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Iran vs America WAR 2.0? खामेनेई का ताबूत IRAQ क्यों? 1 Coffin. 2 Countries. 80 Airstrikes.

Shubhankar Mishra 14 views
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एक ताबूत, पांच शहर, दो देश और रास्ते में गिरते हुए बाद।इतिहास में जनाजे बहुत हुए हैं लेकिन ऐसा जनाजा शायद पहली बार हो रहे हैं।

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क्योंकि जिस रात ये ताबूत इरान की सरहत को पार करके इराक की शहर नजव पहुचा थीक उसी रात अमि ये ताबूत जो लाल कपड़े में लिप्टा है जो से आप देख रहे हैं ये इरान के सुप्रीम लीडर आयातुला अली खामनेई का है वही खामनेई जिन्होंने 37 सालों तक इरान पर राज किया जो अमेरिका को शैतान कहा करते थे और जुनके मौत अमेरिका के ही बम से हुए खून का बदला खून से।कपड़ा चरने के 24 घंटे के अंदर समंदर में तीन जहास जल उट जाते हैं।

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कुवैट, बहरीन पर मिसाईल ही घिर जाती हैं।डॉनल ट्रॉम नेटो समिट में खड़े होकर एलान करते हैं कि इरान से सीस फायर खत्म हो जुका है।

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यानी एक रात दुनिया इन्हें दो अलग -अलग खबरें समझ रही है, लेकिन सच यह है कि ये एक कहानी के दुसरे हैं।और इसलिए आज इस कहानी में दो बड़े सवाल।पहला, खामनी का ताबूत आखर ईराक क्यों ले जाये गया?ट्योंकि इराक वो देश है जिससे इरान ने कभी आ�देश होने के बावजूद दो मुलकों में कभी पढ़ती नहीं थी।ऐसे में दुश्मन मुलक में खामनी का जनाजा क्यों पहुँचा।

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और दूसरा ईरान से खामनी का जनाजा ईराक पहुँचा तो उसी वक्त अमिरिका ने सीस फायर खतम क्यों कर दिया।क्या ये म नमस्कार दोस्तों मैं हूँ शुबांकर मिश्रा और आज ये कहानी देखने में तो एक जनाजी की खबर लगती है लेकिन इसकी पर्तों में धर्म, राजनीती, तेल और एक नई जंग सबको छिपा है।ओपनिंग में हमने आपसे दो सवाल पुछे थे कि ताबूत ईराक क्य� उस से उनका 79 साल पुराना क्या रिश्टा है?इसलाम में नजव शहर के माइने क्या है?क्या एहिमियत है?इसके अलावा हम समझेंगे कि इरान का नया सुप्रीम लीडर अपने पिता के जनाजे से क्यों गायब है?

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कहां है खामनी के बेटे?और आखिर में वो बात जो इरान की हमारे WhatsApp चैनल से आप जुड़िये ताकि ये वीडियो आपको खोजने ना पड़े इंतजार ना करना पड़े हम आप तक सीधे पहुंचा दिया करें और उसके लिए आपको जाधा कुछ नहीं करना है कॉमेंट सेक्शन में जाकर जो पहला कॉमेंट है उसकी लिंक पर क्लिक कर �

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आपको सारे वीडियोज मिल जाएगा।

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आप शुरुवात करते हैं पहले सवाल से कि खामनी का जनाजा आखिर चार महीने तक क्यों रुका रहा?

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तो देखे तारीक थी 28 फरवरी 2026 आप सब जानते होगे अमेरिका और इस्राईल की इरान से जंग का पहला दिन था।

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तेहरान में मौत के बाद उनके बेटे मुस्तबा खामनी को नया सुप्रीम लीडर घुशित किया गया लेकिन जंग जारी थी।

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बंबारी के बीच इतने बड़े नेता का जनाजा निकालना मुंकिन नहीं था।जनाजा पहले मार्श में होना था, फिर तल गया।

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अब आप पूछेंगे की फिर तीन हफते पहले ट्रम्प और इरान के मीच में सीस फायर होता है।

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जिसमें ये तैह हुआ था कि समंदर के रास्ते खुलेंगे।और साट दिन में एक बड़ी डील पर बात होगी।जंग रुकते ही इरान ने वो काम शुरू किया जो चार महीने से अधूरा था।

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लेकिन सरकार ने इस बीच में पाँच करोण रोटियों का इंजाम किया पाँच करोण यानी पूरी दिल्ली को अगर आप दो दो रोटी बाढ दें तब भी रोटियां बच जाएंगी तेहरान की पाँच हजार मस्जितें साथ सो स्कूल बाहर से आय लोगों के लिए खुले छोड़ �वो जनाजा इतना बड़ा था कि भगदर में दस से जादा लोगों की जान चली गई थी और दस हजार से जादा लोग उस दोर में घायल होए थे हीरान इस बार उस से भी बड़ी भीड चाहता है यूरोपी मीडिया ने तो साफ साफ शब्दों में लिखा है कि इरान इतिहास का सबसे बड़ा स्टेट फिन्डरल करने की तयारी में है यानी चार महीने का इंतजार मजबूरी में शुरु हुआ था लेकिन बाद में इरान ने उसे मौके में तबदील कर दिया अब सवाल है कि نظف دراصل ایراک کا شہر ہے لیکن دنیا کے قریب 20 کروند شیعہ مسلمانوں کے لیے یہ دھرتی کی سب سے پوتر جگوں میں سے கیں کیونکہ یہاں پر امام علی دفن ہے امام علی یعنی پیغمبر محمد کے داماد جنہیں شیعہ مسلمان پیغمبر کا سچا وارث مانتے ہیں پورا شیعہ اسلام اس ایمانتہ سے جنما ہے اور پورا نظف شہر امام علی کے درگاہ کے چاروں طرف بسا ہے جیسے عیسائیوں کے لیے ویٹیکن اور ہندووں کے لی वैसे ही शियाओं के लिए नजफ शहर है अब नजफ सिर्फ दर्गा नहीं है शिया दुनिया की सबसे बड़ी पाथशाला भी है जहां सदियों से बड़े धर्म गुरू पढ़ते और पढ़ाते आयें एराक के सबसे बड़े धर्म गुरू आयातुल्ला सिस्तानी आज भी यह उसने वहाँ पर उस जोर के मशूर आलिम आयातुल्ला मौसिन अल हाकीम जैसे उस्तादों से तालीम ली और सपना देखा कि वो नजफ में रहकर एक बड़ा आलिम बनेगा लेकिन उसके पिता ने उसे वापस बुलाकर ईरान के शहर कोम भीज दिया वही चात्र आगे चलकर ईर

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का सुप्रीम लीडर बना और अब पूरे 79 सालों बाद नजफ लोटा है।

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जिस शहर में वो जिंदगी विताना चारा था उसे शहर की गलियों से उसकी आखरी विदाई हो रही है।आयातुल अब आपके मन में सवाल आना चाहिए कि खामनी के जनाजे के पीछे असली चाल क्या?क्यूं उसे इराक ले जाये क्या?तो देखिए ये वो बात है जो शायद ही कोई बता रहा हूँ।शिया दुनिया में सदियों से दो बड़े केंद्र आपस में आमने सामे रहें।इरा जहां सबसे बड़ा धरमगुरू ही देश का सबसे बड़ा शासक होता है।

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खुद आयातुल्ला सिस्तानी ने कभी इरान वाले मॉडल को भी नहीं अपनाया था।

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अब आप सोचिए, इरान अपने सुप्रीम लीडर का ताबूत उसी नजफ की गलियों से घुमा रहा है जिसकी अब यहाँ पर आपको एक सिकेंड रुखना पड़ेगा।क्योंकि यही इतिहास का सबसे अजीव मोड है।यही इराक है जिससे इरान ने असी के दश्चक में पूरे आठ सालों तक खोनी जंग लडी थी।आठ साल।सद्धाम हुसेन का वो दोर था।जिसमें दोनों तरफ

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Ruben, Netherlands

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लाखों लोग मारे गए थे और खुद खाम नहीं उस जंग के दोरान ईरान के राश्पती थे आज वही ईराक उनके ताबूत के लिए पूरे देश में छुट्टी घोशट कर रहा है और उसके बड़े नेटा लोगों में बदल देती हैं और यही उसकी सबसे बड़ी मिसाल है।दूसरी चाल जो है, वो है शहादत का फिर्ण।नजफ के बाद ताबूत जो है, वो करबला जाएगा।जहाँ पर इमाम हुसैन की दर्गा है।जिनने 1400 साल पहले 72 साथियों समें शहीद किया गया था।करबला, श क्योंकि शिया परंपरा में लाल जंडा तब तक नहीं उतरता जब तक शहीद के खून का हिसाब न ले गया जाएं सरकारी बयानों में भीड के अंदर दो ही नारे गिना जा रहे हैं दुश्बन से लडाई और लीडर के खून का बदला और इरान का बदला कैसा होता है इसकी ए कहा कि असली बदला अमेरिका को इस पूरे इलाके से निकालना है।

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यानि लाल कपड़ा किसी एक हमले का नहीं एक लंभी रणनीती का एलान हो सकता है।और उस रणनीती की पहली जलक जनाजे के 24 घंटे के अंदर दिखाई पड़े।

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हमने एक जनाजा इराक पहुँचा और ज एक जहास कतर का था, एक सौधी अरब का और साथ में चितावनी दी कि हमारे बताय रास्ते से नहीं चलोगे तो सुरक्षा के गैरिन्टीन नहीं है।और मुझ समंदर का वो तंग रास्ता जो आपके लिए है।अगर ये रास्ता फिर से लंबा बंद हुआ तो यखीन मानिए हिंदुस्तान में एक बार फिर पेट्रोल, डीजल, माल धुलाई, महंगाई इन सब का बिल आपकी जेब से भी जाएगा।फिर मंगलवार की रात आती है ताबूड जो है वो नजफ के हवाई अड्डे पर उतर रहा था इरान के राशपती विदेश मंत्रे खुद मौजूद थे इराक के बड़े अधिकारी इस्तगबाल में खड़े थे और ठीक उसी वक्त अमेरिका ने असी से जादा ठिकानों पर ह साथी अमेरिका ने एरान से तेल बेशने की वो छूट भी छीन ली जो सीस फायर की एहम शर थी वो द्वार तड़के एरान ने पलटवार में कुवैत और बहरीन पर मिसायले और ड्रून दाग दी क्योंकि वहाँ पर अमेरिका के सैनिक तैनात हैं बहरीन में साइरन बजे और � जिन शेहरों में आज साइरन बज रहे हैं वहाँ की गलियों में लाखों भारतिय परिवार रहते हैं और भारत इस पूरे मामले कितनी गंभीरता से ले रहा है इसका अन्दाजा इस बात से लगा ये कि खाम नहीं के जनाजे में भारत सरकार ने अपना आधिकारिक प्रतंधीकह दिया की मेरे लिए एसीस फायर खतम है ना कोई डील ना कोई बाचीत सब वक्त की बरबादी यानी डॉनल्ड ट्रम्म ने जो समझोता ठीक तीन हफते पहले खुद साइन किया � अब आप इस पूरी टाइमिंग पर गौर कीजिए।जिस हफते ट्रम नैटो के मंश पर दुनिया के नेटाओं के बीच बेठे थे।

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उसी हफते इरान ने समंदर में जहास जलाए।जानकारों को मानना है कि इरान ट्रम को उनहीं के मंश पर नीचा दिखाना जाता था।

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ये क कि ताबूत इराग पहुँझते ही सीस फायर क्यों खत्म हुआ?जवाब क्योंकि ये जनाजा इरान की ताकत का खुला एलान था।

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इरान मानों अमेरिका को बता रहा था कि हम जुके नहीं हैं और हमारा असर सरहत पार तक है।हॉरमूर्श के हमले उसी एलान पर अमल थे।अम यानि ताबूत का इराग जाना और सीस्वायर खत्मोना दो अलग खबरे नहीं जो ऐसा हमने कहा था एक ही सिक्के के दो पहलूँ है।अलाकि खामनी के जनाजे में एक सवाल जो दुनिया के सभी लोगों के मन में आया वो ये था कि खामनी के जनाजे से इरान के नए सुप्री ये बताया जा रहा है कि इसकी वज़ा उनकी हता है।

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और ये डर बेवजा नहीं है।क्योंकि मार्च में ही इरान के सुरक्षा प्रमुक की हत्या हुई।

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इस्राईल के रक्षा मंत्री खुलेयाम कह रहे है कि मु� उसे दिन उनका लगभक पूरा परिवार उजड़ गया था।

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और यही कहानी में एक पेच है।दो कहानिया आमने सामने आकर खड़ी हो गई।

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इरान के सरकार कहती है कि मुझ्तबा को लगी चोट मामली थी।बस दो -तीन टांके लगे और उसी रात वो अस्पताल से घर गए� और जलने की वजह से बोलने में तकलीफ है।

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रिपोर्ट ये भी कहती है कि वो अपने पिता के जनाजे में आना चाहते थे।लेकिन सुरक्षादिकारियों ने साफ साफ मना कर दिया।सच इन दोनों कहाणियों के बीच में कही है।या है भी, ये कोई नहीं जानता।क्योंकि बंद लिफाफों में कोरियर की एक चेन के जरीये गाडियों और मोटरसाइकलों तक पहुचाय जाते हैं ताके कोई सिग्नल पकड़कर उनका ठिकाना ना खुज पाएं बड़े फोजी कमांडर तक उनसे मिलने नहीं जाते हैं इस दरसे की पीछा करके इस्राईल उन तक पहुअगर यह सच है तो अमेरिका सर जंग के मुहाने पर खड़े देश की कमान असल में उनके जनरलों के हाथ में हैं जो उनके लीडर का ताबूत अभी नजफ के गलियों में घूम रहा है अब आखर केस पूरे सेक्शन में एक लाइन याद रखे दुनिया का शायद ही कोई ऐसा � ये इस कहानी के वाखरी परत है जो आपको हैरान करेगी क्योंकि जो कोई खामनी के जनाजे की ये बड़ी भीड देख रहा है वो ये सवाल कर रहा है इरान के बाहर बैटे विपक्षी मीडिया का दावा है कि तेहरान में नगर निगम के करमचारीयों को आदेश भेज़कर जन लेकिन इतना जरूर बताते हैं कि जनाजा जितना धार्मिक है उससे कहीं जादा राजनेतिक भी।

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एक जानकार ने इसे एक लाइन में यूँ कहा कि धार्मिक कपडों में लिप्टा हुआ ये राजनेतिक इवेंट है।जुसका मकसद घर में हुकूमत की पकड़ दिखाना और लेकिन उस दुख को जिस तरह सजा कर, घुमा कर और दुनिया को दिखा कर इस्तमाल किया जा रहा वो एक कैल्कुलेटेड हिसाब गिताव है और इसलिए सवाल कि खामनी के दफन होने के बाद आगे क्या होगा?खामनी का ताबूत नौ जुलाई को उनके जनमस्थान मशहत पहदफन होने के दिन मुश्टबा खाम नहीं पहली बार दुनिया के सामने आयेंगे दल्चिस बात ये है कि दोनों ही सूर्ते भारी हैं अगर मुश्टबा सामने आये तो चार महीने के सारी अटकलों से परदा गिर जाएगा और इरान की कमान का चेहरा दुनिया देख लेगी।अगर नहीं आये तो लगभग मुहर लग जायेगी कि इरान की असली ताकत जर्णलों के हात में हैं।उदर हार मुझ में हर जलता जहास तेल के बाजार को बेचैन कर रहा है।

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और ये बेचैनी भारत के पेट्रूल पम्ट � क्योंकि ये कहानी सिर्फ एक ताबूत की आत्रा नहीं है।ये एक देश की आस्था है।एक हुकूमत की चाल है।और शायद एक नई जंग की शुरुवात भी।जनाजे से वार 2 .0 की।आपको क्या रखता है?

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क्या ये जंग अब पूरी तरह भड़केगी?या ट्रम्प आ� तो हमारे चैनल से जुड़ियेगा हम कोशिश करते हैं कि मानदारी से निस्पक्ष्टा के साथ हर विशे को आपके सामने रखें ताकि आप उस विशे की गहराई को समझें और विस्तार से आपको जानकारी मिल सकें जुड़ियेगा हमारी ताकत बनियेगा क्योंकि आपका जु जैहिन, जैभारत और जाते जाते अपने शहर का नाम भी लिग दीजिए और ये बताये कि आज वहाँ पेट्रोल कितने का है?जड़ा हम भी देखें कि इस जंग की आज सबसे पहले किस शहर तक पहुँचती है?इसलिए पेट्रोल, डीजल का दाम कॉमेंट सेक्शन लिखेगजैवारण

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