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Rahul Gandhi's Protest 3.0: PM House Siege? | NEET 2026 | NEET 2026 | Jantar Mantar | Kisan Andolan

Shubhankar Mishra 1 views
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प्रोटेस्ट प्रोटेस्ट प्रोटेस्ट जिधर देखो सिर्फ प्रोटेस्ट मोधी सरकार के खिलाब प्रोटेस्ट और इसलिए सवाल की क्या मोधी सरकार के अच्छे दिन खतम हुगे।क्योंकि चारों तरफ प्रोटेस्ट सवाल उठ रहे हैं क्या सरकार जनता की आवास को क्या सरकार इस मुगालते में चली गए कि वो नौजवानों के साथ भी गलत कर रही थी किसानों के साथ भी विपक्ष के साथ भी और सब मिलकर कर रहे हैं प्रोटेस्ट या फिर पंजाब और यूपी के आने वाले शुनाव ने चात्रों के मुद्दे को उठा कर एक नया खेल � तीन तस्वीर, तीन कहाणियां लेकिन एक ही कहाणी के तीन कोने पहली तस्वीर जंतर मंतर की जहाँ पर नौ जवान जब संसत की तरह बढ़ा तो जो अफरा तफरी मची उसने देश को हिला दिया आँसु गैस, लाठीयां उसके बाद तोड़ फोड पुलिस कह रहे की अमारे हिरासत में रख लिया है शम्भू बॉर्डर पर किसान भी आ चुका है बड़ी संख्या मेनदाता कह रहा है कि हाइवे रोग दिया है दिल्ली हम जाएंगे अभी मान लो हमारी मांग अमेरिका वाली ट्रेट डिल रद कर दो MSP की कानूनी गेरंटी दे दो और राहूल गांधी � एक चात्रों की जिनहें पेपर लीक का डर है और जो धरमेंद प्रदान का स्तीफा चाहते हैं।दूसरा किसान जिसको डर है कि उसके खेती की डील कर दी जायेगी।और तीसरा राहुल गांधी और विपक्ष।इन सब के बीच मौका देख रहा है।अपॉर्चुनिटी।

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वो अपॉर्चुनिटी जो सरकार ने अपनी चुप्पी से इन सब के सामने खड़ी के।सरकार इन सब के बीच क सवाल है कि अगर दो दो बार धर्मेंद्र प्रधान गलत हो गये तो फिर इस्तीफा क्यों नहीं हुआ अगर सरकार मान रहे है कि पीपर लेक के दोशीयों पर आक्शन हुआ तो फिर मंतरी साहब को अपने पत पर रहने क्या और अगर गलत था तो फिर बच्चे जब मांगने ग यूपी और पंजाब यूपी जहां बड़ी संख्या में चात राते हैं पंजाब जहां पर किसानों की बड़ी ताकत है और यहीं सवाल है कि अब जो कुछ हो रहा है ये सरकार के घल्तियों का नतीजा है या सरकार की बेरुखी के बीच में विपक्ष को मिल गया एक बहुत ब� का सच दिखाई पड़ेगा ट्रेट डील का किसानों पर असर दिखाई पड़ेगा और फिर उसके बाद जो सियासी खेल हम आपको समझाएंगे वो आपके नजर और नजरियों को पूरी तरा बदल देगा लेकिन इसके शुरुवाद करें उससे पहले हमारी आपसे खुसारिशखड़े होकर सिर्फ आपके मुद्धे उठाते हैं इसलिए हमें आपके साथ की जरुवत है प्लीज वाटसब चैनल को सब्सक्राइब कीजेगा कॉमेंट सेक्शन में लिंक डाल दिया है स्कैन भी लगा दिया और साथ ही हमारे चैनल को कल क्या हुआ था सबसे पहले वो तीस सिकेंड में समझ लेते हैं आप जानते हैं जंतर मंतर से संसत की तरह मार्च हुआ था आसु गैस, लाठी चार्श, केड़नाट प्लीस में तोड़ फोड, F .I .R दर्श सवाल दोनों से हैं मार्च शांती पूर था तो गारियां किसने तो कहा जाता है कल जंतर मंतर को पुलिस ने खाली करा दिया उखाड दिया रात 11 बज़े 6 गंटे बाद भीड वापस लॉटी टेंट लगा मंश नया लगा और एलान की मार्च फिर से होगा पुलिस ने रात मंश उखाडा और सुबा पूरे देश ने देखा कि भाईसाब उखाडने से कोई चीज़ चोटी नहीं होती है वाइरल होती है और इस सरकार को लेकर तो वैसे भी आरूप लग रहा है कि ये सरकार समवात कम करती है एक्शन में जादा बिलीव रखती है और अब एक्शन का रियक्शन हो रहा है सरकार उकल लगा कि मामला निप� वैसे शुरुवात भी तो बेस्ती से हुई थी कौकरोच जंता पार्टी की शुरुवात कहां से हुई थी सुप्रीम टिपड़ी से कौकरोच वही ताना दिल पे लगा था और वही ताना कल भी लगा और जो अंधूलन बेस्ती से पैदा हुआ हो उसे लाठी से मारेंगे तो ह� और वैसे भी ये जेश कोई नया पैटरन थोड़ी है आप पुराना भी देख लीज़े किसी भी आंधोलन को जिसे रातो -रात हटाने के लिएकी गई अगली सुबाद दुगनी भीड भीड को हटाना आसान है वजे को हटाना मुश्किल है कल पुलिस ने भीड हटाई थी वजे छोड़ दी � कल तक जो केवल दिल्ली कहानी थी आज वो देशी कहानी बन गई।मतलब आज राची में चात सड़क पर हैं, राइपूर में बारिश के बीच प्रदर्शन चल रहा है, बिंगलोर से लेकर गुहाटी, शिलॉंग, टोरेंटो, हर जगे सपोर्ट की तस्वीरे आ रहे हैं।या हाँ आपको याद होगा 2020 की तस्वीरे शम्भू बॉर्डर पर हम सब ने देखा था लेकिन इस बार ट्रेक्टर नहीं है बसे नहीं है इस बार डीरा डालने केवल एलान नहीं है किसान घाट पर महा पंचायत होनी है चोधरी चरण सिंग साहब की समाधी पर जिस किसान के नाम � अब यहाँ पर एक तीखा सवाल वो नहीं जो किसान पूछ रहा है सबसे तीखा सवाल तो वो है जो इस डील के बारे में हर किसी को पूछना चाहिए बताया जा रहा है कि डील के तहट सस्ते अमिरकी दूद, दही, सोया और कुछ फसलों के आने का रास्ता खुल सकता है ऐसा ब अब इसमें किसानों का जो वर्जिन है वो अलग है वो कह रहे हैं कि भाईसाब साइन हो चुकी डिल ये ख़िलाफ आंदोलन मातम होता है लड़ाई नहीं दबाओ जो है वो सूर्फ है

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होने से पहले काम करता है बाद में नहीं किसान 2020 में सीख चुका है कि कानून बनने के बाद वापस कराने के लिए एक साल से जादा सड़क पर बैटना पड़ता है इसलिए इस बार � और उसे भी अन्सुना करना बेमानी है वो पूछता है क्हाथ की बोरी पर हजारों की सबसीडी उपर से खेती कमाई टाक्स फ्री इतना सब लेकर धरना अब इन सब के अलग अलग बाते हैं अलग अलग आरोप हैं और इस तबके का भी आरोप हैं फिर वही शब्दारो ये भी है कि आंदोलन का चेहरा तो दो एकड़ वाला किसान होता है पर अगली कतार में सौसो एकड़ वाले बैठे होते होते हैं जो सबसीडी का फायदा भी सबसे पहले उठाते हैं खात का स्टॉक भी पहले दबाते हैं और छोटे किसान को वही खात बाद मेहंगे दामों पर और हमारी थाली तक कीटनाशक कौन पहुचा रहा?वो भहस अलग चल रही है।अब सच क्या है?सच दोनों का थोड़ा थोड़ा है।यह सच है कि सबसीडी और टाक्स चूट किसानों के मिलती है।यह भी सच है कि देश का 85 % से अधिक किसान चोटा है।

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जोसके लिए वो सबस बड़ी गाड़ी वाला नहीं इसलिए असली सवाल ना किसान से है ना मिडल क्लास से असली सवाल सरकार से है और सवाल बड़ा सीधा है अगर डील अच्छी है तो साहब छपा क्यों रहे हो अगर डील बुरी है तो कर क्यों रहे हो कागस दिखा दो डर अपने आप मर जाएगा �डर विगेगा और डर से बड़ी कोई मंडी होती नहीं पर कागज मांगनी की लड़ाई अभी मंडी तक पहुंची भी नहीं थी कि तीसरी तस्वीर भी सामने वो तस्वीर जिसको देख कर लोगों ने कहा क्या कॉंग्रेस ने कौकरोज जन्ता पार्टी के अंधोलन को डिकोड अब तक राहूल गांधी उस आंधूलन में नहीं गए थे क्यों नहीं गए थे क्योंकि अबजीत दीप के राहूल गांधी को नापसंद करते थे राहूल गांधी के आंधूलनों का उन्होंने खोब मजाग कड़ाया था अबजीत का थोड़ा लिंग जो है वो आमादी पार्� इस मसले पर कि चात्रों के साथ मोधी सरकार ने बरबर्ता की और फिर दो पहर होते होते सीधे प्रधानमंत्री के घर के बाहर धरने पर बैच जाते हैं खड़गे के साथ प्रियंका गांधी के साथ और अब मांग होती है कि जंतर मंतर पर भले ही सक्षा मंतरी का सीफा मांगा � राहूल गांधी ने स्पश किया है जंतर मंतर का आंदोलन चलेगा वो अपनी जगापर है लेकिन वो ही आंदोलन रखेंगे उनको मनाने को श्ये चल रही है और आज दिल्ली के अंदर ही दो अलग अलग आंदोलन हो गए एक दिन में एक मुद्दे पर दो विपक्ष और दो अ-पाँच घंटे आंदोलन में गए थे।केजरिवाल आज मंश तक गए।मतलब साफ है कि कौकरोट जंता पार्टी का जो आंदोलन है वो उसका आंगन शुरू से आमादमी पार्टी के घर दूर रहो कि राजनिती से बाहर आकर कॉंग्रेस सबसे सामने आ गई हां जी, कॉंग्रेस मंच से दूर थी लेकिन अब कॉंग्रेस ने एकदम सीधा मंच पकड़ा है राजनिती के लिए सीधे PM आवास के बाहरों बैट गए और वो चाल चली है जो सधी हुई चाल है नपी त� अब आप खोड़ समझ जे की अगर राहूल गांधी जंतर मंतर जाते तो वो भी एक और चेहरा होते एक और चेहरा जो जंतर मंतर पर जा रहा था लेकिन जब वो PM के दरवाजे पर बैठे तो वो अकेली तस्वीर बन गए है और अब भीड यहां भी बढ़ेगी मुद्धा वह जंडा लगते ही आंदोलन मुद्धा नहीं रहता विपक्ष बन जाता है लेकिन सवाल हमादी पार्टी से भी है कि अब उनकी स्ट्रेजी क्या होगी क्या सारा विपक्ष एक साथ आएगा क्या कॉंग्रेस भी जाएगी या फिर धीरे धीरे जनता को दिखाई पड़ेगा कि असमय चात्रों का भला कर दो वर्ना चुनाओं में तयार बैठे इन लोग भाला लिये हाला की एक दिल्चस्प चीज़ जो हमको नजर आये राहूल गांधी जब प्रोटेस करने के लिए � कोई नहीं गया था बच्चे बहुत दिन से बैठे थे कोई नहीं गया था सोनम वांगचुक को उठाके अस्पताल भिजवा दिया गया था लेकिन सोनम वांगचुक से मुलाकात करने कोई नहीं गया था लेकिन जब राहूल गांधी बैठे तो मंतरी दोरते आये सवाल बच्� इस वीडियो का स्क्रिंशॉट लग लीजे चुनाओ के बाद इसका हिसाब करेंगे की कौन जंतर मंतर लौटा क्योंकि मरहम और वोड़ चुनाओ तक एक जैसे देखते हैं।

14:49

लेकिन फिलाल सरकार फसी है।मोधी सरकार फस गई है हला कि वो चुप नहीं है बोल रही है।आज बोला तो क्योंकि आप बहुत सारे विश्यों पर बोलते ही नहीं हो और ये तकलीफ है और ये देश चाहता है कि आप बोले क्योंकि प्रधान मंतरी अगर बोलेंगे तो उमीद जगती हो और उमीद होसला देती है उन बच्चों को भी कि शायद जैसे राहुल गांधी से मुलाकरने वो पहुंचे हो सकता आप भी मुलाकात कर लें उन बच्चों से जिनको दुबारा परिशा देने पड़ी कम से कम उन से पुलिस कह रही है उधर कि भीड हिंसक हुई थी कारवाई मजबूरी थी पुलिस � केजरिवाल जी कह रहे है अपना बच्चा लेकर हम गए थे।कुल मिला कर हर आदमी कुछ कुछ कुछ कुछ कह रहा है।अब सवाल यह है कि जब हर कोई कह रहा है तो फिर सरकार फसी क्यों है।

16:07

सरकार फसी है इस्तीफा देने को लिए।अब इस्तीफे को लेकर हमने पिछले � मंतरी देना चाहे तो भी नहीं लेती।अब सरकार की मुश्किल यही है कि अगर वो नियम तोड़े और आंदोलन से स्थीफा ले ले तो फिर हर आंदोलन में स्थीफा लेना पड़ेगा और अगर स्थीफा ना ले तो यूपी का नौजवान चुनावतर लाठी याद रखेग अलाकि सवाल फिर वही है कि आरोप लग रहा है सिख्षा मंतरी पर बात हो रही है प्रदायान मंतरी जी से मुलकात हो रही है स्वास्त मंतरी से और इन सब के बीच में संसत के अंदर भी आज विपक्ष शिकायट करता नसर हैसंसत में कहा गया कि हमें बोलने नहीं दिया गया।यह मुद्धा अज हर जगे उठा।सड़क पर, बॉर्डर पर, पीम के दरवाजे पर, अस्पताल के बिस्तर पर।

17:28

लेकिन एक जगे नहीं उ� ना अंदोलन की तरफ से, ना विपक्ष की तरफ से, हमारे तरफ से और देश के चात्रों की तरफ से।और ये सवाल मोधी जी और अमिस्चाह जी से हैं।उमीद करते हैं वो सुनेंगे।सवाल पहला है कि अगर परिक्षा का सिस्टम सच में सुरक्षित है मोधी जी, अब तक तो आप ही बताये मोधी जी की कैसे देश का चात्र उस सिस्टम पर दुबारा भरोसा करें।कुछ तो आधार होना चाहिए।यह आप बताते जी।

18:24

दूसरा सवाल जो हमारा प्रदानमंत्री नरेंद मोधी जी से है वो यह है कि जवाब मांगने वाले चात्रों पर लाठी 24 घं राहूल गांधी प्रोटेस्ट करने आपे घर के बाहर गए तो आपके मंत्री राहूल गांधी जी के पास पहुँन लेकिन चात्र 20 -21 दिनों से प्रोटेस्ट कर रहा है आप सोनम बांगचुक उठा सकते हैं आपके मंत्री मिल क्यों नहीं सकते थे लाठी मारने के बाद तो म�हमारे देश परंपरा रही है कि बड़ी नाकामी पर बड़ी कुरसी जवाब देही लेती हैं।नेहरू जी के दौर में लाल बाधो शासिस सहाब ने इस्तीफा दिया था।अटल जी के दौर में नितीश कुमार सहाब ने इस्तीफा दिया था।ऐसे में देश की सबसे बड़ जवाब जब आएगा हम वो भी दरच कर लेंगे।और उमीद करते हैं कि इन सवालों को आप जनता जो है वो बढ़ा कर सरकार के कानों तक पहुंचाएंगी ताकि उन्हें समझ में आए।

19:57

यसे हमने मुदी जी से बोलने की एपिल गी थी आज उन्होंने बोला तो अगर ही आप आज सुबे की मेडिकल रिपोर्ट कहती है कि हालत फिलाल संभी हुई है।शुगर गिरी हुई है।शरीर में ताकत के ज़रूरी तक तो कम हो गए हैं।खून की कमी हैं।डॉक्टर रोज आ रहे हैं।रोज कह रहे हैं।

20:27

ड्रिप लगवा लीजे।और वो रोज मना करते हैं बड़े लोग आ गया हैं और बड़े लोगों ने इस मामले को उठा लिया हैं।सोनम वांग्चुक कहीं पीछे चूट गया है।सवाल ये भी है कि जिस देश में सुन्वाई के लिए भूंखा मरना पड़े वहाँ संसत के माईक किस प्रकार के ओन थे?और सोनम वांग्चुकअंदोलन अब काफी बड़ा हो गया है इन लोगों से आगे निकल चुका है खेर कुल मिला कर आते हैं सीजेपी के प्रेसिडन कहते हैं मार्च होगा किसान कहते हैं बॉर्डर से हटेंगे नहीं कॉंग्रेस कह रही है जब तक अंदोलन तब तक धर्ना और सरकार अभी उसके जो आएगा कहानी फिर हम आपको सुनाएंगे कल की कहानी कल लेकिन आश की तस्वीर आप याद कर लीज़े।

21:44

नौजवान सड़क पर, किसान बॉर्डर पर, विपक्ष पीम के दरवाजे पर और सबसे शान तावास अस्पताल के बिस्तर पर संसत चालूगा सत्र हर साल आएगा त्योंकि इस देश में सबसे बड़ी ताकत लाठी नहीं है।

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