All Content

From Stock Broker to Chanakya: The Man Behind BJP’s Unstoppable Rise |Political Journey of Amit Shah

Shubhankar Mishra 15 views
0:00

भारत की राजनिती में एक ऐसा नाम है जोसे या तो लोग बेपना महबबत करते हैं या फिर नफरत की हद तक डरते हैं लोग कहते हैं कि जहाँ बाकी लोगों की सोंश खत्म होती है वहाँ से उनकी अगली चाल शुरू होती है जब किसी राज का अजे किला अचानक से डह जात या जब विरोधी समझ ही नहीं पाता कि खेला हुआ कब तब सत्ता के गलियारों में सिर्फ एक नाम सबसे जादा फसपसाया जाता है ये नाम है अमिट शाह।वो अमिट शाह जिनने दुनिया सिर्फ एक नेता नहीं पलकी भारतिये राजनीती का सबसे ख़तरनाक रणमीतिका मौजूदा दौर का राजनेतिक चानक कहते हैं।ओ चानक, ओ खिलाडी, जो भाषनों से कम और अपनी चालों से जाधा डर पैदा करता है।वो जो बेबाख है, बिंदास है, जोसे कोई परवा नहीं कि आप क्या सोचते हैं।वो जो आपके मुफ़ पर आपको डाट सकता है।पतरकारों को हड़ते हैं।

2:00

है कि अमिडशा आयेंगे तो यूपी में धंगे होंगे अमिडशा आयेंगे इसमें आपका बड़ा रॉल है मेरा कोई रॉल नहीं है आपका ही रॉल है मेरा कोई बड़ा रॉल आपका ही है लेकिन क्या कभी आ� चाड़क दुनिया कहती है लेकिन शाह सिर्फ चणाव जिताने वाले निता नहीं है।वो भारती राजनीती के उस साइलेंड सिस्टम का नाम है जहां फैसले कैमरों के सामने नहीं बलकी शत्रण्श की तरह कई चाल पहले तैंकि आते हैं।और शैद यहीं वज़ा है कि पिछ और इन सारी कहाणियों के पीछे प्रत्यक्ष या प्रत्यक्ष तौर पर हर बार अमिशा रहें।लेकिन इस कहाणी का सबसे दिल्चस फिस्सा ये है कि अमिशा हमेशा से इतने ताकतवर नहीं थे।एक समय ऐसा भी था जब उन्हें मानसा का स्ट्रॉक ब्रोकर कहकर मजाख उ अमिश्चा वो हैं जो हार से डरने वालों में से नहीं।अमिश्चा वो हैं जो हार को हतियार बना लेने वालों में से हैं।

3:50

इसलिए आज ये कहानी अमिश्चा की हम आपको सुनाएंगे।अमिश्चा की कहानीइसलिए सुनाएंगे क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद मौदी के नाम पर हजारों डॉकॉमेंट्रिया बनें।लेकिन अमिश्शा के नाम पर सोशल मीडिया पर इतना कुछ नहीं है।अमि हम आपको बताएंगे कैसे मांसा का वो लड़का जिसने तेरा साल के उम्र में दीवारों पर पोस्टर चपकाने से शिरुवा गया।वो आगे चलकर भारत की सत्ता का सबसे बड़ा गेम डिजाइनर बना।

4:36

मोदी शा की 40 साल पुरानी दोस्ती और उनकी केमिस्ट्री का रास क् कैसे अपमान की आग में जल कर अमिश्शा ने वापसी का एसा ब्लूप्रिंट तैयार किया जिसने विरोधियों की नींद उड़ा दिया हम जानेंगे 2014 की उस एतिहासिक जीत का सच जिसने अमिश्शा को अजै बना दिया आज तक जितने भी रेकोड भारतिय जंटा पार्टी हम आज खोलेंगे आर्टिकल 370 और कश्मीर के उस सीकरेट प्लानिंग की पर्दें जिसकी भनक दुनिया की बड़ी बड़े एजन्सियों को नहीं लगे।इसके साथ ही बात होगी ओनारोपों की जिसमें विपक्ष पूछता है की एजन्सियां क्या भाजपा कीवाशिंग मशीन बनने हैं अमस्चा के कारिकाल में?क्या फिर इसके पीछे कोई सियासी गड़े छिपा हैं?पुर्वथर के जंगलों से लेकर बंगाल के गलीयों तक फैली उस और आखरी में एक बड़ा सवाथ कि 2029 में क्या अमिशा ही देश की राजनिती के सबसे बड़े चेहरे होंगे या फिर सत्ता के स्खेल में कोई चाल बाकी है लेकिन इस कहानी की शुरुवात गुजरात के एक चोटे से गाओ मांसा सेंग जहां एक साधारान लड़के ने राज स्कैन करने के लिए आपके लिए ताकि मॉबाईल फोन उठाएं, स्कैन कीजी और हमारे वाटसेब चैनल से जुणकर हमारी ताकत को मस्मुद कीजी।हमारे चैनल को फॉलो कीजी।

7:01

हम आपके लिए बड़ी मेहनस से, बहुत रिसर्च करके सारी कहानिया लाते हैं।तो अगर � लेकिन कहा जाता है कि अमेश शाह के दिल और दिमाग पर सबसे गहरा असर उनकी मा कुसुम बेन का रहा।कुसुम बेन पक्की गांधीवादी थी और शाह की साद्गी, खाकी का शौक और अनुशासन वही से आया।अमेश शाह की शुरुवाती पढ़ाई सोला साल की उमसे हुई थी कहा जाता है कि 1977 में महस 13 साल की उम्र में पहली बार शुनावी पोस्टर चिपकाए थे अमिश्यान एच्छात राजनिती की तपश्च को बहुत करीब से महसूस किया था अमिश्शा का पॉलेटिक्स में आना इतना असान नहीं था क्योंकि उनके पिता चाहते थे की बेटा खांदानी धन्धा समाले पिता ने एक बार गुस्से में यहां तक कह दिया की सुनो राजनिती छोड़ो नहीं तो घर से निकाल दो अमिश्शा ने कोई बहस नहीं की कहा ज और इसी विज्ञान ने उन्हें किसी भी समस्या को बारीक लेवल पर जाकर हल करने का फॉर्मुला दिया।साल 1987 में अपचारिक रूप से भाशपा का दामन थामा।

8:48

उन्होंने शेयर बाजार के उन पिछीद्गियों से सीखा कि कैसी एक डूपतेवे स्टॉक को पहचान कर उस साल 1999 में वो एहमदाबास जिला सहकारी बैंक के प्रेसिडन बने जो गुझरात का सबसे बड़ा सहकारी बैंक यहीं से उन्होंने आर्थिक घेराबंदी शुरू की जिसने कॉंग्रेज के दशकों पुराने आधार को हिला कर दिया उन्होंने बैंक के चुनावों में उन छो�साल 1982 में उनके मुलाकात नरेंडर मोदी से हुई थी और वहीं से भारती राजनिती की वो जोडी बनी जो सेन स्तारे रिकॉर्ड को धुस कर दिया।साल 1989 में जब वो पहली बार अहमदाबाद के नाराइनपुरा वार्ड से Municipal शुनाव लड़ने उठरें तो लोगों ने कहा य बल्के जमीन का असली खिलाड़े हैं।राजनिती को कभीलों की लडाई से निकाल कर एक डेटा ड्रिवन विज्ञान बनाया।जहांपर तुक्के नहीं सिर्फ सटीक निशाना काव करना।लेकिन ये काम्याबी अधूरी थी।

10:20

अगर शाह के साथ नरेंदर मोदी का वो अठ� क्योंकि दुनिया को ये लगता है कि ये दो बड़े रिताओं का बस एक राजनितिक गड़बनदन है।लेकिन हखीकत में नरेंद्र मोदी अमेश शा दो जिस्म, एक धिमाक और एक ऐसा तालमेल है जो से कोई डिकोड नहीं कर पाया।एहमदबाद के इंकम टैक्स सर्कल की व परदे के पीछे की बात ये है कि जब 2002 के गोडरा दंगों के बाद पूरी दुनिया मोधी को घेर रही थी तब शाह ने राद भर जग कर कानूनी फायलें तयार कियों और मोधी को बचाने के लिए पूरी राजनियतिक पूंजी लगाईं।जब केंदर की वाशपयी सरकार तककरीबी लोग बताते हैं कि नरेंद्र मोदी के कमरे में जाकर अमिश्चाह ही इकलौते शक्स हैं जो टोक सकते हैं और सबसे कड़वी सच्चाई बता सकते हैं।कहने वाले यह भी कहते हैं कि मोधी भी जानते हैं कि अमिश्चाह जो कह रहे हैं उसमें निजी स्वार्थ नहीं है।

12:12

यह जोड़ी बिल्कुल वैसी है।जैस जहां खान्दान की एहमेद थी और एक नए कल्चर की शुरुवात भी, पर्फॉर्मेंस कल्चर की हला कि आलोडशकों का तरक है कि इस पर्फॉर्मेंस से खीमत पर पार्टी के अंदर आंतरिक लोगतंतर कमजोर किया गया है सारे फैसले केवल भारती जनता पार्टी में दो ल वेसे वफादारी के स्कीमत को शाने तब चुकाया जब उन्हें उनकी अपनों ने घर से बेदखल करवाय था।लेकिन वो हार सबसे बड़ी जीत की तयारी थी।वो साल था 2010 का।दरसल साल 2010 अमेश शाह के जंदगी का सबसे काला समय था।सुरहा बुदीन और तुलसी राम लगा कि आमर शाह करियर में टीम मिल गया।

13:28

लेकिन शाह को समझ जाता है।इतना असान नहीं था।जेल की कालकोठरी में अमिश्शा ने रोने के बजाये खुद को किताबों में जहूं दिया।वहाँ पर चानक के नीती शिवाजी महराज के रणीतियों को घोट कर पी गए� तड़ी पार के दोरान उनकी पत्नी सुनलशा और परिवार ने जो कुछ जेला वो कोई सूच नहीं सकता।उन्हें सामाचिक बहिशकार सहना पड़ा।उनके घर पर 24 घंटे निगरानी रखी जाती।

14:06

लेकिन पत्नी चटान की तरह खड़ी रहें और आमिशा का हॉसला बढ़ जेल और टाली पार के उन अन्धेरे दिनों में अमिश्शा ने केवल किताबे नहीं पढ़ी बलकी सबक सीखा।सिस्टम को बाहर से लड़कर नहीं अंदर घुसकर बदलना पढ़ता है।इससी दोरान जब उत्तर प्रदेश गलियों में निरवासन के दोरान वो घूम रहे थ और साथ मिलकर magic create हो और वो magic अपने आप में इतिहास बदलने वाला था।और इतिहास के साथ ये अमेश्शा के जिन्दगी से वो बोरे दिन भी गाएब होने लगे।क्योंकि 2014 में Supreme Court और Special Court ने उन्हें clean चिट दे दी।Supreme Court से कहा गया कि ये case राजनियतिक साजज थी, जान

15:25

प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाता है।कहता है कि सरकार बदलने के बाद एक लीन चिट मिली।लेकिन अमिश्शा के लिए वो लीन चिट उनके राजनेतिक पुनर जनम का सर्टिफिकेट दरसल 2013 में अमिश्शा को यूपी का प्रभारी बनाया गया उसके पहले वो कई बार बनारस में गलियों में घूंब चुके थे और जब उन्हें प्रभारी बनाया गया तो दिल्ली के बड़े बड़े पतरकारों विशलेशकों ने उनका मजाक बढाया कहा जोसे ठीक से हिंदी उन्होंने पन्ना प्रमुख का वो मॉडल पेश किया जोसेने पूरी दुनियां के लिए शुनावी मैनेज्बिंट की परिभाषा बदल दी।बारीख ज़्यानकारी आपको बता रहे हैं कि अमिश्षा ने यूपी में करीब डेल लाख पन्ना प्रमुखों के ऐसी अभेत फ इस एक फोन ने पूरे UP कारिकरताओं में करण दोडा दिया यूपी के 80 सीटों को केवल शुनाव की तरह नहीं बलकि बायो केमिस्ट्री के चातर की तरह हल किया गया सपा वस्पा के पुराने वोट बैंग में ऐसी सेंद लगाई कि घैर यादो पिशलो और घैर जाटो दलितोहाला कि आलोचक ये भी कहते हैं कि इस जीत के पीछे ध्रुवीकरण की राजनिती समदायों की बीशखाई बढ़ाने का हाथ।मुजफर नगर दंगों के बाद बने माहौल का फायदा उठाने के लिए आरूपों ने शा की छवी को एक विवादित हिंदुवादी नेता के � अगर वेक्तिके चुनाओ की बात भी करें तो अमिश्शा लगातार चार बार विधायक बने थे 97, 2002, 2007, 2012 सच तो ये है कि अब तक अमिश्शा ने 29 चुनाओ लड़े और एक बार भी चुनाओ में हार का सामना नहीं किया है वेक्तिके चुनाओ की बात करें अइसे ही यूपी है भाज़पा के तरह मज़्बूत हैं।

18:23

सिर्फ यूपी नहीं।हाल -फिलाल में अगर आप बंगाल देख लीज़ें।अमिश्ञा उस बंगाल में सरकार बनाते हैं जहां से भारती जनता पार्टी की सोच की शुरुवात हुए।शयमा परसाद मुखर जी जीनों ने जनसंग क अमिश्चा ने मत्वा नामशुद राजवासीयों की बीड़ जाकर सोशल इंज़िनग की, मम्ता बेनरजी के किले को धीरे धीरे दरकाया, 2019 में लोगसभाद में 18 सीटें, 2021 में भी सीटें आएं, और फिर 2026 में 48 % से जादा वोट लाकर मम्ता बेनरजी की 15 साल की सप्ताव ख�पहली बार बंगाल में भारतिय जनता पार्टी का मुख्यमंत्री बन रहा है।शुबिंदू अधिकारी को मुख्यमंत्री बनाये गया है।

19:17

द्रणमूल कॉंग्रेस मम्ता बिनर्जी बैकफुट पर आ गयी है।हला कि इसमें भारतिय जनता पार्टी काई कारिकर्ताओं के ज और उस भरूसे का असर था कि बंगाल की राजनीती में भारती जनता पार्टी पहचान मना पाई।मम्ता बेनरजी के लिए कमजूर कर पाई।हाला कि आरोप इसमें भी लगा कि अमिश्चा ने हिंदू मुसल्मान खुप किया धरम के नाम पर राजनीती को माटा।लेकिन अम क्यूंकि मम्ता बैनर्जी उनकी नजर में हिन्दू से दूरियां बना चूगे थी. अब ये सही था, गलत था, जो भी था, लेकिन डेमोक्रिसी में जनता अगर बढचड कर वोट देती हैं और मम्ता बैनर्जी जैसी नेता सौ सीटों को पार नहीं कर पाती है, तो ये बताता ह अमिश्चा के बारे में इसलिए कफ़ा उड़ती है कि वो शुनाव जिताने वाली मशीन है।तेजस्वी आदों से लेकर अखलेश आदों तो कई बार कह चुकें कि बीजेपी बहुत प्रोफेशनली चुनाव लड़ती है।

20:55

साल भर चुनाव के मूड में रहती है।लेकिन अयानी संगठन के बड़े शिल्पकार हैं।भाज़पा को एक ऐसी प्रोफेशनल कमपनी की तरह बनाया है जो इसका मखसद वोट और कार करता है।उनपर अखसर वन मैन शो चलाने का आरोब लगता है।लेकिन हखिकत यह कि पार्टी के वीतर जवाब देही का सिस्टम है� 2021 में वो देश के पहले सहकारता मंत्री बने, सहकारता शित्र को राष्टिय स्थर मज़बूत करने के लिए कदम उठाए।

21:39

यह उनके पुराने जुनून का विस्तार था जब वो SDCB के प्रेसिडन्ट थे।यहाँ पर यह आरोप लगता है कि सेहकारी संस्थाओं के जरीये भाशपा ग्रामीर अर्थवरस्था और किसानों के वोट बैंग को कंटूल करना चाहती है।अलुचा कहते हैं कि शाने भाशपा को ऐसी मशीन बनाया है जिसमें विचारधारा जादा अंगड़ित संसाधनों क फैसला जैसे आर्टिकल 370 जिसके बारे में लोग मजाक उडाते थे फैसला राममंदिर बनने के बाद देश में दंगे न होना आर्टिकल 370 और राममंदिर पर फैसला आने के बाद देश में दंगे न होना ये दो ऐसे कदम हैं जो अमिशा को ग्रेमंत्री के तौर पर बड़ आमेश्शा का वो जो भाशर था मानिये सभापती जी हम जान दे देंगे इसके लिए कश्मीर भारत का भिननंग हैएक एसा मुम्मेंट था जो शायद भारती राजनिती में हमेशा के लिए अमर हो रहे था इस उपरेशन के त्यारी महीनों से चल रहे थी इसकी भनक मोदी शा डोबाल के लावा किसी को नहीं थी शाने सीमा पर एसी घेरा बंदी की कि विरुद अमिश्शा के साहस और प्रशासनिक शम्ता का ये बड़ा उधारण है।घाटी में लगावादियूं के आर्थिक तंतर को पूरी तरा कमर तोड़ते हैं।दिखाया कि अगर राजनतिक नियत साफ हो सत्तर साल पुराने नासूर को भी पंधरा मिनट में खतं किया सकता है।

23:46

औ कश्मीर के अगर मसले की बात की जाये तो कश्मीर में लंबे समय तक प्रतिबंद जो लगे थे लोग तांत्रिक अधिकारों के हनंपर कई लोग ऐसे हैं जो उनके अलोषना करते हैं कई संगठन करते हैं उनके अलोचक कहते हैं कश्मीर में भले ही शांती दिख रही है लेकिन � आप जड़ा क्रोनोलॉरी समझें।ये जुमला रातो रात हर युवा के जुबान पर है।लेकिन इसके पीछे भी अमेट शा की वो दुरडता इसपचता है।और इसलिए शायद धाशपा की जो समर्थक हैं वो ने अपना लौपुरुष मानते हैं।क्योंकि अमेट शा की कउपर हमले की हैं ताना शाह तक कहा गया है लेकिन शाह ने हम लोको बड़े शान सुभाव से लिया सीए के दुरान जब उनपर व्यक्तिकत हमले हुए तो कहा कि आपके गालियां संकल्प को मस्बूत करती हैं अमिश्शा के क्रुणियोरोजी स्टाट्स के जरीये भी निकलती ह हालाकि इसे लेकर देश्यों का हिस्सों में हिंसक गरोध प्रदर्शन दंगे हुए हुए।

25:15

जिससे अमिश्शा को लेकर सवाल भी उठें।अमिश्शा के आलुचक कहते हैं कि CA जैसे कानूनों ने देश के धर्म निर्पेश धाचे को चोड़ पहुंचाई और एक बड़े सम एक ग्रेह मंत्री के तौर पर नक्सलवात में कमी आना अमिश्शा की उपलब्धी के तौर पर देखा जाएगा।और वैसी वी राजनतिक उपलब्धिया अमिश्शा का उन राज्यों में इक्स्पैंशन बीजेपिय करना जहां पर बीजेपी का जंडा उठाने वाला कोई न जहांकि राजनिती को समझना किसी पहेली से कम नहीं था।लेकिन अमश्या ने नागालैंड, मणीपुर, मेघाले, त्रिपुरा के स्थानिय समिक्रणों को मुठ्थी मिलिया।उन्होंने बोडो समझोता करके दश्कु पुराने हिनसा को शांत किया।त्रिपुरा में ब्र� ये समझोते केवल काँखजी कारवाई नहीं थे बलकि इनफैस्टो ने उन हजारों माओं की कोक उजड़ने से बचाई जिनके बेटे जंगल में हतियार लिए घुम रहे थे।

26:42

उन्होंने आक्ट ईस्ट पॉलिसी को भी आक्ट नौर्थीस विजन में तबदील किया जहां विकतक पूर्वुत्तर का विकास नहीं होगा भारत का विकास अधूरा है और शायद ये ही वजाए कि अगर आज पूर्वुत्तर में कमल खिल रहा है तो उसके पीछे अमिश्शा की भी मेनत हैं जिन्नों ने सेवन सिस्टर्स में आज बीजेपी को मस्बूत किया और सेवन सिस मड़ीपूर में जो जातिय हिंसा हुई, जिस तरह से वहाँ की तस्वीरे निकल कर आएं, जिस तरह से वहाँ महीनों तक कानूनी विवस्था बिगडी रही, उसने अमिश्शा की शैली को लेकर बहुत सारे सवाल भी खड़े किये।विपक्ष का अरोप था कि सरकार की चुप लेकिन इन सारी चुनौतियों के मीच अमेश शा के ख़लाब एक एको सिस्टम भी ख़ड़ा हुआ जिसने उन पर जासूसी और एजन्सियों के दुरप्यूग के आरोप लगा था।दरसल अमेश शा के सबसे बड़ी चुनौती वो आरोप रहे जो दिल्ली से उन पर लगते र एजन्सियों का समाल विरूध्यूं को चलने के लिए होता है PMLA कानून के तहट पिछले कुछ सालों में ED ने भले हजारों करूर बरामत कियों सरकार इसे बृस्तचार की जंग कहती हो लेकिन विपक्ष कहता है कि सेलेक्टिव टार्गेटिंग हैं जब से हमें शाय हैं तब से ED आपके पश्चिम बंगाल में सुविद्धू अधकारी तक के बारे में पक्षा रोप लगाता है कि ये सब ED, CBI की वज़ा से आये हैं।इन एजन्सियों की कारवाई का शिकार सिर्फ विपक्ष के नेता बनते हैं जबकि भाजपा में शामल होने वाले ब्रश्ट निताओं खिलाब मामले थंडे मस्ते में जाते हैं और इसी को लेक आलोचक इसे तानाशाही सम्विधानिक संस्थाओं का पतन कहते हैं समर्थक इसे सत्ता के सुचिता नए भारत का उदय कहते हैं अब ये सही है गलत इस बात का फैसला हम आप पर छोड़ देते हैं और हम आपको बताते हैं अमेश्शा के जिन्देगी की वनसूनी बातें जो श लोग अखसर अफ़ा उड़ाते हैं कि उन्हें किड्नी गंभीर बीमारी थी पर असलियत ये है कि 2019 में उनके गर्दन पर एक लिपोमा की सर्जरी हुई थी उनके इच्छा शक्ती का अन्दास इस बात से लगा ये कि सर्जरी के बार डौक्टरों ने आराम की सला दी लेकि ये अमिश शा का वो चुलबला अंदास भी था जो शायट कम ही देखने को मिलता है अमिश शा को वैसे राजनिती के लावा क्रिकेट से ही बड़ा प्यार है गुजरात क्रिकेट एसॉसियेशन के प्रेसिदेंट रहे शत्रंज एसॉसियेशन के मुख्या रहे आज उनके बेट से शायद गाइडन्स लेकर जैशा ने भी क्रिकेट के दुनिया में कई बड़े फैसे लिये।और बीते कुछ सालों में जब भारती टीम अच्छा कर रही है, जब महिला क्रिकेट टीम को पुर्शों के बराबर सेलरी मिल रही है।

"99% accuracy and it switches languages, even though you choose one before you transcribe. Upload → Transcribe → Download and repeat!"

Ruben, Netherlands

Want to transcribe your own content?

Get started free
30:45

IPL दुनिया के सबसे सेकेंड बड़ी पैसा वाली लीग बन चुकी है, तब इसका क्रेड़िट आमिश शा को भी जाता है।आमिश शा के जिन्दी की बात की जाये तो अमिश्शा सोमनात मंदर ट्रस के ट्रसी भी है धार्मिकास्ता उनके कामों मुझे लगती है अपने कारकरताओं के विक्तिकत सुख दुख का वो ध्यान भी रखते हैं कई जानने वाले कहते हैं कि कई कारकरताओं के विमार होने पर खुद हाल चाल लेते हैं अलाकि उनका कड� तो अमिर्शा ने कहा था कि जिसको डरना चाहिए अगर वो डर रहा है तो ये कुछ घलत नहीं है एक सिस्टम तो होना चाहिए लेकिन आखरी सवाल ही है कि क्या अमिर्शा 2029 में प्रदान मंत्री बनेंगे 2029 और उसके आगे शाह क्या मोदी के बाद हुँगे ये सवाल बड़ 2019 में गुलाल किष्ण अडवानी की सीट गाँधी नेगर स्चुनाव बड़े जीते 2024 में भी 7 .4 लाग कोड़ जीते हाला कि 24 की चुनाव में भाष्पा को एक सेट बैक मिला था 240 सीटे रहें अमश्चा पर बहुत सारे सवाल उठें उनके प्रबंधन को लेकर सवाल उठें लेसारे सवालों को गायब होते लोगों ने दिखा हैं हाला कि अमिश्शा क्या एकलोते व्यक्ती हैं जो मुदी के बाद देखे जा रहे हैं जवाब है नहीं कई और भी नाम है योगी अडितरार्थ की लोगप्रियता देवेंद फड्णवीस का प्रशासनी कन हेमन तबस्त � कि वो अपने नाम पर भारत में सरकार बना सकते हैं।ये एक सवाल या निशान है।और इसलिए कई आलोचा के कहते हैं कि अमिश्शा प्रधानमंत्री पत के दावेदार नहीं।वो वो वेक्ती हैं जो संगठन चला सकते हैं, सरकारे बनवा सकते हैं, किंग मेकर हैं, किंग न इस सवाल को हम भविश पर छोड़ देते हैं।

33:53

कुल मिला कर अमिश्चा किस पूरी कहानी को समझने के बाद एक बात जो हमें समझाती है वो ये कि वो कोई सामाने राजनिता या केवल चुनाव प्रबंधक नहीं हैं।अमिश्चा वो वेक्ती हैं जो ने राजनिती को एक बड अमरशाक अचानक होना केवल दिमाग के ऊपर जय मीडिया का दिया नाम नहीं है, पलकी उनकी लंभी तपस्या, उनके संघर्ष, उनकी प्रधानमंत्री मोदी से अटूट वफ़ादारी, उनके बायो केमिस्ट्री, स्टॉक मार्केट के अनभो और उनकी कुषल कारशेलीहै जिसने उन्हें राजनिती का बाजीगर बनाया है।अलुचक उन्हें ध्रुविक्रणवाला नेता कहते हैं।वो मानते हैं कि अमश्चा को ऐसे विक्ती के तौरप याद रखा जाएगा जिसने हिंदु -मुसल्मान के बीच में गहरी खा� वो विक्ति जो इसने कश्मीर से 370 हटाया है वो विक्ति जो इसने राम मंदर बनने की पूरी प्रक्रिया को परदे के पीछे रहकर खामोशी से काम करवा वो विक्ति जो इसने भाश्पा को हो उन राज्यों में पहुंचाया जहांपर भाश्पा का जहंडा उठाने वाला को� अमिश्शा के जिन्दई कौन सा हिस्सा आपको लगता है कि ये सबसे रोचक था।अमिश्शा के जिनदई के सिस्से को इस कहानी में आपने पसंद किया है।

35:41

वो कौन सा हिस्सा है जो आप चाहते हैं कभी हम विस्तार से आपके लिए एक अलग वीडियो में बनाएं।बताएं

Get ultra fast and accurate AI transcription with Cockatoo

Get started free →

Cockatoo