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Trump-Xi Meet: America Surrendering Its Crown Of Global Leader To China? | Akash Banerjee

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दुनिया के दो सबसे ताकतवर देश अमेरिका और चाइना दोनों देशों के राश्रपती एक बार फिर से आमने सामने. 6 महिने के अंतराल के बाद दोनों की ये मीटिंग इस बार चाइना की राजधानी बेजिंग में. लेकिन इन 6 महिनों में कुछ ऐसा हुआ है जो � Donald J Trump, दुनिया के एकलोते सुपर पावर, एमेरिका के राष्टपती, दुनिया की सबसे बड़ी और ताकत्वर मिलिटरी के कमांडर इंचीव, दुनिया की सबसे बड़ी एकानॉमी के करता धरता, वो लाए हैं चाइना में एमेरिकन बिलेनेर्स की पूरी फोज, इलॉन मस्क, एक company. दूसरी तरफ शी जिंपिंग, President of People's Republic of China, Chinese Communist Party के करता धरता Supreme Leader. Interestingly, दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी economy को लीड कर रहे हैं. शी जिंपिंग आज दुनिया के सबसे Powerful Communist Leader भी हैं. आईरोनी तो देखिये. आज दुनिया के सबसे बड़े capitalist इनके सामने line लगा कर खड़े जी और ट्रम्प की मीटिंग से ये तस्वीरे देखी हैं।कुछ चीजे साफ बया होती हैं।ट्रम्प की बॉड़ी लैंग्विज्ज से साफ दिख रहा है कि इस बार असली कार्ड्स किसके पास हैं।ग्लोबल एकानॉमी आज किसके भरोसे चल रही है और दुनिया में आज � चाइना को अच्छी तरीके से मालूम है कि ट्रम्प को लॉली पॉप बहुत पसंद है कुद्धे भाधे बच्चे बहुत पसंद है तो ट्रम्प को भी खुश कर दिया जी नेलेकिन Optics की दुनिया से बाहर चाइना भी जानता है कि ट्रम्प यहां क्यों आया है अपने साथ भरभर कर CEOs क्यों लाया है क्योंकि आज पत्ता आज हर मामले में टैरिफ तो दूर की बात है चाइना के बिना अमेरिका का काम आज नहीं चल पाएगा اہمیت اور امریکہ کے ڈوپتے سورج کو خوب اچھی طریقے سے سمجھتے ہیں. اسی لئے ایک صدی میں ہونے والے بدلاف کی وہ بات کر رہے ہیں. और पिछले दो महीनों से चल रहा यूएस इरान युद इस बदलाफ को और तेज कर रहा है. जाहिर सी बात है कि अगले एक दो दिनों में चाइना और अमेरिका दोनों इस मीटिंग को अपनी अपनी जीत बताने की कोशिश करेंगे. साब अपना तामबाध चमकाएंगे. लेकिन अगर इस मीटिंग को आपको समझना है और ये देखना है कि अमेरिका के सिरस से ताज, ये आपको hard numbers, आकडे देखने पड़ेंगे. Economy हो या Military, Trade हो या Technology, चाइना आज हर मामले में काफी आगे निकल चुका है. कुछ मामलों में अभी वो America के पीछे जरूर है, लेकिन आज वो position of strength से negotiating table पर बैठता है. वो ये बात जानता है और अब वो चाहता है कि ये बात पूरी द� इस समिट में असली बार्गेइनिंग चिपता है।किसके पास है?

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कौन जादा desperate है डील्स के लिए?क्या है चाइना की मजबूती का राज?और अगर चाइना सच में अमेरिका के आगे निकल चुका है तो इसका impact भारत पर क्या पड़ेगा?बहुत से क्रिटिक्स ने पहले ही कह दिया है कि ट्रम्प इस बार चाइना आए है लग रहा है कटोरा लेकर के भाई चाइना के मार्केट का एक हिस्सा हमें भी दे दो बोईंग से कुछ प्लेंज तुम भी ओर्डर कर लो चाइना हम से थोड़ा सोया बीन खरीद लो चाइना की आगे निकल गया है।पेटेंट से शुरू करते हैं चाइना में फाइल की गई वालिड इन्वेंशन पेटेंट की संख्या आज दुनिया में सबसे जादा है 5 .32 मिलियन दुनिया में पहला देश जो पांच मिलियन मार्क क्रॉस कर चुका है पेटेंट के मामले में इसमें 60 % पेटेंट स्ट्रिटी� तो चाइना के पास गलोबल टोटल का 60 % हिस्सा है भारत में हम AI की बाते कर रहे हैं चाइना में पेटेंट्स फाइल हो रही है इसके एलाबा आपको डीप सीख तो याद होगा एक चोटे से चाइनी स्टार्ट अप ने बिना इनवीडिया के बेस्ट इन क्लास चिप्स का उप्योग करके चैट जीपीटी से भी एफिसियंट AI मॉडल लॉंच कर दिया था इस एक मोमेंट ने पूरी दुनिया का ध्यान च AI companies hain. Unki core AI industry 1 .2 trillion yaun hai.अबाउड 175 बिलियन डौलर से जादा हो चुकी है।

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चाइना में आज जेनेरेटिव AI यूजर्स 602 मिलियन से भी जादा हो चुके हैं।जोकी US की टोटल पॉपिलेशन से भी जा� AI के आगे अगर हम बढ़ें तो चाइना हर साल ग्लोबली दो तिहाई, दो तिहाई रोबॉट पेटेंट्स फाइल करता है।बेजिंग की एक कमपनी Unitary Robotics आज दुनिया की सबसे बड़ी Humanoid Robot Maker है।US Congress ने कुछ समय पहले इस कमपनी को National Security Threat डिकलेयर कर दिया।इसी Unitary का Robot भारत में भी उसने सुर्खिया बटोरी जब गलगोटिया University के एक प्रोफेसर ने कहा कि ये तो इनके कॉलेज में बनाया गया है।इसके एलावा, Quantum Computing के फील्ड में चाइना ने हाल ही में Tianyang 504 लॉंच किया है जो दुनिया का सबसे Powerful Quantum Supercomputers में से एक है. Satellite Technology में भ Reusable, अगर आप Rockets की बात करें, तो उसमें भी चाइना तेजी से आगे बढ़ रहा है, SpaceX को मात देने की कोशिश कर रहा है. हाँ, Advanced Semiconductors में चाइना अभी भी थोड़ा US से पीछे है. TSMC, NVIDIA जैसे Manufacturing Capability अभी भी चाइना के पास नहीं है. और Trump, NVIDIA के CEO को इसी लिए अपने सा� बार्गेनिंग चिप इस्तमाल करना चाहते हैं कि चाइना से कुछ डील हो जाये लेकिन जिस हिसाप से चाइना आरेंडी में यूएस को पीछे छोड़ रहा है हर साल एक ट्रिलियन से जादा पैसे लगा रहा है वो जल्द ही एनवीडिया से भी बहतर चिप्स बनाना शूरू क

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Technology edge का आभास हो रहा है लेकिन सबसे जादा बदलाव पिछले एक साल में आया है चाइना का Military के शेतर में अपना सीना चोड़ा करना चाइना ने सालों से Technology के साथ साथ Military में निवेश किया था एक दशक में वो आत्मनिरभर बन गया अपने weapon systems में पहले चाइना ने ये सारा काम ब चाइना को अगर अपने हतियार दूसरे देशों को बेचना था तो पहले उसे इसे युद में टेस्ट करना था इसे वार प्रूवन बताना था और इसके लिए उसने भारत पाकिस्तान के बीच में घमासान को सिंदूर के बाद वाले घमासान का इस्तमाल किया चाइना ने अप दुनिया ने जो देखा उससे सब दंग रहे गए चाइना ने जो शोकेस किया वो तो अपने आप में एक पूरी दुनिया के लिए मेसेज था लेकिन चाइना ने जो नहीं दिखाया वो दुनिया के लिए उससे भी जादा और खासकर कि भारत और अमेरिका के लिए उससे भी जादा बड़ी सिर्दर्दी साबित हो सकती है यहां और फिर आता है US - Iran का वार जहां चाइना ने फिर से पीछे से खेल कियासे लड़ते लड़ते अमेरिका के महेंगे थाड इंटरसेप्टर्स पचास परसेट से जादा खतम हो गए पेट्रियट स्टॉकपाइल डिपलीट हो गई टॉमाहॉक मिसाईल जो क्रूस मिसाईल है एक साल के प्रोक्रियॉर्मेंट से दस गुना जादा फायर हो � और आज दोनों देश बंद कमरों के पीछे टाइवान को लेकर बातचीत कर रहे हैं।यह बात किसी से चुपी नहीं है कि चाइना एक दिन आज नहीं तो कल टाइवान को निगल लेगा और ये वो बिड़ा एक गूली चलाए करना चाहता है और इसमें अगर वो अमेरिका को र अब अमेरिका आज भी दुनिया का सबसे बड़ा मिलिटरी पावर है।औन पेपर सबसे ताकतवर नेवी कमांड करता है।औन पेपर चाइना पीछे जरूर है।लेकिन बहुत पीछे नहीं है।

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कुछ मामलों में, जैसे ग्राउंड बेस्ट मिसाईल में, हाईपर सौनिक US Troops aur Hardware Battle Tested. जंग के दोरान जंग चल रहा हो, अमेरिका का असला या बारूत कहीं न कहीं इस्तमाल हो रहा है।चाइना इस मामले में अब पीछे था लेकिन पाकिस्तान, इरान, यूक्रेन जैसे थियेटर्स में अपने हार्डवेर को टेस्ट करने में अब वो पीछे नहीं ह� और उधर अमेरिका तो अपने आईलाईस को दुश्मन बनाने में कोई कसर छोड़ नहीं रहा. ओन पेपर की बात हो रही है तो चाइना आज दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी एकानॉमी है ओन पेपर. नॉमिनल जीडिपी देखें तो 30 ट्रिलियंड डौलर्स के साथ यूएअगर हम बात करें तो अमेरिका साल का 94 ,000 डॉलर पर कैपिटा कमाता है एक अमेरिकन और आज भी एक चाइनी सिर्फ 15 ,000 डॉलर कमाता है और अगर इंडिया के मुकाबले ये पां� China रुकने का नाम नहीं ले रहा है अगर आयमेफ डेटा की हम बात करें तो अमेरिका की एकानूमी हर साल करीबन 2 .5 प्रतिशट की रेट पर बढ़ रहा है वोही चाइना की एकानूमी 5 .5 % की रेट से हर साल बढ़ रहा है मतलब चाइना अभी भी अपने स्लोडाउन के बाद भ चाइना नी यही space continue किया तो nominal GDP के मामले में भी अगले 15 सालों में चाइना अमेरिका को मात दे देगा बराबरी कर लेगा equal कर लेगा अपनी economy और अगर हम पर्चेजिंग पावर पैरिटी या पीपीपी के हिसाब से कैलिकलेट करें तो चाइना ने अमेरिका को दस साल पहले ही पीछे चोड़ दिया था. आज पीपीपी के हिसाब से चाइना की जीडिपी 40 ट्रिलियन डौलर की है और वो ही US की 30 ट्रिलियन पर है. पर्च पूरे दुनिया को सामान आज चाइना बेचता है चाइना ने 2024 में 1 ट्रिलियन का ट्रेट सरपलस अचीफ कर लिया हिंदी में बोले तो पूरी दुनिया को सामान बेच रहा है बदले में जाधा कुछ खरीद नहीं रहा है और इसी के बदॉलत चाइना ट्रम्प के टैरि� Donald Trump चुपचाप खुदी टेरिफ वापस ले लिए चाइना पर यही वचे है कि ट्रम्प इस बार इतने सारे CEOs के साथ बेड़ा है।एमेरिका के लिए और डील्स सिक्यौर करने के लिए. क्योंकि एमेरिकन एकानौमी को चाइनीज मार्केट चहिए, चाइनीज इन्वेस्मेंट चहिए, और एमेरिकन कंपिनीज को चाइनीज सरकार का कॉर्पेरेशन चहिए अगर एमेरिका आज चाइना को अर्थवेवस्था, टेकनॉलॉजी, सेन्यशक्ती के मामले में टक्कर भी दे सकती है लेकिन एक जगह है जहाँ एमेरिका खुद जानती है कि वो जंग हार चुकी है और मैं बात कर रहा हूं मैनिफैक्ट्शरिंग की चाइना दुनिया की 30 प्र सेक्टर में जिसके बिना दुनिया की कोई भी एकाणूमी आज रुख जाएगी भारत समेध और चाइना सबकुछ बनाता है लिटरली सबकुछ कंस्यूमबल से लेकर एलेक्ट्रॉनिक से लेकर कपडों से लेकर गाणियां दवाईयां स्टील यू नेमिट चाइना मेक सेट और ये जो ट्रम्ब के साथ बेजिंग गए हैं, इलॉन मस्क, टिम कुक, जेनसेन हुआंग, इनके बिजनिस का एक बड़ा हिस्सा भी चाइना की मैनिफैक्ट्रिंग पर ही टिका हुआ है. आपल के आईफोन्स इंडिया में बनने शुरू हुए हैं, लेकिन अभी भी 70 -75 % एस जी के खिलाफ एक शब्द नहीं निकलता है मस्क का. कुछ क्रिटिकल सेक्टर्स हैं जहां चाइना की डॉमिनेंस कुछ जादा ही है जैसे सोलर पैनल्स. चाइना गलोबल प्रड़क्शन इन सोलर पैनल्स का 80 % कंट्रोल करता है. एलेक्ट्रिक वेहिकल्स की अगर मात करें 2025 मेंसे जादा EVs अकेले चाइना में बिखे. EV Batteries में Chinese Companies के पास 70 % Global Market Share है. आज Mercedes भी Chinese EV Battery पर ही चलती है. लेकिन चाइना के Manufacturing का सबसे बड़ा हतियार है Rare Earths ये वो Minerals हैं जो हर Advanced Technology में इस्तमाल होते हैं Fighter Jets, Missiles, Smartphone, EV Motors, AI Chips, Submarines सबकुछ एक F -35 एमेरिका का Gaurav, Stealth Fighter Jet उसमें 900 पाउंड का Rare Earth Elements जाते हैं एक Naval Destroyer में 5200 पाउंड ये आता कहां से?चाइना से और इन Rare Earths की Processing Almost Exclusively चाइ 90 % से जादा सप्लाइस चाइना अकेले कंट्रोल करता है।

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पिछले साल ट्रम्प के टैरिफ के जबाब में चाइना कुछ आग बबूला नहीं हुआ।कोई लेजर आईज नहीं दिखाया।कोई बयावाजी नहीं की।बस अपने रेर सप्लाइ को लिमिट करना शुरू कर दिय पिछले साल ट्रम्प और जी जब फुसान में मिले थे तो चाइना एक साल तक यूएस की रेर अर्थ सप्लाइ फिर से चालू करने के लिए मान गया।और अब इस समिट में एमेरिका इस एक साल के विंडो को और एक्स्टेंड करने की मांग करने आया है।इरान वार के बाद � आईरोनी की बात ये है कि जो मिसाईल और इंटरसेप्टर का इस्तमाल हुआ जो रेडार्स ध्वस्थ हुए वो सब करने में चाइना का बहुत बड़ा हात था अब गजब की फकीरी है कि जो तबाख किया वो चाइना ने किया जो रीबिल्ड करेगा उसमें भी चाइना का ही हा परनल्ड ट्रम्प के आते लगता है चाइना को एक मौका मिल गिया है अपने शक्ती प्रदर्शन करने का

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कुछ समय से वो पावर प्रजेक्शन करना शुरू कर चुका है अपनी डिपलामॉसी से अपने डिफायन्स से अभी हाली में अमेरिका ने चाइनीज कंपिनीज पर सैंक्शन्स लगा दी है इरान सरेंडर नहीं किया चाइना ने डोमेस्टिक ब्लॉकिंग रूल इनवोक कर दिया और चाइनीज कमपनीज को बोला की यूएस सैंक्शन्स मानने की कोई जरूरत नहीं यूएस सैंक्शन्स फॉलो करते पकड़े गए तो हम तुमारे उपर सैंक्शन्स लगा देंगे ये पहल US को challenge करना शुरू कर चुकी है. Mark Zuckerberg की जो Meta Company है, उसने एक AI कमपनी Manus खरीदने की कोशिश की. अब भले ही एक Singapore based company थी, लेकिन इसके founders Chinese थे. बस फिर क्या था?China ने National Security Concerns बोलकर इस Acquisition को ब्लॉक करवा दिया. अब आप इतने सालों से Huawei को US में ब्लॉक करके बैठे हो तो चाइना ने कहा आओ अब हमारी बारी है. US -China rivalry के बाहर भी चाइना ने बीते 10 -15 सालों में दुनिया भर के देशों के साथ अपनी एक साटगाट बना ली है, एक understanding बना ली है. Global South में उसने कई लोन्स दिये हैं, कई � अपना फुट्प्रिंट पूरे दुनिया पर लगा रहा है।उदह डॉनल्ड ट्रम्प बीते एक साल में नए दोस्त तो बनाना छोड़ो एकजिस्टिंग जो एलाइज हैं उनसे लड़ाई करके बैठे हैं।कभी यूके को गाली बक रहे हैं, कभी जर्बनी को, कभी कैनेडहाथ मिलाते हुए दिखा. कैनेडा के मार्क कारणी हो या एउ के वांडर लायन हो या फिर नरेंदर मूदी हो. अमेरिका से धोका खाने के बाद ये सारे देश बेजिंग के पास ज ये सारा बदलाव धीरे धीरे से काफी टाइम से चल रहा था लेकिन अब इरान वार के बाद ये बदलाव काफी तेज हो गया है क्योंकि वेस्टन कैम्प में जो डिविजिन्स हैं वो जादा क्लियर हो चुके हैं US कहता है कि वो टाइवान इंडिपेंडेंज को सपोर्ट नहीं करता है चाइना चाहता है कि एमेरिका ओफिशली ये कहे कि वो जो टाइवानीज इंडिपेंडेंज है उसको अपोस करता है साथी में चाइना चाहता है कि ट्रॉम्प टाइवान को वेपिन सप्लाइ करना बंद करें आर्म्स ट्रांसफर डिले करें और सेमी कंडक्टर्स पर जो अमेरिका ने एकस्पोर्ट कंट्रोल लगा कर रखा है वो हटा दिया जाएं. दूसरी तरफ ट्रॉम्प की जो डिमांड् सोया बीन खरीद ले, बोईंग से दो चार एरप्लेइन खरीद ले. इसके एलाभा वो चाहते हैं कि इरान को एमफ़िसाइज करें कि स्ट्रेट ओफ और मूस खोल दिया जाएं कि चाइना प्रेशर बनाएं. मने दुनिया का वर्चस फंडिरेशन नंबर वन वो प्रेशरhai. Filhal America ki military alliance network, Japan, South Korea, Australia, Philippines, NATO, poori duniya mein iska koi match nahi hai. Dollar ki dominance abhi bhi hai. Wo abhi bhi strong hai. China usse bhi maat deni ki koshish kar raha hai. Semiconducted design me America aur Taiwan, US backed ekosystem hai, abhi bhi China ko challenge kar raha hai. Per capita living standards, individual freedom, in saare parameters par America abhi bhi China se aage hai. Lekin China jis growth trajectory par badhe chala hai dashakon se, उसे देखकर तो यही लग रहा है कि इन parameters में अभी वो America को over take करने में जाधा समय नहीं लगाएगा. याद रखेगा सिर्फ 30 से 40 सालों में खुद एक poor developing country से almost the world's superpower बन गया है China. Manufacturing में आगे, Trade में आगे, Renewable Energy में आगे, AI Patents में आगे, Rare Earth और Critical Minerals में monopoly तक बना ली है. अब Military भी � 40 साल पहले भारत काई माइनों में चाइना से आगे था. 90 के दशक में एकॉनमिस्ट कहा करते थे कि भारत चाइना से आगे निकल जाएगा. लेकिन आज हम बठवारे और नफरत के डलडल में फसते जा रहे हैं और चाइना अमेरिका से लोहा ले रहा है और जीत भी रहा है. इत कि आज नहीं तो कल असली किंग कौन है?

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