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Coffee Par Kurukshetra | Saurav Sharma : जंतर-मंतर की पिक्चर अब खत्म ? | Jantar Mantar | CJP Protest

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कॉफी पर कॉरुक्षितर शोमे मेहमानों द्वारा व्यक्त की गई राय और कमेंट्स उनके नेजी विचार हैं. मेहमानों की राय को इंडिया टीवी या शोके होस्ट की राय ना मानी जाएं. इंडिया टीवी का मकसद किसी भी व्यक्ती या वर्ग की भावना को ठेस पहुच नमस्कार बहुत बहुत स्वागत आप से भी का आपके प्रोग्राम कोफी पर कुरुख शेत रहे हैं मैं हूँ सर और शर्वा आपके साथ बातें खुलकर करते हैं और वो बताते हैं जो कोई और आपको नहीं बताता है प्रदीप सिंग जी प्रोग्राम में आ चुके हैं सर बह का प्रयास किया गया है उन तमाम प्रदर्शन कार्गियों की तरफ से जो की धर्मेन प्रदान का इस्तिफा और बहुत सारी मांगी उनकी थी उसको ले करके जंतर मंतर बर कई दिनों से प्रदर्शन कर रहे थे कौकरोच जंता पार्टी द्वारा लेड बताया जाता है या सोनम और अभी तक उस प्रदशन स्थल पर कभी इतने लोग देखे ही नहीं गए इतने क्या मतलब इसका कोई फ्राक्शन भी नहीं देखा गया जंतर मंतर पर लेकिन अच्छानक आज इतने सारे लोग आ गए कैसे आ गए क्या इसके पीछे कुछ संगठन जो थे वो एक्टिव होए ना पुलिस ने बहुत जादा बल प्रयूक किया जितना करना पड़ा भी पारलेमन्ट तो उनको नहीं आने दिया जा सकता था नहीं पारलेमन्ट के गेट तक तो नहीं पहुँचने दिया जा सकता था तो जितना ज़रूरी था उतना तो किया हलका फुलका कही लाठी चली टटकराब हो गया ऐसी भी कोई तस्वीर एक ख़बर सांदे नहीं आये कुछ पूरे दिन में क्योंकी चलता रहा तो कहीं ऐसा आया एक एक के ये प्रदर्शन कार्गियों के कुछ इन से जोड़े दो इनके प्रतिनिधी वो हेल्थ विनिस्टर जेपी नडा जी से जा करके मिले और वहाँ उन्होंने तीन अपनी मांगे रखी हैं तीन मांगों में यह है कि सोनो मांग्चू जी को पहले हॉस्पिटल से जंतर मंतर उनको लाया जाये हमारे सामने वो अपना अंचन तोड़े धर्मेन प्रदान जी का इस्तीफा वो मांग रहे हैं शिक्षा मंत्री का की नीट ये बहुत important है नडडा जी से, इसका मतलब सरकार की तरफ से कुछ एक व्यापता किया गया है, तो पहले ये जानलें कि ये कैसे किया गया, सरकार की intention क्या है, कोई dialogue शुरू करना था, या आज थोड़ा सा जैसे होता न, प्रेशन रूकर की थोड़ा सा steam निकल जाए भाई, या स सबसे पहले चीज़ तो सबके पॉब्लिक पर्सेप्शन मतलब ये ना जाये कि सरकार इतनी जदा रिजेट है कि चात्र प्रदशन कर रहे हैं और सरकार सुन नहीं रहे है क्योंकि पिछले दो तीन दीनों में अब आप कहेंगे कि अंधुलन्त इतने दीनों से चल ला था वो च तो जो लोग बीच में बात कर रहे थे उन्होंने कहा कि आपने सरकार से समय माँगा सरकार साफ समय माँगेंगे तो आपको मिलेगा अच्छा तो आज सुबा जो सरकार के सुरसे से हमें बताया गया कि पहली बार ही उन लोगों ने टाइम माँगा और जैसे टाइम माँगा 11 व

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मिनट के आसपास उनको टाइम मिल गया था वो जेपी नडडा जी के घर पे पहुंचे और 40 के आसपास वहाँ से निकले दिन भर वहाँ पे वो लोग बैठा हुआ है।और जो पता चला उसके इसाफसे बहुत अच्छे मूड में बाचीत हुई है।इन्हों के बात को समझा गया, सुना गया।चाय नासता भी हुआ, खाना भी हुआ।चाय नासता भी हुआ, खाना भी हुआ।चाय नासता भी हुआ, खाना भी हुआ हाँ. एक तो हेल्थ मिनिस्टर हैं. हेल्थ मिनिस्टर हैं. हेल्थ मिनिस्टर. हाँ, हेल्थ मिनिस्टर. डॉक्टर नहीं, हाँ, डॉक्टर. अच्छा विद्यारती पर्शल से निकल के आए हुए हैं, तो उनको स्टुरेंट्स का एक मैंचेटो पता भी रहता है. एक चीज़ दूसरा एक ओफिसर आज पार्लेमेट में बता रहे थे कि उनकी बेटी है स्पेन में और उनसे भी ये पूछा जा रहा है।

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तो एक नेरेटीब तो हो जाता है नहीं कि पेपर लिख हो गया, चात्रों ने सोसाइट कर लिया, एशगोसलमिश्र को हटाय नहीं जा रहा है।उसक अंदोरन के पीछे कहानी तो ज़्यादा लोग जानते नहीं है इसलिए कि ज़्यादा लोगों ने परवा नहीं की कि उसको पढ़ लें या देख लें हर आदमी track of events भी नहीं रख पाता है

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कि वो शिक्षा के नाम पर तो कभी था ही नहीं ये तो जो supreme court में comment हो गया था उसके बारे में phenomena बन गया और उसके बारे में अभीजीत दीपके जी को लगा कि आप नौका है वो बतलब कि उनको लगा कि एक movement खड़ा हो गया ये तो विदे ये एदुकेशन, रिफॉर्म ये नहीं थी।

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ये तो तभी थी नहीं।ये एदुकेशन, रिफॉर्म ये नहीं थी।ये तो तभी थी नहीं।ये एदुकेशन, रिफॉर्म ये नहीं थी।ये तो तभी थी नहीं।ये एदुकेशन, रिफॉर्म ये नहीं थी।

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ये तो त� इसलिए फालोवर हो गए, कॉंग्रेस वो बीजेपी से भी आगे जादा फालोवर निकल गए, तो उनको लगा कि एक बहुका है, सोचल मीडिया में, सोचल मीडिया में, सोचल मीडिया में, सोचल मीडिया फालोवर में. अब उनको एक थीक है, उनको उसमें वो नीट वाली उस हमादी पार्टीज पहले जुड़े रहे हैं।तो इसलिए भी उनको लगा कि एक आंधुलन का मौका भी है।और फिर उनका संपर्ख भी हो गई आर्विंद केजरी वाल।देली वाल भी खुलके आ गए।खुलके आ गए।तो जब वो हिंदुस्तान आये तो देखे आये भ उसके बाद सोनम मांख्चुक जी उसके साथ जोड़ जाते हैं, सोनम मांख्चुक जी का भी अपना एक बैकराउंड है, वो भी थोड़े अजितेश्कल के संभीदे है।

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रिस्पॉंस तबी ज़्याता मिला है सोनम मांख्चुक जी जोड़े।और फिर तुमका अंशन शुर�

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गया उसके बाद से ये थोड़ी सी कहानी जो ये गंभीर होती गई जब अन्शन को कई दिन हो गए फिर हाई कोड़ पर प्रेटीशन जाती है वो कहने वाले कहते हैं प्रेटीशन भी करवाई गई कि अभी सरकार को अदालत का कबर मिल जाये सोरो मांक्चु नहीं देखिए, नीट का जो मुद्दा है बहुत गंभीर और बहुत महतपूर्ण मुद्दा था ये एक तरह से एक नेशनल इशु था और खासतोर से क्योंकि यंग जेनरेशन से जुड़ा था चात्रों से जुड़ा था इसलिए और ज़्यादा था क्योंकि उनमें कोई भी आंधोलन हुआ है तो चात्रों के असंतोष से सुन हुआ है तो इसलिए कोई भी सरकार हो ये सरकार या इससे पहले या इसके बाद जो आ इनको उस मुद्धे से मतलब नहीं था।आपको याद होगा, मतलब सभी को याद होगा कि इस मुद्धे पर हर पार्टी के नेता ने बैयान दिया और इस मुद्धे को बहुत बड़ा मुद्धा बताया आप बताईए 20 -22 दिन चलाए ये अंचन कितने नेता गए?अगर आज स सर पारलेमेंट में राहुल गांधी से 10 माइक लगे हैं उनसे कॉमेंट माँगा गया उनको बोलना होता तो उनको माइक ढूंढना नहीं बढ़ता भी माइक तो अपने आप बहुंचता है उनके पार उन्हें कहा हम कॉमेंट नहीं करेंगे आज आज हम कॉमेंट नहीं करेंगेअलग बात में आ गया है कमन्डू का फिर इन लोगों को इस मुद्धे की त्वीट आ गया है न त्वीट तो त्वीट इसलिए आता है क्योंकि त्वीट तो उनके नाम पर ही दर्ज होगा न प्रॉबलम वही है जो आप कह रहे हैं इसकी ओनरशिप किसकी है और दूसर मतलब कोई focus तो था ही नहीं क्योंकि आपके समझ के बाहर था हम तो मांते हैं कि इन्हें लोगों की समझ के बाहर था केवल एक हंगामा, एक तमाशा खड़ा करना था और उसके लिए लोग चाहिए थे तो ये ऐसा मुद्दा था जिसपर लोग जुड सकते थे तो इस इसलिए � चात्र जो जिन चात्रों ने आंदोलन किया इसके लिए पाटियों के जो चात्र नेता हो उनकी बात नहीं है वैसे जो पाटी नूटरल चात्र नेता हैं या चात्रों का उस तरह से पार्टी पार्टिसिपेशन था आप पार्टी के जो चात्र नेता हैं उनको निकाल दीजिए सर ओन रेगिलर डेज जितने दिन भी यह अंशन चला क्योंकि वहाँ मीडिया हमनों कभी रहता था हमारी भी सबसाती तादात जो थी सम नहीं सोनम वांगचुक को जिस दिन ले जाये गया उस दिन अगर 10 ,000 लोगी कठा हो गये होते तो भी इसकी दिशा बदल गयी होती कोई reaction नहीं हुआ वयान देने के अलाबा और क्या reaction हुआ आप देखें जिस तरह से स्वामी राम देव को उठाये गया थाआधी रात के बाद पुलिस ने एक्शन किया, लाटी चार्ज किया, 71 लोग अस्पताल गए।उस घटना को याद कीजिए और इस समय की घटना को याद कीजिए।

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दूसरी बात यह है कि इन लोगों को असल में मुद्दा जो है कई सारे एंजियो का ब्रेस्टेड इंट्रेस्� और खासतों से NGO की funding का ही मामला नहीं है धर्म परिवर्तन का वो जो पैसा इस्तेमाल होता था उस पर जो रोक लगी है आप देखें यहां से लेके अमरिका तक चाहे डेमोकरेट हो चाहे जो है republican हो सब परिशान हैं इनके मंच से सुना तो नहीं सर मतलब इनकी बातों में तो नह कश्मीर पर भारत की सेना ने कबजा कर रखा है।वो इस आंधोलन्त से क्यों जूड़ने दिया गया?

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वो तो यह है कि मोधी के ख़िलाफ प्रदर्शन है, तो भोगी मोधी मिरोधी में हुआएगा।

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यह ठीक बात कही आपने, कि यह मोधी के विरोध में प्रदर्शन था, इस पटाक शेप या क्लाइमेक्स बचा है भी?नहीं नहीं मुझे लगता पूरी तरह से खतम हो गया वो जो कौकरोच हैं वो भी खतम हो गया उनमें कोई दम था नहीं वो जो फॉल्लोर्स मिले भी थे उनको सोशल मीडिया पर वो भी भारत के बाहर के 90 % थे जारात

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हमें जो बताया है कि इसके पीछे एक तो सोशल मीडिया पर बहुत ज़ादा मेसेजिंग हुई मतलब मेसेजिंग के जरीए कॉल गया है कि आज जुटना है आज जुटना है इस पे जो खास तौर पर लेफ्ट से जोड़ेवे चात्र संगटन वो अंचन भी कर रहे थे वो अइशा के लोग जो वो उन्होंने अपनी ताकत लगाई और फिर कुछ एक पार्टियों के ल बयानों के लाबा कुछ नहीं आया और वो भी राहुल गांधी का बयान नहीं।

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मुखरूप से इसमें मैं तो गया था एक दिन वहाँ पर देखने से कि बहुत क्या है तो जिस दिन मैं गया था उस दिन बहुत अथा लोग नहीं थे मुश्किल से साथ आठ सो अजार लोग रहे सो डेड़ो सो लोग तो वैसे ही आसपास के आगे हैं।अन्छन स्थाल पर।हाँ वो नहीं है, वो बड़े बुराईं दुकान हैं, प्रदिभी जानते हैं, हम सब लोगों के बड़े प्रदिभी दुकान हैं।बहुत मशूर हैं।मशूर हैं।बताब मुझे रखता है।

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ग सोनो मांक्चूक बैठे हुए थे, लेटे हुए थे सो रहे थे तो उस दिन कोई बहुत भाषा कानुशान हो रहा था क्योंकि मैंने हम जंतर मंतर पर हमने बहुत सारे अंधुलन देखे हैं एक पत्रका के रूप में भी और ऐसे भी जब हम जेनियों पढ़ते थे तब भी अक् मैं नामी की रामी चेरे को बात नहीं कर रहा हूँ, कई ऐसे चेरे हैं जिन्गों हम जानते हैं पिछे 40 -50 साल से, वो हरा अंधोलन में भी मन्मोन सिंग सरकार के लिए हैं।ये अन्धुनन्ड जोर पकड़ा है, एक तो सोनम वांगचुक के आने से इसको एक क्रेडिबिल्टी मिली उनके काम की वएसे और बाद में जो लडडाग में घटना हुई और एनसे लगा उसकी वएसे उनका एक नाम तो हुई गया था।उनके आने से क्रेडिबिल्टी मिले उनके अंचन जिस तरह चल रहा था और 18 देन जब हो गए तब उसे जूर पकड़ा।और फिर उठाया गया उनको तो साहनबुती सोनम वांगचुक प्लस नीट प्लस सब जुल गया और पुलिस दे इसको आज जो घटना हुई है पुलिस दे अंडरस्टिमेट किया इसलिए पुलिस दे उतनी तयारी की दी कि साब वो जंतर मंतरम गिर लेंगे ये लोग जा नह तो वहीं उधरी से आ गए थे वो उसके तो सामने बस क्या तो इसलिए फिर अफ़डा दफरी बची और उसी चक्कर में फिर लाथ शार्ज भी हुआ और वो सारा जो हुआ।तब तब तो बिल्कुल सरपे आ जाते हैं।बिल्कुल सरपे आ गया था।

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सरपे आ गया था।

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कोई भी हो इसको आप संसद के गीट तक खुळ पास देते हैं।अगर 15 -16 लड� वहाँ जाके खाली जैसे डिम्पल यादो उस दिन में गई थी अभी भी गई, अगर जैसा प्रदीप जी कह रहे हैं, सही कह रहे हैं, जिस दिन सोनो मंगान बांगचूक उठाय गया था, 10 ,000 -15 ,000 आदमी पॉलिटिकल पार्टीज के वर्करे कर आ जाते हैं वहाँ, तो सीन �

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आप दोनों ने एक बात कही कि इस आंधूलन एक तो इस अंधुलन का शिक्षा से या नीट से कोई शुरुवात से इसका कोई लिना दिखा नहीं का।किसी इशु पर फोकस ही नहीं।वो इशु मिल गया बात में।

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यहीं कहें कि उन्होंने अपने आपको उससे जोड़ गया।इशु मिल गया और उन्होंने उस इशु को लीक हुआ परचा लीक हुआ उसके बाद दूसरा एकजाम काम्याब हो गया अब आप इस्तिफे परियट कर रहे हैं।

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Ruben, Netherlands

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नहीं आप जो कह रहे हैं वो मुद्धा बनाते हैं तो और कुछ नहीं होता।देखिए वो निर्गुण बात हो गई उसके लिए आपको लंभी तयारी करन तो कितनी बड़ी जीत होती है।लेकिन इस्तिफा तो होना नहीं था।नहीं था, होना था, लेकिन ये आपके दबाव पर निर्बाद है।

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मैं आपको एक उधारण, जैसे अभी आप कह रहे थे, हम लोग कह रहे थे, भी लोगों को जादा नहीं मालूं, ये उधारण दे रह आज पचास लोग कहीं बेट जाएंगे और किसी का इस्तिफा मांग लेंगे ये तो ब्लैक मेल है ऐसे थोड़ी होता है अच्छा आत्मात्या की धंकी देना है कि आप यान्शन कर रहे हो ऐसे थोड़ी आप किसी सरकार को मजबूर कर सकते हो एसी ये भावना रखने वाले भी �

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पहली बात तो ये की पेपर लीक हुआ कुछ चात्रों ने सुसाइड किया चात्रों के साथ ये नहीं होना चाहिए तो ये sentiment तो across कहीं भी जाये तो इसके साथ कोई ego करेगा दूसरी चीज की ये लोग जो कर रहे थे प्रोटेस्ट में वो आपने जो बात कही न, वो वाकई वही है कि ये blackmail चलेगा क्या?कि 200, 400, 500 आदमी जाके वहाँ पे खड़े की इस मंदरी का इस्तित्व होजा. अच्छा वहाँ पे से क्या हो रहा है?कि भारत माता हैं तो भारत का पीता कौन है?वो मंच थी ये सवाल पुछने के लिए. कि इस्तिफा हो नहीं होगा तो हम हैंशन रहेंगे।एक बात जो उस सर ने कही कि ये क्या पुलिस ने और सरकार ने अंडर इस्टिमेट किया कि ये जो कॉल है आज का कि लोग जादा नहीं आएंगे मैनेज हो जाएगा और वो लगबाग गेट तक पहुंच गए परलिमन्ट क परल्डे का था उससे ज़्यादा था अधर्बाईज अगर डेली का भी ये सेंटिमेंट होता सौरब तो वही क्यों पूरा दिल्ली आजाम में होता स्टुडेंट कितने हैं दिल्ली में निकल कर प्रोटेक्ट करते हैं न हम तो आप हम ये मांके चाहते हैं कि पुलीस का क्या थ पुलिस को ये था कि आपको स्टुवेंड्स के साथ थोड़ा ठीक से हेंडिल होना है ये नहीं करना है कि शुरु में ही आप उनके साथ बलप्रयोग करना शुरु कर दें तो बेरिकेटिंग वगर ये साही चीज़े जगा जगा पर की गई थीलेकिन क्योंकि स्टुडेंट्स आगे बढ़ना शुरू किया और अलग अलग तरीकों से तो इसमें उनको फोर्स नहीं किया जा सका दूसरा पूरे लुटियोंस को आप ए समस्य वो भी थी तो जैसे एक हिस्सा अगर आया रेल्बोर्ण के तरप से तो दूसरा आया था उद्योग मंतराल है जैसे मैट्रो था अगर पहले से थोड़ा कई बाद मैट्रो बंद कर दिया थी आज क्या हुआ आज में बता रहा हूँ मैं बाद सुबह बंद किया हूँ नह परलिमेंट में जिनको काम करने जाना है वो क्या करेंगे फिर उसका बार एक विंडो खोला गया तब किसी के इसमें तो लिखा नहीं है कि हाँ ये काम करने वाला है कौन है या फिर प्रोटेस्ट करने वाला है तो ये सारी समस्याने थे कि आपको समाने चीजे भी वैसे हैं जै संतुष्ट होंगे काम से है नराज होंगे?

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नहीं मुझे नहीं लगता कि जिस तरीके से वो काम करते हैं बहुत संतुष्ट हैंगे वो जरूर एक फटकार तो लगी होगी है कि बही ये ऐसा कैसे हो गया कि इतनी दोर तक पहुंच गया है ठीक है कि आपको बल प्रयोग नहीं कर पोजिशन अपनी ले लें, तो माले जिए वो कर देती।

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तो फिर इस स्थिति बहुत भायानक हो सकती थी।ग्रीबंट्री भी आज लातार परलेमेंट में बैठा की कर रहे थे।

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इन्हीं सारी चीज़ों को लेकर।तो मामले पर नजर थी, लेकिन वो पेंट करने में वो सफल

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उसको लोग इससे जोड़ कर देखे लेंगे में कोई बात थो नहीं है कहीं उसती से उसती से लेंगे।अब जो ये तीन मांगे जो की हैं हैं इन्होंने बिलकर के नड़ा जी से, उन मांगों का क्या होने लागा है?

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हाँ, इसमें दोनों चीज़ पहले आपको बता दूँ कि ज ठिक उसी रूटीन में आज भी उनका जाना शुरू है लेकिन स्वाइक तोर पर क्योंकि ऐसे मामलें भो हो रहा है तो इस रूप में चल रहा है कि यहां कोई बैठक चल रही है आम तोर पर यह लोग लंच भी साथ ही करते हैं दोपर में एक साथ बैठकर अब बात हो गई कि ह� हमें यह बताय गया है कि हमें जो करना था वो तो हमने किया हमने उनसे बाचित की उनका ग्यापन लिया उनसे अपील की कि आप अपना धर्ना प्रदशन कर रहे हैं तो यह हमारा काम था जो हमने कर दिया अब उनको कॉल लेना है तो अब इस लाइन से आप समझ सकते हैं।हमने तो केवल सुना है, लेकिन हमने क्या काम किया?हमने काम किया कि हमने उनको बुलाया, हमने उनकी बाच्चित सुनी, और हमने उनसे अपील करें।

24:18

मांका क्या करना है?हमको सिस्टम में जो सुधार करना था कर रहे हैं।

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कर रहे हैं और तीसरा मुहाफ़जा मिले उन परिवारों को आपकी पॉइंटेट मांग हमने सुनी उसके बाद हमने आपसे अपील की अपील क्या की यह आप खतम कर दीजा है अब आपको रिस्पॉन्ड करना है अब आप रिस्पॉन्ड कीजी है तो हंदोलन तो आप ही ने खतम करा दिहै, दीपके जी का पता नहीं है।

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और भी अन्शन तोड़ दिया हूँ।

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दीपकी जी का भी अन्शन तोड़ गया है।मैं तो पूछ रहा था कल कौन आएगा माँपे।

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कल कोई आएगा मांपे।उनकी कोई ख़बर नहीं ले रहा जो बच्च शात्र वाकई आईशा वाले अन्शन कर रहे थे।

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किसी के लिए भ अच्छा कोई भी धंरासी उस छती की पूर्ती नहीं कर सकती फिर भी अगर एक करोड की अगर बात है लेकिन सरकार के सामने देखें मुसिवत का रहती है किसको दे किसको नहीं दे जितनों को दे फिर बाकी दूसरे कारण से जो जा रहे हैं मतलब वो एक अंतहीन सिस्तिला शु अब कल को मान लिए कि रेल्लेवे में कोई चूक हो रहा है कि रेल मंतरी इस्तिफा दो परसों किसानों के साथ कोई चीज हो रही है किसी मंतरी इस्तिफा दो सडक पे गढ़ा दिखा सडक पे जौन मंतरी इस्तिफा दें तो ऐसे ही चलते रहेगा आपको भी लगता है कोई इ तो पक्का हो गया. मतलब एक तरह से मदद चीज लोगों ने दरविश्ट।

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मैं तो यह कहा रहा हूँ सर्व माल लीजे मंतरी मंदल विस्तार में यह भी हो रहा होता कि बही चलो आब आप पार्टी में काम करो दर्विश्ट परदान जी को. वो भी नहीं होने वाला. अब तो �पुलिक सेंटिमेंट देखे दो मुद्धों पर सरकार्ट मीचे आटी है एक जो है जो भूमी अधिकराण पहले दो बार तीन बार ओर्डिनस लाये तेर उसको वापस ले लिया और दूसरा दो तीन किर्षी कानून जो थे उनको वापस ले लिया उसके अलावा पुलिटिकल प मतलब ये सरकार ने सेंस किया कि ये जनरल लोगों का सेंटिमेंट है इसलिए वापस ले लिया कि इससे पुलिटिकल नुक्सान भी होगा वैसे भी कोई फायदा नहीं होगा मतलब उसको पास कराना ही मुश्किल था उस समय तो मेजौरिटी भी नहीं थी मतलब राजसवा में � लेकिन blackmail में आके अगर आप कोई काम करते हैं तो सरकार अपनी कमजोरी नहीं दिखाना चाहती है।यह नहीं साबिद करना चाहती है कि हमारे उपर कोई दबाव डालेगा blackmail करेगा और हम blackmail में आ जाएंगे।तो इसलिए ये स्तिफा तो नहीं होने वाला।

27:59

एक चीज़ पर जरूर नज़ार रखनी चाहिए कि जागे जब भी expansion होगा हरी सफल होगा जब तो उसमें इनके portfolio को लेकर जरूर देखने वाली बात सौरब इस लिहाँ से होगी कि न सिर्फ विरोधी बलकि इसमें कोई दो राय � वो शिक्षा मंतरी से नाराज हैं और ये UGC से चला आ रहा है।उनसे अगर बाचित किये तो वो नाराज कि वो लोग ये दिखाते हैं।

28:22

UGC ने बहुत जादा किया है।

28:25

खास्तर पर UP, राजस्थान इस तरह के स्टेट्स में तो बहुत ही जादा।तो वहां पर एक दे� जब सफल होता है तो भी मुल्का लेये जाता है।

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28:33

उसमें स्थिफा नहीं मागा गया।उसमें समहोना जादा थी स्थिफे की।क्योंकि वो पब्लिक पर्सेप्शन के बाद जो कर रहे हैं।उससे सीधे सीधे जो भाजपा का कोर वोट है वो प्रभावी थी।

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तो तो घर की रआप सर कल क्या होगा मतलब यह हो गया मैं तो बार -बार यही चानना चाह रहा हूँ कि इसका एंड हो गया है हम लोग चले कल आप कह रहा है क्योंकि आप वहाँ गए भी तो किस इंटेंशन से लोग बैठे थे जो लोग बैठे थे वो इस इंटेंशन से बैठे थे कि हम शिक्� अभी जीद दीपकी और उनकी टीम में तो भी है।एक खाबर मुझे बताई जा रही है कि सोनम माकचुक का भी स्टेट्मेंट आया है कि वो मेरा अंशन जारी है।

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आज दिन में उन्होंने ये भी कहा था कि मैं थोड़ा बेथर फिल कर रहा हूँ तो मुझे जानी दी थोड़ा बात तो डॉक्टर -डॉक्टर करते हैं इंगे ना फोर्स -फीड तो नहीं कर सकते किसी को फोर्स -फीड तो नहीं हो रही है नहीं वो नली -नली डाल के करते हैं जान देने की इजाज़त नहीं दे सकते हैं वो नहीं हो रहा है लेकिन उनको कहते हैं जो पानी पी रहे कि आज छितने लोगो बुला लिया, कॉल दे दी, लेट चार्ज भी हो गया, जैसा भी हुआ।अब ऐसे में एकदम से... अन्धरन को वापस लेना कैसे विड्राओ करें कोई फेस्ट सेविंग को चाहिए अब जैसे आज नटा जी से वो मिले तीन मांग मांगे रखी अब जैसे सरकार उसी में कोई आसवसन दे दे कही नहीं कोई बीच का रास्ता को कोई चाहिए फेस्ट सेविंग के लि� लेकिन इसमें ऐसी स्थिति होने कोई मिदम नहीं है।मंच तो अब नहीं निकाने देखी पूलिस वहाँ पर।

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येस तो अब मंच ज़गे भी थो चाहिए।

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क्योंकि नुक्लेस अभी तक तो बैठे हुए थ तो वो तो जगए ऐसी है कि हर दो ढाई सहर लोग तो वैसे बिना के लिए आन्दोर्यप पी आ रहते हैं।

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अब उनके पास मंच भी नहीं है, चेहरा भी नहीं है, चेहरा अस्पताल में।दीर्के जी चेहरा नहीं है।

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और चेहरा वैसे बताओं सोनम वांचुक जी के बारे मे अगर कोई बीच का रास्ता मिल गया जैसे कोई बीच का रास्ता मिल गया जैसे कोई बीच का रास्ता मिल गया जैसे कोई बीच का रास्ता मिल गया जैसे कोई बीच का रास्ता मिल गया जैसे कोई बीच का रास्ता मिल गया जैसे कोई बीच का रास्ता मिल गया जैसे कोई बीच क्या सरकार उनको ले जाएगी क्या मान कि आप चलो आप यहाँ पानी पीलो आकर के?

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नहीं, उनको hero बनाने के गलती तो बिल्कुल कोई नहीं करेगी और खास तो पे तब, जैसे 2011 में M's का PG का question लीख हुआ था तब भी सोनम मांग्चुक थे, social activist तब आके प्रोटेस्ट कर लिए राहूल गान्दी कोई भी बड़ा नीता जो है वो बोलेगा या शामिल होगा?नहीं, राहूल गान्दी जैसे ट्रीट वगड़ा तो आपने देखा, लेकिन कॉंग्रेस पार्टी से यहीं हमें बता गया है कि राहूल गान्दी तो एकदम से इस प्रोटेस्ट को शक भरी नि� सुने गांधी ने इस पर एक कौल ली थी, उनकी कौल थी, तो वो सही कह रहे हैं कि राहुल गांधी, वो तो उनका अपना मुद्धारी है।

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वो अपनी रैली कर रहे हैं जो उनकी रैली कर रहे हैं आज सब परलेमेंट में एक घंटे सारे ग्यारे से बाहर हैं जब ये प्रोटेस इध्यार चल ला था तो राहूल गांधी और अखले वरना आते बाहर साथ में एक बार जाते हैं और बीजे चौक के तरफ ही निकल जाते हैं इन चात्रों के साथ क्या हो रहा है कि इस चात्रों के साथ भी कुछ चर्चा हुई हुई होगी जरूर करिंड मुद्धा से यही चर्चा हुई होगी कि कैसे इसको कतम किया जाओ सरकार स लड्डा के लोग कहते हैं कि सोनम मांग्चुक तो जो है साल में तीस माई तीस दिन का अंचन करते हैं अपनी बॉड़ी को डीटॉक्स करने के लिए तो उनकी ये आदत में शुमार है उनके लिए कोई नई चीज नहीं है लेकिन जिस मुद्धे को लेकर आये वो मुद्धा उ ये तो है कि हंगामा तो होना है अब इस मुद्धे पर सडक पर नहीं होगा तो हाऊस में तो होगा ही वो परंपरा कैसे तूट जाए हमारे हाँ अब कल देखें लोग से बहुत सारे इशू हैं न परलिमन्ड में बहुत सारे इशू हैं और इस मुद्धे पर सरकार को विपरक्

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