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Turkey Joins Saudi-Pak Defence Alliance | Should Rise Of ‘Islamic NATO’ Worry India? |Akash Banerjee

The Deshbhakt18 views
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इस हफते मक्का शहर में सोडी अरेबिया, पाकिस्तान और तुर्किये के नेताओं ने एक जोइंट डिफेंस अग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किया।MECCA Joint Defense Agreement के तहट अब इन तीनों देशों में किसी भी एक देश पर अगर हमला होता है तो इसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा. ये महत्पूर इसलिए है क्योंकि मिडलीस्ट में एक NATO जैसा Military Alliance जो कि पिछले साल बनना शुरू हुआ था अब और भी बड़ा होता दिख र आपको डीटेल में देशभक्त पर बताया था इस एपिसोड में. आज लगभग एक साल बाद मिडलीस्ट में जंग के बीच इस अलायंस में तुरके जैसा बड़ा और महत्तपूर देश शामिल हो रहा है. भारत के लिए ये डेवलप्मेंट काफी महत्तपूर है. एक तरफ पाकिस्तान इस शेत्र में Net Security Provider बनता दिख रहा है. US -Iran युद के बीच में वो Mediator के तरह भी उभर कर बाहर आया. वहीं भारत के लिए कहीं न कहीं Muslim देश उससे और दूर जा रहे हैं. अभी तक इस Alliance में अगर पाकिस्तान था तो एक भारत का करीबी Saudi Arabia भी था. लेकिन अब इस alliance में anti -India forces का डबडबा बढ़ने लगा है तुर्के पहले से ही कश्मीर के मुद्दे पर openly anti -India stance ले चुका है और अब operation सिंदूर में उसने पाकिस्तान को अपना समर्थन और हतियार दे कर अपनी वन्शा साफ जाहिर कर दी थी तो जब पाकिस्तान, सौडी � क्या ये Alliance चाइना के आशिरवात से बना है यूसे और इंडिया को काउंटर बैलेंस करने के लिए या ये फिर सिर्फ इरान या इसरेल से बाकी देशों को बचाने के एक तरकीब है?

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क्या अगर अब इरान सोडी के ओयल फील्ड्स या यूस के बेसिस पर अटाक करेगा तो उसेया तुर्के बचाने आएगा?क्या पाकिस्तान इस डील के बाद अपनी नूक्लियर वेपिन्स अंब्रेला सौडी अरेबिया और तुर्किये के लिए एकस्टेंड कर देगा?हमारी कहाणी शुरू होती है 7 अक्तूबर 2023 से ये वो दिन था जब हमास ने इसरेल पर एक हातक आतंकी हमला किया एक नई जंग की शुरुवात होती है उसके बाद जो हुआ पूरी दुनिया ने देखा इसरेल ने आतंक का जबा पूरे नर्थ संगार से दिया पूरे घाजा स् लीड निगोशियेटर को मार घिराता जिससे बाचीत रुख जाती क्योंकि असली मकसद था नरसंघार जारी रखना ऐसी ही एक स्ट्राइक होती है हमास के निगोशियेटिंग टीम पर 9 सितेंबर 2025 को पस फर्क इस बार ये था कि इस बार हमास के टीम को घाजा में या इरान में पूरे दुनिया ने इसरेल के इस हरकत की कड़ी निनदा की।ये स्ट्राइक अपने आप में इस पूरे रीजिन के लिए एक टर्निंग पॉइंट बन जाता है।क्योंकि इसके बाद Gulf states को समझ में आ जाता है कि अगर इस्रेल से बचने के लिए खुद कुछ नहीं किया तो अगला हमला उनके देश में भी हो सकता है और America जो अब तक इस region में इस शेत्र में Net Security Provider बन कर बैठा था वो भी इस्रेल के खिलाफ एक उंगली तक नहीं उठाएगा

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अपनी सुरक्षा के लिए फिर साऊधी अरेविया ने पाकिस्तान के साथ उसी महिने एक मिलिटरी अलायंस पर हस्ताक्षर कर दिये।हाला कि इस डील के डीटेल्स आज तक पबलिक में नहीं दिये गए हैं लेकिन हम इतना जरूर कह सकते हैं कि ये एक नेटो टाइप कलेक्ट दूसरे पर भी हमला माना जाएगा।बाद में पाकिस्तान के डिफेंस मिनिस्टर ने इस डील के अंदर न्यूक्लियर प्रोटेक्शन क्लॉज के होने से इंकार नहीं किया।

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मतलब जरूरत पड़ने पर पाकिस्तान अपने न्यूक्लियर वैपेंज भी साउडी अरेबिया को अटेक करना शुरू कर दिया एक बार फिर से इन देशों का नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर अमेरिका उन्हें बचाने में बिलकूर नाकाम साबित होता है बाकी देश तो छोड़ो यूएस खुद अपने आप को भी इरान के इस हमले से बचा नहीं पाता है 40 एरक्राफ्ट ये सब देख मिडलीस्ट में एक और बड़ी लोकल सेक्यॉरिटी अलाइन्स की जरूरत लोग जादा महसूस करने लगे मार्च में तुरके ये पहल करता है।

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उसके फावरेण मिनिस्टर पाकिस्तान और सौडी के फावरेण मिनिस्टर से मिलकर इसलामिक नेटो को इक्सपैंड करने की इच्छा जाया करते हैं।महिनों तक चली डिसकशन्स और नीगोसियेशन के बाद फाइनली इस हफते साथ अ� जो देशों पर आम्ड एगरेशन माना जाएगा।पाकिस्तानी फ़ौरें मिनिस्ट्री ने इसे इसलामिक सॉलिडारिटी और ब्रदर्हुड का नर्वाद करें।बताया जो तीनों स्टेट्स के शेर्ड स्ट्रिटीजिक इंट्रिस्ट और लॉंग्स्टेंडिंग डिफेंस कोर्परेशन पर आधारित होगा।

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इसमें कोई डौउट नहीं भारत के तरफ थी।ओब्जेक्टिवली देखा जाए तो ये डिफेंस ट्रीटी तीनो देशों के लिए विन -विन डील है।दशकों से नेटो मेंबर रहा तुर्के अपने साथ लाता है वर्ल्ड क्लास आर्मी, स्टेड ओव धी आर्ट, ड्रोन टेकनॉलॉजी, महीं साऊध रिपोर्ट्स की माने तो ये इसलामिक नेटो सिर्फ इन ही तीन देशों तक सीमित नहीं रहने वाला है।

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जल्द ही इसमें इजिप्थ, कतर, Syria, UAE भी शामिल हो सकते हैं. हाला कि हर देश के अपने कमपल्शन्स और कॉंप्लिकेशन हैं. एजिब्ट अपनी एकनॉमी को स्टेबिलाइज करने में, डोमेस्टिक अप्हीवल को अवाइड करने में जुटा हुआ है. सिरिया अपने 13 साल लंबे सिविल वार के बाद रीक लेकिन ये भी सच है कि पिछले एक दशक से गल्फ कंट्रीज का अमेरिका की सिक्यॉरिटी गैरेंटीज पर यकीन कम होता जा रहा है और इस इरान युद ने इस भरोसे को चूर चूर कर दिया है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि जिस तरीके से अमेरिका ने इस वार को हैंडिल अपने इतने सारे Military Assets मिडलीस्ट में होने के बावजूत, वो Straight of Hormuz आज तक कम से कम इस एपिसोड को रेकॉर्ट करते वक तो ना खुलवा पाया और अपने Allies को परियाप्त Air Defenses भी नहीं देने के लिए।क्योंकि सबको सच मालूम है जादा तर म्यूनिशन्स इसरेल भेज दिये गए थे इसरेल को बचाना जरूरी था गल्फ स्टेट्स जाए भाड में अब यही जो गैप है वो साउडी रेबिया, तुरके, पाक इस डील को एक जियो पुलिटिकल शिफ्ट की तरह देख रहे हैं।

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उनका कहना है कि मिडलीस्ट की Power Dynamics इरान वार के बाद दोबारा लिखी जा रही है।

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क्योंकि मुसलिम देश ये मान चुके हैं कि अब उनकी Security को वो US -Israel और इरान ये जो Rivalry है इसके रहमो करम पर वो नहीं � सवाल यहाँ ये आता है कि जंग का असली खटरा तो इन देशों को इरान से है।अरे माना कि US उन्हें बचाने में नाकाम रहे लेकिन एटैक तो इरान ने किया।State of Hormuz भी इरान नहीं तो ब्लॉक करके रखा है हाँ US के उकसाने पर ये सब हुआ है लेकिन किया तो ये सब इरान में हैं तो क्या ये Alliance US को replace करने से जादा इरान को पीछे ढखेलने के लिए बनाया गया है याद रखे यहाँ एक और सुन्नी शीया conflict भी है क्या सुन्नी मुसल तो क्या असल में ये Alliance इसलामिक NATO की जगे सुन्नी NATO बन रहा है?एटलीस्ट इजरेल का यही मानना है इजरेल इस एलाइन्स से बिलकूल खुश नहीं है इजरेली लीडर्शिब बीते कुछ महीनों से साफ कर चुके हैं कि तुर्के अब उनके लिए नया इरान बन चुका है मने अगला निशाना उनका अल्रेडी सेट हो चुका है कि अब तुSunni Axis का जिकर किया है बिना clearly define किये कि उनका मतलब क्या है।लेकिन एक सच ये भी है कि Saudi Arabia और पाकिस्तान की Mutual Defense Agreement Pact वो इरान के युद से पहले ही उस पर हस्ताक्षर हो चुके थे।

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तो फ क्या इस ट्रीटी में कोई ऐसा क्लॉस चुपा है जो इरान के केस में अपलाई नहीं होता है कि बाकी देश अटैक कर ले कोई दिक्कत हो जाएगे लेकिन इरान एक्जेम्ट है या फिर इस ट्रीटी में कलेक्टिव डिफेंस का मतलब अभी सिर्फ इंटेलिजन्स शेरिंग औ तो फिर ट्रीटी क्यों बनाया था आपने?

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सबको पता है कि इजरेल कभी भी सीधा सोडी या तुर्की या पाकिस्तान तीनों मेंसे किसी पर डिरेक्ट हमला तो नहीं करेगा. सोडी के पास पूरी दुनिया की ओयल सप्लाइ है, पाकिस्तान के पास नुकलेर वैपन है और तु पहले से ही नेटो का मेंबर बैठा हुआ है उसे इस्रेल से बचाने के लिए 33 देश खड़े हो जाएंगे नेटो के अच्छा मान लेते हैं US नहीं आता है तब भी नेटो के 32 देश होंगे जो उसके साथ खड़ा रहेगा क्योंकि ये नेटो की ट्रीटी में साइंड इन है बेक यही से कहानी में एंट्री होती है एब्रहेम अकॉर्ड्स की और US प्रेज़ेडेंट डॉनाल्ड ट्रॉम्प की और उनके दादागिरी की. ट्रॉम्प लंबे समय से चाहते हैं कि साउडी अरेबिया भी इस्रैल के साथ संबंद को नॉर्मलाइज कर ले, इस्रैल को पूरी मान इसरेल की करेंट सरकार इस शर्ट को मानने के लिए बिलकुल तैयार नहीं है

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वो तो कह रहे हैं कि वाट पैलेस्टिन इन नु देरेज नो पैलेस्टाइन एट आल।पैलेस्टाइन आस नो राइट टू एकजिस्ट।और इसी लिए मामला सालों से फसा हुआ है।

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� सीधा सीधा कहा कि जंग खतम होने के बाद जो देश अभी एब्रहम अकॉर्ड्स का हिस्सा नहीं है उन्हें इस्रैल के साथ संबंद नॉर्मलाइज करना होगा।

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� और अमेरिका की दादागेरी यहीं खतम नहीं होती है।

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जुलाय में ट्रॉम्प ने यहां तक कह दिया कि US -Saudi Arabia civil nuclear deal भी Saudi के Abraham Accords जॉइन करने पर निर्भर करता है।

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मतलब अगर Saudi Arabia इस्रेल के साथ ties normalize नहीं करेगा तो उसका अपना nuclear energy deal भी अटक सकता है।नितिन याहू ने और तो ये डील ना तो एंटी इरान है और ना ही एंटी इस्रेल है इस डील के निशाने पर है अमेरिका जो मिदलीस्ट में बार बार दखलंदाजी करने के आदत से बाज नहीं आता है एसे में ये नया मिलिटरी ब्लॉक गल्फ देशों को खासतोर पर सौडी को एक बफर देता है कम से कम सिग्नल तो ये दिया जा रहा है कि हमारे पास और भी रास्ते हैं हमारे पास और भी आप्शन है पौपौ अमेरिका को छोड़ कर हमारे देश में एक बहुत पुरानी कहावत है रस्सी जल गई लेकिन बल नहीं गया आज मिडल इस्ट में युएस की हालत कुछ एक

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ही है।इरान से इतनी बुरी तरीके से हारने के बाद भी ट्रम्प अंकल ऐसे बिहेव कर रहे हैं जैसे वो विश्व विजेता हो।

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अपने एलाइस को बचाने में इतनी बुरी तरीके से लेकिन सच तो ये है कि अमेरिका अभी तक ना तो ठीक से इस जंग से बाहर आ पाई है और ना ही मिडलीस्ट में अपने आलाईस के लिए स्ट्रेट अफ हॉर्मूस को खुल वा पाई है. कहने को तो US और इरान के बीच में सतरा जून को सीसफायर हो चुका था और स्ट्रेट अ बीस बार थो खोल ही चुका है डिकलेयर कर ही चुका है लेकिन असल में सीसफायर होने के 15 -20 दिनों के अंदर अंदर ही वार वापस से आक्रविक रूप से शुरू भी हो गया था स्ट्रेट अफ हॉरमूस में ट्राफिक अभी तक नॉर्मल नहीं हो पाया है हाला की बीते एक हफते में यानी 29 जुलाई से आज इस एपिसोड को रेकॉर्ड करते वक्त किसी भी नए एटाक की ख़बर नहीं आई है लेकिन आभी सकती है. फिलहाल इरान और ओमान स्ट्रेट अफ हॉरमूस को लेकर एक नई डील पर बाचीत कर रहे हैं. दोनों देशों के एक बार फिर से सौडी बैक्ट फोर्सेस पर हमला करना शुरू कर दिया है. इस हफते हुए हमलों में उन्होंने अभी तक सत्रा से जादा मिलिटरी परसुनेल मार दिये हैं. इसके एलावा सौडी कोईलिशन ने सालों बाद फिर से एर्स्ट्राइक्स भी शुरू कर दिये हैं Babal Mandap Strait का हाल भी कुछ बहतर नहीं है।Houthis ने पिछले महिने साउडी शिपिंग पर ब्लोकेड डिकलेयर कर दिया और कमेर्शियल वैसल्स पर अटैक करना भी शुरू कर दिया।एक भारतिय जहाज पर भी इस बीज बबल मंदाब में उसे डुबा दिया गया है।हाला कि उस

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स्ट्रेट ओफ हॉर्मूस के साथ साथ बाबल मंदाब स्ट्रेट दुनिया के मुख्य शिपिंग रूट्स में से एक है पहले यहां रोज सब्टर से जादा शिप्स गुज़रा करती थी अब पीज से भी कम रह गई है मतलब हॉरमूज में अभी थोड़ी नॉर्मल सी आने के संकेत हमें दिखने शुरू हुए थे कि रेड सी का दूसरा चोकपॉइंट पूरी तरीके से नए कॉंफलिक्ट के तरफ जाता दिख रहा है।

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तो दुनिया के लिए बुरे दिन अभी खतम नहीं हुए है।फा� एक देश है जिसने US -Iran युद के बीच में अपना advantage ढूंड लिया आपदा में अफसर निकाल लिया जितने बुरे दिन हो लेकिन उनमें से अच्छे दिन खीच निकाले. अरे ये एडिटर यहां मुदी जी की बात नहीं हो रही है अरे बारा सालों में तो अच्छे दिन ना यहां बात हो रही है पाकिस्तान की अभी कुछ साल पहले याद करिये इसी पाकिस्तान को अरे लोन्स के लिए डिफॉल्ट पर डिफॉल्ट कर रहा था सौडी और बाकी देशों के सामने कटोरा लेकर खड़ा हुआ था टेरर फंडिंग के मामले को लेकर यूएं इसे ब्लैकल और आज ओपरेशन सिंदूर के बाद वोही पाकिस्तान यूस इरान क्राइसिस के बीच में अपनी छवी ऐसा मीडिएटर के रूप में ढाल रहा है।

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मिदलीस्ट में नेट सिक्यॉरिटी प्रोवाइडर बन रहा है।इरान वार में सीसफायर निगोसियेशन्स के लिए � पाकिस्तान को इक्सपोस करना उसे इंटरनेशनली आइसोलेट करना लेकिन ये सब जब जैसंकर जी ने देखा तो पाकिस्तान को दलाल बोल दिया कभी कभी तो शक होता है कि जैसंकर जी सेंस डिफन्स कॉलेज्ज से सची में पढ़े हैं की नहीं एडिटर इनका डिग्री निहै जिनोंने एक सौडी लेड मुल्टी नेशनल मेराटाइम डिफेंस अलायन्स को भी सपोर्ट किया है जिसका मकसद है बबल मंदाब स्ट्रेट और रेड सी के शिपिंग रूट्स को प्रोटेक्ट करना और भारत क्या कर रहा है हमा हमारे जो मिडलीस्ट एलाइज हैं वो एक एक करके पाकिस्तान के खेमे में चले जा रहे हैं हम हाथ पर हाथ धरे बैठे हुआ हैं हम उन्हें धक्का दे रहे हैं हम उनको धखेल रहे हैं कहे रहे हैं नहीं नहीं नहीं तुम जाओ तुम पाकिस्तान के साथ जाओ वही तुम ब पॉपो मिल गया है जिसके बाद हमें और किसी की जरूरत तो है नहीं अभी इसी हफते प्रधान मंतरी मोदी और इस्रेली प्राइम मिनिस्टर बेंजमिन नेतिन याहू के बीच में एक और फोन कॉल होता है जिसमें इंडिया इस्रेल स्पेशल स्ट्रेटीजिक पार्टनरशि मतलब जब पूरा इस्लामिक ब्लॉक अपनी खुद की सिक्योरिटी आर्किटेक्चर बनाने के लिए पाकिस्तान के पास जा रहा है हम अपना नॉन अलाइंड्स जो स्टांस है उसे छोड़कर इसरेल की जी हजूरी कर रहे हैं।उनके सबसे बड़े सेक्यॉरिटी थ्रेट को गले लगा रहे हैं।सोचो एक ऐसी देश के लिए हम ये सब कर रहे हैं जो दुनिया भर में एक पराया स्टेड बन चुका है।यॉरोप, अफ्रिका, गल्फ सब कोई नखार चुके हैं इसरे भारत इस्रेल के साथ खड़ा हुआ है

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जब ऐसा आप करोगे तो मुसल्मान देश आप से और दूर चले जाएंगे।सालों से भारत की Foreign Policy का एक एहम टेनेंट रहा है एक हिस्सा रहा है Non -Alignment यानी दुनिया में चाहे कुछ भी हो जाए हम कोई Military Alliance या Block का हिस्सा नहीं बनेंगे कोई एक देश या Block का पाल्तू नहीं बनेंगे लेकिन अभी तक भारत ने किसी भी इसी वजए से किसी Alliance का हिस्सा हम न या हम सची में अपने दम पर खड़े हुए हैं?

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या किसी के लिए हम जी हजूरी कर रहे हैं?जिस तरीके से हम ओपिनली एक जेनूसाइडल इसरेल को सपोर्ट कर रहे हैं हमारे एलाइस को या फॉर्मल एलाइस को मेसेच किया जा रहा है?कि हम किसके खेमे में हैं?किसके कैम्� ये दिन बदिन बड़ा होता जा रहा इसलामिक नेटो इसी फ्लॉर्ड फॉरेंड पॉलिसी की देन है जिसे हम आज भी करेक्ट करने के लिए हम कुछ देखेंगी भी नहीं मानेंगी भी नहीं लेकिन ये दिखाता है कि पिछले एक दशक की फ्लॉर्ड और फेल्ड फॉरेंड जैसे रश्या से तेल खरीदने के लिए नया punishment अब आने वाला है 100 % extra tariff और जब ये punishment आएगी तो हमें इसे अकेला ही लड़ना पड़ेगा क्योंकि दोस्त तो कोई बचा नहीं हमारा By the way, comments में आप अकसर पूछते हो कि भाई देशभक ये t -shirts कहां से लाते हो तो मैं आपको ब�

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ज़रूट चेकाउट करिएगा एक बार वेबसाइट पर जाकर

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