आठ घंटे धरने पर बैठ गए राहुल, FIR के बाद ही निकले थाने से, दिल्ली पुलिस को झुकना पड़ा
उसे FIR करनी पड़ गई।राहूल गांधी ने दिल्ली पुलिस को जुका दिया।पुलिस खड़े हो गए।किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि राहूल गांधी दिल्ली के संसत मार्ग तक साहिल लोचप के मामले में FIR नहीं होगी।वहां से नहीं हटेंगे।20 दिन, 30 दिन उन पैलेट गन से घायल साहिब लोचबती FIR नहीं कर रही थी राहूल गांधी के अड़ जाने के बाद कई घंटे तक 14 और 17 अगस्त को मगर पुलिस ने FIR दरज नहीं की इमेल से शिक नहीं दे रहा क्योंकि 20 जुलाई को पैलेट गन से उनकी आमार्ग ठाने पहुंच गए ज 20 जुलाई के हिंसा को एक महिने हो गए अब तक FIR हो जानी चाहिए थी इसके लिए नेता प्रतिपक्ष को, प्रियंका गांधी को, कॉंग्रेस पार्टी के दूसरे नेताओं को संसद मार्ग ठाने के बाहर क्यों जमा होना पड़ा अंदर से हमें बताया जा रहा है कि देखिए उपर से ओडर आया FIR नहीं हो सकता है Simple जी बात है जब तक हम यहां से नहीं हिलने वाले हैं Simple जी बात है FIR करना होगा इस देश में लाकों लोगों के साथ यह अन्याय होता है महिलाओं के साथ होता है जिनका रेप किया जाता है उन
एक मांगे हमारी F .I .R. B .D .R और जो Investigative Officer है उसका आप नाम हमें बता दीजिए हम चले जाएंगे राहूल गांधी को छे घंटे तक धरने पर बैठा दे दिल्ली पुलिस को आज फैसला लेना ही था इस बार राहूल ग जिसके लिए उनके पास कोई थोड़ वरना ये मुद्धा बहुत जादा बड़ा हो जाता हूँ क्योंकि राहूल गांधी ने साफ साथ बिना यहां से नहीं जाएँ 21 जुलाई को जब राहूल गांधी अचानक प्रधानमंत्री मोदी के आवास वहां से उठाकर अलग अलग ज और नेता प्रतिपक्ष राहूल गान पुलिस से आख में आख मिला कर बात करने के बाद हुई है।
आख से इनको दिखाई नहीं देता है।इतनी युवा के साथ अन्याय हुआ है।और तब भी आज सुबे 11 -11 .30 आम यहाँ है।एक महीने से इन घट में तब जाके एफारा बलतकार होता है, रेप होता है।कितने बच्चों को मारा जाता है, कितने लोगों को गोनी मारी जाती हैं, कितने लोगों को शरीर में चर्रे होते हैं।ये न्यू डेली विल्कुल दिल्ली के बीच में पूलीस्टेशन है।
यहाँ पे नयाई नहीं मिल रहा है।अब इमैजि एक हिंदुस्तान के नागरिक के लिए उसकी मा के लिए उसकी पिता के लिए न्याय मांगा है।और उसके लिए आठ घंटे लग गई और फाइनल बड़ी इंट्रिस्टिंग बात फाइनल परमिशन फाइनल होके हॉम सेकरेटरी और अमेट शाजी को देना पड़ा तब इन्होंने � ये चाहते थे आफायार करना।वो वाले भी चाहते।
राहूल गांधी क्यों बार -बार कहे जा रहे हैं?कि पैलेट गन का सबूत पूछा जा रहा है, तो सबूत दिखा रहा हूं।इसका संदर्ब यह भी हो सकता है।संसधिय कारे मंत्री किरन्ड रिजिजु का समाचार ए� तो मंत्री जी कहने लगे मैं याद दिलाना चाहता हूँ कि पुलिस की कारवाई में किसी की भी मौत नहीं हुई किसी की भी हड़ी नहीं तूटी कोई भी प्रदर्शनकारी अस्पताल में गंभीर चोट के साथ भरती नहीं क्या बिहार में AK -47 वाकई नहीं चली अगर ऐसा है � साहिल लोचब की आखे शतिगरस्थ हुई हैं अपने स्टेल लो
एम्स की रिपोर्ट जिसमें साफ लिखा है कि इनके शरीर में 200 से जाधा चर रहे हैं आँक में 3 चर रहे हैं आँक इनकी खो गई है उस आँक से वो नहीं देख पाएंगे और वो चुए नहीं जा सकते हैं दिल्ली पुलीस ने कहा कि हमने चर्रे नहीं चलाए तो एक ही सवाल है अगर आपने नहीं चलाए तो किसी ने तो ये चर्रे चलाए होंगे शायद किसी और ने इन पर चर्रे चला दिये और अगर किसी और ने नहीं चलाए तो बता नहीं शायद इनों ने चर्रे चला दिये हों बगर क्राइम तो हुआ कि पैलेट गन से कितने लोग घायल हुए हैं।
दो अस्पतालों ने जबाब दिया हैं और कहा है कि पैलेट गन से घायलों की संख्या 10 हैं।AIMS ने यह कहकर जबाब नहीं दिया कि इस से मरीज की पहचान उजागर हो जाएगी।साकेद गोखले का सबाल है कि घाईलों की संख्या बताने से मरीज की पहचान कैसे उजागर हो जाएगी 20 अगस्ट को सुप्रीम कोट ने पांच सदस्यों की एक हाई पावर कमेटी बनाई है Retired Justice R Subhash अपने मामले में FIR तक दरज नहीं करा पारें तो यह कमेंटी जाच किस बात की करेगी?और जब आपने उनसे कहा तो फिर उननोंने इनसे कहा कि नहीं उपर से ओडर आया है केंद्रिय स्वास्त्मंत्री जेपी नड़ा को बताना चाहिए कि AIMS की तरब से क्यों नहीं बताया जारा है कि पहले गन से कितने लोग घायल हुए हैं घायलों की संख्या बताने से मरीज की पहचान का क्या संबंध है ये कब से होने लगा कि जिसे गोली लगी है उसका नाम न लेकिन दिल्ली में पहचान के नाम पर पैलेट गन से घाईलों की संक्या क्यों छिपाई जा रही है और पहचान भी क्यों नहीं बताई जानी चाहिए।राहूल गांधी तो साहिल लोचप को लेकर प्रेस कॉन्फरेंस कर रहे हैं संसद मार्ग थाने के बाहर धरने पर बैट � केंद्रिय मंत्री जेपी नडडा को इसका जवाब देना चाहिए जो कह रहे हैं उन्हें इसका जवाब पुलिस से माँगना चाहिए के एफायार नहीं होगी कमेटी पैलेट गन के मामले में जाँच कैसे करेगी इसी लिए तो राहूल गांधी संसद मार्ग उपायूप के द�
पूरा देश जानता है कि 20 जुलाय की घटना को लेकर मांनिय सरवोच नियाले ने पहले ही संग्यान ले लिया है और पूर्व जज्ज की अध्यक्ष्टा में एक पांच सदस्य उच अगईकार प्राप्त समीती का गठन भी किया गया है तो आज ठाने के बाहर जाकर, कैमरे के सामने बैठकर, राहुल गांधी क्या साबित करना चाहते हैं?
कमाल का तरक है, दोनों का, रवी शंकर प्रसाद का और जेपी नड़ा का भी. सबाली राजनिती कैसे हो गई?यह बात सरकार कैसे कह सकती है?अगर ग्रिमंतरी अमिशा के अ और यह सब कहने की जरूरत जेपी नडडा को नहीं पड़ती।सुप्रीम कोड ने हाई पावर कमेटी बना दी है।इसका मतलब कैसे हो गया कि FIR नहीं होगी।वैसे आज का दिन, 21 अगस्त का दिन, जेपी नडडा और रवीशंकर प्रसाद के लिए अच्छा नहीं रहा।
� एक सही मुद्धे को लेकर ठानी तक आये थे।इस मुद्धे को लेकर रवीशंकर साबित होना लिखा था।अभी तक दिल्ली पुलिस से लेकर मोधी सरकार के किसी मंत्री ने पैलेट गन के बारे में कुछ भी नहीं कहा है।पैलेट गन के मामले में ये पहली F .I .R है।नौजवान पिछले कई हफ्तों से इंजार कर रहा था देश का नौजवान कि सदन में ग्रहमंत्री आएंगे और जवाब देंगे की हिंसा क्यों होई जवाब देंगे पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन चल रहा था शांती पुर � ये सब सवालों के जवाब नौजवान चाहते थे कि सदन में आके ग्रहमंतरी दें नहीं आए डर गए भगोड़े की तरें दूम दबाकर शा खेल छोड़िये इसको उसके बाद सदन ख़तम हुआ उसके बाद भी इंद्जार कर रहा है नौज जेपी नडडा को अमिश शा से और उनोंने राहूल गांधी की आलोचना कर दी रविशंकर प्रसाद ने आराजक तक कह दिया उसके बाद FIR कर उन दोनों को क्यों शर्मिंदा किया गया पूछना चाहिए हमें ने FIR कर दोनों को अजीबो घरीब इस्तिती में डाल दिया है साहिल लोचप का मामला राहूल 21 अगस्त को साहिल बता रहे हैं कि उनकी आँखों की रौषनी नहीं बची रवी शंकर प्रसाद या जेपी नडडा को राहूल गांधी का 24 जुलाई का वीडियो देखना चाहिए फिर अपनी सरकार से हो सके तो साहास अगर है तो ग्रीमंतरी अमिशास से पूच लेना चाहिए
इनकी आँख से इनको दिखाई नहीं दे रहा है।ये हमारे फ्यूचर हैं इंदुस्तान।ऐसे हजारों युमाओं पर पेलेट गान चलाई गई है, लाठी चलाई गई है, मारा गया है, पीटा गया है।और ये क्या कर रहे हैं?प्रेस्ट कोल प्रोटेस कर रहे हैं?
क्यों क और अमिश्चा मॉन्सुन सत्र में 20 जुलाई के बाद से आयी ही नहीं सदन में बीजेपी को बताना चाहिए कि साहिल लोचव की आख में पैलेट गन के छर्रे लगे हैं साहिल कह रहे हैं दिखाई नहीं दे रहा तो FIR क्यों नहीं ली गई नेता प्रतिपक्ष को इस काम के ल मेरे उपर पेले टिकन से हमला हुआ, जिसके बाद मैं लेडी अरेडिक में अडमीट हो गया।
उसके बाद मुझे मुझे मुन टीक से आफ़र कर दिया गया।और मेरी दो सर्जरी हो गया आपके।लेकिन मुझे दो सरजरी के बाद भी मुझे कुछ दिखाय नहीं दे रह दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोट में प्रदर्शनकारीयों के साथ हुई हिंसा पर 42 पन्नों का हलफनामा दायर किया है इसे लेकर 19 अगस्त की दहिंदू में छपी कृष्णदास राजगोपाल की रीपोर्ट आपको पढ़नी चाहिए इस रीपोर्ट में बताया गया है कि 42
हलफनामे में बैरिकेड तक की संख्या बताई है लेकिन एक्शन के मामले में जबाब दे ही किसकी है इस पर हलफनामा चुप है जाहिर है इसमें पैलेट गन को लेकर कोई बात नहीं होगी बात तो तभी होगी जब F .I .R. होगी और इसी लिए राहूल गांधी को संसद मार्ग ठाने जाकर धर्ना देना पड़ा दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोट में बताया है कि 20 जुलाई की हिंसा में 200 प्रदशन कारी घायल हुए हैं इसके पहले के एक और हलफ नामे में दिल्ल इस से आपको उस दिन हिंसा के स्केल का अन्दाजा हो जाना चाहिए. मीडिया में बहुत कम घायल प्रदर्शन कारियों के बारे में रिपोर्ट आई, 200 की तो नहीं आई, आखिर किरन डिजुजु ने कैसे कह दिया कि एक भी हड़ी नहीं तूटी, फिर 200 लोग कैसे घायल हो ग गंभीर हालत में लड़की खेल अस्पताल में सुरक्षा बढ़ा दी गई गल्यारों में चुप्पी पसर गई ये हेडलाइन है तबशीर शम्स की रिपोर्ट की बाद में छात्रा को वेंटिलेटर सपोर्ट से हटा लिया गया और उसकी सेहत में सुधार की भी खबर आया है आ पैलेट गंद की गोली चली है या नहीं इस पर उनका कोई बयान नहीं आ रहा है।ऐसा क्या है कि राहूल गांधी जब भी 20 जुलाई की हिंसा की बात करते हैं मोधी सरकार के मंत्री घिरने लग जाते हैं इधर उधर की बात करने लग जाते हैं उनके तरक कमजोर दिखाई प�अधिने संसद मार्ग DCP के दफतर पहुँचकर दिल्ली को याद दिला दिया के पुलिस ने पैलेट गन चलाने के बाद भी FIR नहीं की थी इस हाई प्रोफाईल मामले में यह हाल है तो बाकी घाईलों के साथ क्या हो रहा होगा मगर नेता प्रतिपक्ष के अड जाने के लिए
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