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What Is Modi Govt. Hiding From The Indian Public? | Beyond The Petrol Price Hike | Akash Banerjee

The Deshbhakt49 views
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चुनाओं के समापन के बाद हमें जिस चीज का अंदेशा था आखिर वो हो गया।लाखो डिनायल्स जारी करने के बावजूद ये अशौरिंस देने के बावजूद कि हमारे पास बफर स्टॉक है कि हम दूसरे देशों से पेट्रोल मंगवा रहे हैं भारत सरकार को मजबूर Oil companies bata rahi hain ki 3 rupay to unke ghaate ka bas 10 % hua. 25 -30 rupay tak ka hike aap expect kar sakte ho aane wale dino me. Iska seedha asar sirf aapke aur humare jebo par nahi hoga balki desh ke GDP par hoga. Rating agencies ne humare GDP forecast ko kam karna shuru kar diya hai due to the rising energy costs. अब इस बात पे कोई डिबेट नहीं है कि इस युद्ध के चलते हॉर्मूस के ब्लॉक होने के बज़े से कोई भी सरकार, कोई भी देश, कोई भी पाटी इस आपदा से अपने नागरिकों पूरी तरीके से नहीं बचा सकती है।कुछ का कम नुकसान होगा और भारत जैसे दे लेकिन देशभथ का आज का special एपिसोड सिर्फ फ्यूल प्राइस हाइक पर नहीं है. क्योंकि उसके बारे में तो आपको बहुत बयान बाजी वैसे में भी मिल जाएगी. लेकिन हमारी ये जो खस्ता हालत है, ये ओयल प्राइस सिर्फ एक वज़े हो सकती है. जो चौका देने वाले बयान आजकल हम सुन रहे हैं जो आकडे हमारे सामने आ रहे हैं जो manufacturing jobs investment का सच हमारे सामने आ रहा है उससे तो ये दिखता है कि सरकार हमसे कुछ छुपाने की कोशिश कर रही थी बहुत time से सच के उपर डसकर बैठी हुई थी और अब इस युद्ध के च मान लेते हैं कि अचानक से आज से ही या भी सबस्ट्रेट अफ़ार्मूस खुल जाता है, युद्ध खतम हो जाता है, और कल से तेल के दाम कम होना शुरू हो जाते हैं, तो तब क्या भारत के लिए समस्या खतम हो जाएगी, सब कुछ सुलज जाएगा, हम विका कुछ एसी दिक्कते जिन पर ध्यान देने की बात करने की फिक्स करने की जरूरत महिनों पहले थी लेकिन उन चीजों को छुपाया गया हम से जूड बोला गया देश पे फोकस नहीं किया गया वोटों पर फोकस किया गया इसलिए देशबख के आज के एपिसोड में कुछ कड़वे सच को सामने रखने की कोशिश करूंगा जिसे मोदी सरकार बहुत टाइम से चुपाने की कोशिश कर रही है जो डीपर स्ट्रक्चरल इशूज हैं जो हमारे देश को नीचे खीच रही है उससे निपटने की जिमदा कि अब देरीज नो होप कुछ लोगों को ये एपिसोड थोड़ा सा चौका देने वाला लगेगा दर्धनाक लगेगा लेकिन जो सच होता है न वो थोड़ा बिटर ही होता है आज का एपिसोड उसी सच को समर्पित है नेता टाइप आधा काम मत करो सब्सक्राइब के साथ साथ जब सरकार कहे चिंता करने की जरूरत नहीं आप स्ट्रेस उसी समय लेना जरूर शुरू कर दीजेगा।लेकिन चुनाओं का समय था तो सरकारभी किसी न किसी प्रकार प्राइस राइस से तो इंकार करती रही इसी बात पर डटी रही कही न कही सरकार इस आशा में थी कि अगर US और इरान के बीच में सीस फायर हो जाता है तो तेल के डाम बिना बढ़ाय काम निकल सकता है देश को और दिक्कतों का सामना ना करना पड़े।

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Markets और Manufacturing को एक और जटका ना लगे।दिक्कते जितनी भी हो एक बात तो सही है कि इंडिया में एक Infrastructure Boom चल रहा है।सरकार ने बेशुमार पैसा लगाया है।Highways, Bridges, Railways, Ports, Smart Cities साब कोछ एक साथ।मतलब Country is literally under construction. अब इसका Economic � जितना बड़ा प्रॉजेक्ट उत्ती बड़ी सिर्दर्धी. Developers और Construction Companies के लिए Actual Challenge सिमेंट या इट नहीं है, Management है. Vendors, Quotation, Inventory, Project Stages, साब कौछ Track करना तॉफ होता है. यही एंट्री होती है उडू और उनके Construction Industry Toolkit की. मान लो किसी क्लाइन्ट ने Office Renovation का कोट मांगा आप से. Normally, आप Excel खो लोगे, पुराने फायल्स खंगा लोगे, Copy -Paste करोगे, Study करोगे, और कोई Information शेयर करने की कोशिश करोगे. उडू में Direct App खोला, क्लाइन्ट का अब quotation के लिए एक template select किया, एक click में सारी चीजे लोड हो जाती है, cement, block, door, labour hours, पूरा breakdown ready. Product catalog से design choose कर लिया, जैसे doors के different styles, मतलब guess work एकदम खतम. Quote builder यूज़ करके proper professional quotation आप बना सकते हो, वो भी headers, design, terms and condition, सब के साथ जिसे client को भी एकदम serious work का feel आए. एक click में WhatsApp या email पर share किया और followup भी कर लिया. Client ने ये project accept किया E -sign kiya, project automatically system me load ho gaya. Aapke dashboard par task, employee timesheet, purchase, orders, invoices, sab kuch track kar sakte ho without any chaos. Aur ye poora construction toolkit aap 15 dino ke liye free trial par le sakte ho. Itna hi nahi. Aap accounting and law firm chalate ho, arts and craft store hai aapke paas, e -learning platform chalate ho, fast food, restaurant ya event management jaise kaafi saari industries ko properly manage kar sakta hai UDU. चुनाओं खतम होते ही एकदम सा माहौल बदल जाता है जो मानो ये जो इरान युद है ये चार माई को इलेक्शन रिजट आने के बाद शुरू हुआ था होरमूस तो कल ही बंद हुआ था इसलिए बिग बॉस ने इसके बाद देशवासीयों को नए नए टास्क असाइन करना � R .A. Editor Thaali aur Taali पुरानी बात है वो कोरोना टाइम की बात है ये 2026 में है तो यहां सोना खरीदना पेट्रोल इस्तमाल कम करना बाहर घूमना कम करना ये सारी अपील की गई हमें पेट्रोल डीजल का उप्योग कम करना होगा कम से कम एक साल के लिए हमें विदेशों में जाने की ब तो भी वो देज़ भक्ती का बहुत बड़ा काम है अच्छा ठीक है युद्ध है तेल की कमी है अपील मौधी जी के समझ में आती है लेकिन सोना ना खरीदो विदेश घूमना बंद कर दो ये क्यों और हमारे देश में जो बड़े बड़े उद्योगपती हैं जो कभी अच्छ

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Kotech ji ka kehna hai ki zor ka jhatka zor se hi lagega. Tel ke daam badhenge to saath hi saath economy mein inflation bhi badhega, mehngai bhi badhegi. Isme koi debate nahi hai. Lekin tel ke daam to aaj badh rahe hain. Aur inflation to April me 40 mahine ka record pehle hi tod rahi thi. Whole Sale Price Inflation WPI एप्रेल में 8 .3 % तक पहुँँ चुकी थी जोकि बीते साड़े 3 सालों में सबसे जादा था इसका मतलब है कि तेल के डाम बढ़ने से पहले देश में महंगाई बढ़नी शुरू हो चुकी थी Industrial Output कम होनी शुरू हो चुकी थी बेरोजगारी already बढ़ रही थी Investors का प कि और भी बुरे दिन आने वाले हैं।लेकर इसके लिए सिर्फ ईरान युद जिम्मदार नहीं है।समझाता हूं क्रोनॉलजी।अगर वोटसैप उनिवर्सिटी से लोगों को फुरसत मिले तो उनको दिखेगा कि प्राब्लेम टेंपरी नहीं है स्ट्रक्चरल है और इस बात पर ग्लोबल ब्रोकरिज फर्म बर्न्स्टीन ने एक वार्णिंग भी इशू की है बर्न्स्टीन का मानना है कि इंडिया अंडर � GDP contribution सिर्फ 15 या 16 प्रतिशत है।उल्टा as a matter of fact, बहुत सारे लोग और भी agriculture में घुस रहे हैं क्योंकि उन्हें urban नौकरिया नहीं मिल रही हैं।लेकिन agricultural output बढ़ नहीं रहा है।

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उदर अगर हम manufacturing की बात करें कि manufacturing GDP का सिर्फ 16 या 17 प्रतिशत हिस्सा बनता है।जबकि इस sector मेHard Scale Job Creation होती है होनी भी चाहिए थी Make in India कारिक्रम Manufacturing को पिछले 12 सालों में उठा नहीं पाया उल्टा हम फिसल रहे हैं Manufacturing में Research और Development पर इंडिया की GDP का सिर्फ 0 .6 -0 .7 प्रतिशत खर्चा होता है और Artificial Intelligence जैसे Strategic सेक्टर में इंडिया प्रोडीूसर के बजाएं Consumer बनने के रिस्ट पर खड़ा हो गया है साधी साथ नौकरिया भी जा रही है उधर चाइना धडले पर धडले AI के मामले में Patents फाइल तर र लेकिन असली कमजोरियां सालों से हमारी एकाणूमी के अंदर छुपी थी और उसे और भी छुपाया जा रहा था।उसे सही नहीं किया जा रहा था।अब आप स्टॉक मार्केट को देखिए सेंसेक्स इस साल 8 % इन नीचे रहा है।वही बाकी दुनिया के मेजर इंडिसीज � जिन्होंने सिर्फ इस साल हमारे बजार से एक दशमलब आठ लाख करोर रुपए निकाल दिये हैं भारत ने इस साल मार्च के महिने में सोला सालों में अपने लोएस्ट फॉरेंट पोर्टफोलियो ओनर्शिप रेजिस्टर किया है और कोई भारत में पैसा भाला क्यूं रखे या एक डॉलर वो ना कमाता जो कमाता रुपाई के टर्म्स में जो गेन हुए हैं वो डॉलर के इंक्रेमेंट के वज़े से वैल्यूएशन के वज़े से वो डाइल्यूट हो गया जीड़ीबी के बात करें तो इस साल इंडिया फिर से दुनिया की फिफ्त लार्जिस्ट एकॉ

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इससे भी बुरी बात है कि इंडिया का जो ग्रोथ नेरेटिव हुआ करता था वो अब ओवर्स्टेटेड लगने लग रहा है।जो डेमोग्राफिक डिविडेंट से हम धेर सारा म अब उससे लोगों का विश्वास उठ चुका है. Real GDP पिछले 7 सालों में सिर्फ 5 .5 % बढ़ा है. पिछले 12 सालों में ये 6 .2 % से बढ़ा था. मतलब अगर आप growth rate को consider करोगे तो वो बढ़ने के जगे 12 सालों में कम होता हमें दिख रहा है. अब जंता को ये सब साफ साफ पता नहीं चल रहा था, दिख नहीं रहा था क्योंकि सरकार भी numbers को इधर उधर करके, narrative चलाके, data को always अपने favor में दिखाता था और कहती थी सरकार कि देखो हमें तो फिलिप कोटलर award मिला है जबकि असली picture कुछ और ही है ये बात IMF ने भी पिछले लेकिन जूत को दिखाते दिखाते शायद सरकार भी अपने जूत में ही फ़स गई है अपने मेकप लगाए नमबर्स को बिलीव करने लगी और कहने लगे नहीं हम विश्वगुरू बन चुगे हैं।मैनिफैक्ट्रिंग के जो कहानी है वो हमारी दुरदशा को अच्छी तरी वो कम होता गया जिसे de -industrialization भी कहा जा रहा है।जो manufacturing GDP का एक share बनता था 2013 -14 में 16 .7 % आज सिर्फ 15 .9 % मने 16 % भी नहीं रह गया है हमने इस पर आपको पूरा एपिसोड बना कर दिखाया है कि ये कारणामा कितना हातक हो सकता है ये उपलब्दी जो सरकार ने की है हमारे देश के � अभी पिछले महिने नोईडा की सड़कों में कुछ ऐसे द्रिश्य देखे गए. 40 ,000 से जादा factory workers नोईडा की सड़कों पर थे. 10 ,000 से 15 ,000 महिने की salary पर काम कर रहे हैं. ये लोग अचानक सड़कों पर क्यूं आए?इनकी मांगे कुछ बड़ी नहीं थी ये कोई क्रांटी नहीं ला रहे थे न सरकार के बदलाव का मांग कर रहे थे ये बस चाते थे कि इनकी सैलरी कुछ सो रुपए से बढ़ जाए जिससे इने भूका पेट सोना ना पड़े भारत में आम सैलरीट क्लास के लिए जो रियल वेजस हैं 2019 से आज तक या तो वही की धरी की धरी रह गई हैं या तो अक्शुली कम हुई हैं अगर आप इंफलेशन को कंसिडर करोगे तो इसी वजए से Net Household Saving पचास सालों से अपने सबसे कम सतर पर है Financial Year 2023 की अगर हम बात सेविंग्स का जो शेर है 43 % से घटकर 35 % हो गया है सिंपल भाषा में बोलें तो लोग न पैसा बजा पा रहे हैं न बैंक डिपॉजिट कर पा रहे हैं और जो FDs की भी हैं वहाँ से भी पैसा निकाल रहे हैं और ये सब इरान की जमयदारी नहीं है ये सब जंग शुरू होने स जीतोड मेहनत करने के बाद सेविंग्स कम करने के बाद जब आम लोगों का घर चलाने में उनको दिक्कत आने लगी तब क्या किया लोगों ने वो लोन्स के भरो से घर चलाना उन्होंने शुरू कर दिया भारत में क्रेड़िट कार्ड अउट्स्टेंडिंग ड्यूज जुला हाड 20 ,000, 21 ,000 से बड़कर 26 ,000 तक पहुँच गया है यानि आम परिवारों का क्रेडिट कार्ड पर डिपेंडेंसी हायानक रूप से बढ़ रहा है देश के लिए बहुत खतरनाक है ये एक और चिंता का विशय जो थोड़ा बहुत investment middle class, upper middle class कर भी पा रही थी अब वो �हाड आंकडे हैं इस पर कोई डिबेट नहीं है. मार्च 2026 के आंकडे हैं ये. 52 .82 लाक नई SIPs रेजिस्टर की जाती हैं. अच्छी बात है. लेकिन इसी समय 53 .38 लाक SIPs बंद की जाती हैं. यानी पहली बार stoppage ratio 101 के उपर चले गया है, simple भाषा में, बंध होने वाली SIPs, शुरू होने वाली SIPs से जादा हो चुकी है. क्योंकि FIIs के साथ कहीं न कहीं लगता है कि भारत के आम लोगों को भी stock market से भरोसा उनका उठना हो गया है, शुरू हो गया है कि वो भी अपना पैस लेकिन जब पहले distress के signal आए थे इसी को लेकर कि लोग निवेश कम करना शुरू कर रहे हैं तो finance minister ने क्या कहा था याद करिए Domestic Investor हमारे लिए काफी है जब युद्ध होता है तो क्राइसिस आता है, जब कोविड होता है तो क्राइसिस आता है, जब एकनॉमिक साइकल होता है तो क्राइसिस आता है, दिक्कत क्राइसिस से नहीं है. दिक्कत उस चीज से है कि कैसे क्राइसिस से निप्टा जाता है. क्योंकि इसी तरीके की गरूर से इसी तरीके की डिनायल से warning signs को ignore किया गया था हमारी economy में जब भी कोई संकेत आता सरकार बस लालांख दिखाती हुसे में उल्टी करती और जो कोई जो messenger है उसे गोली मार देती UN Human Development Index 134. Economist Intelligence Unit Democracy Index 85 -93. Press Freedom Index

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में 140 से 158 तक चले गए तो कहा कि अरे चाइना तो अभी भी हम से नीचे है हाऊसोल्ड कंजंप्शन इक्स्पेंडिचर सर्वे ने साफ साफ सालों पहले अलार्म बजा हमारे नेतागण को लगता है कि हम बटवारे के राजनीती करते रहेंगे उदर एकानॉमी अपने आप अच्छा काम करते रहेंगे लेकिन ऐसा है नहीं हमारी एकानॉमी को बहुत जादा फोकस की दरकार है भारत एक consumption based economy है मतलब हमारी अर्थ वयवस्ता इस बात पर बहुत ब� लेकिन जब आम जंता, खासकर की middle class जंता, spending जंता, जब उसके जेब में पैसे नहीं होगी, तो वो consumption कहां से करेगा?Economy इसी लिए रुक्सी गई है. सरकार को इस बात का संग्यान होने लगा था पिछले साल. मुधी सरकार ने फिर आनन्थानद में काफी कोशिश किया भी थ और बड़ेगा भी तो कैसे?जब सैलरीज ही नहीं है लोगों के पास, लोगों के पास घर चलाने के लिए पैसे नहीं है, नौक्रियां कम हो रही है, खर्चे बड़े जा रहे हैं, और जब वो सैलरीज बढ़ाने का अगर बात भी कर दे, डिमांड भी कर दे, सरको पर गलती से तब आप सोचते हो अच्छा एक काम करोसोना मत खरीदो पेटरोल मत खरीदो विदेश मत जाओ याद रखे मैंने सिर्फ कुछ दिक्कतों के बारे में यहां बात की है कुछी आंकडे आपको यहां बताए हैं अगर उसी में constipation हो जायस सवाल है. लेकिन इसके लिए सरकार के साथ साथ आप और हम भी जिम्मेदार हैं. जितना ध्यान लोगों ने TCS Corporate जिहाद पर दिखाया अगर उत्रा ही Tech layoffs पर दिखाते तो कुछ बदल सकता था?अगर एलेजट बांगलादेशी गुजबैथियो के जगे हम बांगलाद अगर वैज नान वैज के लडाई से लोगों को फुरसत मिले तब हम manufacturing, transparency, corruption के बारे में बात कर सकते थे।जब भगवान के भरोसे सरकार का काम चल रहा है, जनता खुश है तो फिर किस बात का काम करना?

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लेकिन जब बुरा वक्त आता है तो छप्पर फार के आता है अभी तक हमारी एकानॉमी के जो गती थी देश की एकानॉमी की जो साइस थी उसके चलते कुछ चीज़े थो ठीक चल रही थी लेकिन आप प्रॉबलिम्स की सुनामी आ सकती है तेल के दाम बढ़ने से महंगाई पह Jobs uncertain, IITs, NIT graduates ko bhi naukriya nahi lag rahi, offer letters ko revoke kiya jaa raha hai. Household savings 50 saal me lowest chal raha hai aur debt record level tak pahunch chuka hai. Iske upar ab aa gaya hai ek yudh. Yad rakhiye Indira Gandhi ke emergency ke ailaan se pehle desh me jo arajakta pheli thi, jo zabardast mehngai chali thi, uski baje bhi tel ki mehngai chali thi.में क्राइसिस थी तो मोदी सरकार को इतिहास एक सबक लेना पड़ेगा सिच्वेशन पर काबू पाना पड़ेगा डंडे लाठी से नहीं लीगल हथकंडो बलकि पारदर्शिता से भी. मैं सरकार के साथ 100 % हूँ अगर सरकार बोले कि हाँ एक war situation है हमें emergency हम face कर रहे हैं हमने ये गलतिया की हैं हम ये कर रहे हैं ठीक करने के लिए. यानी सिर्फ जुमला बाजी नहीं हम कोई ठोस action ले रहे हैं और सरकार को convey करना होगा क्या action. जैसे कि अ और अगर सरकार मटन, मुगल, मंदिर, मस्जित, मिया, मचली, मंगल, सुत्र छोड़कर एकानॉमी मैनेज करने पर ध्यान दे, तो कुछ भी possible है मैं मानता हूँ. लेकिन उसके लिए सरकार के साथ साथ लोगों को भी थोड़ी रूची दिखानी होगी. यही पर जंता को policies, taxation, job, ये तो किसी और देश की बी बात नहीं हो रही है, आपके pocket की बात हो रही है. देखो सरकार तो हर समय अपने जवाब देही से बचने की कोशिश करेगा. कभी हॉर्मूस बोल देगा, कभी COVID बोल देगा, उसके पास तो excuse का भंडार पढा हुआ है. सवाल ये है कि क्या आप जुम Thanks to UDU for making this episode possible. अगर आप भी UDU का Construction Toolkit 15 दिनों के लिए फ्री एकदम ट्राय करना चाहते हो तो description में link दिया हुआ है. UDU के दूसरे applications भी आप ट्राय कर सकते हो. एक बार जरूर चेक करियेगा. All the details in the description.many thanks for watching

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