।और इसी हफते चाइनीज रिसेर्चर्ज दे भी इस बात को माना जिसका हमने जिकर किया था कि ये डैम एक एक्टिव फॉल्ट लाइन पर है।और अगर यहाँ अर्थकोईक आता है फिर से इस एरिया में तो � और चाइना की हुकूमत को मालूम है उनको यकीन है कि भारत कोई भी एग्रेसिव स्टांस नहीं लेगा चाइना के खिलाफ इंडिया की बॉर्डर चाइना के साथ 3500 किलमेटर लंबी है जोकी मोस्टली पूर्ली डिमार्केटिड है रगड मांटिन्स है इन हॉस्पिटबल ट तो क्या कर सकते हैं हम इस सब के बारे में?सबसे पहले तो ड्रेगन के इस खतरे को समझना होगा, मानना होगा और काम पर लग जाना होगा. विदेश में फरजी अवार्ड्स बतोरने बंद करने होंगे. पिछले दो महीनों में 20 दिन तो विदेश यातरा कर रहे थे हमा यहाँ हम अस वरसिस देम ऊच नीच की राजनीती में पिस रहे हैं वहाँ चाइना एमेरिका को मात देने की तयारी कर रहा है।Reusable Rockets ले लो, Semiconductor Technology ले लो, Chips ले लो, ML AI ले लो हर जगे वो एमेरिका को मात देने की कोशिश कर रहा है इंडिया तो कहीं है भी नहीं उस रेस मे चेतावनी बहुत है दिखने वाले को दिख रहा है सवाल यह है कि हम अपना अंधापन कप खतम करेंगे और चाइना के खत्रे को समझेंगे
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