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क्या RBI ने बेचा $12 अरब का सोना? सवालों में फंस गई RBI की सफाई

Ravish Kumar Official50 views
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नमस्कार मैं रवीश कुमार लगता है मोना डारलिंग से पूछना पड़ेगा क्या इंडिया ने सोना बेचा है?कितना बेचा है?जिस तरह से भारतीय रिजर्ब बैंक ने सोना बेचने की खबर को घलट बताया है उससे संदेए और बढ़ गया है दो जून को ब्लूमबर की � और 3 जून के कई अखबारों भी।तब जाकर खंडन आया कि ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट घलत है।पत्र सुचना कारियालने ब्लूमबर्ग की प्रिती सोनी की रिपोर्ट पर fake news का ठकपा लगा दिया है।ब्लूमबर्ग ने रिजर्ब बैंक की प्रतिक्रिया को लेकर एक � Reserve Bank का साफ कहना है कि सोने के भंडार में कोई कमी नहीं आई और सोना नहीं बेचा गया इसी के साथ Reserve Bank ने एक चार्ट भी जारी किया है जिस पर तारीख लिखी है 22 माई 2026 की और इस चार्ट में सोने के भंडार का record है 24 अप्रेल 2026 तक का इसे लेकर कई लोगों ने पूछा है क जब ब्लूमबर्ग ने 22 माई तक के डेटा की बात की है, तो RBI अप्रेल तक का आकड़ा क्यों दे रहा?

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जिस अंतराल की बात की जा रही है, उसका डेटा क्यों नहीं प्रकाशित किया गया?ब्लूमबर्ग के अभिशेक गुपता अर्थशास्त्री है, उन्होंने माई महिने क उज्जवल नानावती आर्थिक मामलों पर लिखने बाले संदीप मनुधाने ने दिखाया है कि 15 से 22 माई के बीच RBI के सोने के भंडार का मुल्य 11 .45 लाक करोड रुपए से गिर कर 10 .98 लाक करोड रुपए पर आ गया चार प्रतिशत की गिरावट देखी गई और इतनी ही गिरजूलर्स एसोसियेशन का आकड़ा दिखाता है कि उस हफ्ते में सोने के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ अगर इस दोरान RBI के सोने के भंडार में कोई बढ़ोत्री नहीं हुई गिराव� संधीप मनुधाने का अनुमान है कि अगर ऐसा है तो 22 या 24 केरेट के हिसाब से 20 से 30 टन के बीच सोना बेचा गया होगा।रिजर्ब बैंक इंकार कर रहा है इस विशे को जानने वाले सवाल कर रहे हैं।ऐसी हालत हो गई है रिजर्ब बैंक की।क्या रिजर्ब बैंक को उन स ताकि खबर का असर कम हो जाए इसके पीछे सोना गिर्वी रखने की राजनिती का एक इतिहास भी है।

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मयी 1991 में चंदरशेकर की केर टेकर सरकार ने स्विजर लेंड के यूनियन बैंक के पास 20 टन सोना गिर्वी रखवाया।इसके कुछ हफतों बार जुलाई महिने में नरसीमा राव की सरकार ने बैंक ओफ मगर यह घटना आज तक एक अराजक अक्षम और सफल सरकार का उधारण बन गई प्रधानमंत्री मोदी, बीजेपी के कई नेता इसका जिक्र करते हैं इसलिए भी यह मामला सम्वेधनशील हो गया मगर आप इस बात से इंकार नहीं कर सकते कि आर्थिक तंगी के कारण लोग सोलोग अलग अलग जगों से सोना घिर्वी रखकर लोन ले रहे हैं. मुसीबत के वक्त केवल सोना काम नहीं आता है, बीमा भी आता है. इसी को लेकर एक सूचना है. इस समय अर्थविवस्था का कुछ पता नहीं, शेयर बाजार में पैसा डू भी रहा है, आम पबलिक को वित्य सुरक्षा के बारे में खुदी सोचना पड़ेगा, कुछ और करना पड़ेगा. सोना में निवेश या स्टॉक में निवेश कुछ भी सुरक्षित नहीं, मुसीब अगर आपको कुछ हो जाएं तो क्या ये निवेश आपके परिवार को परियाप्त सुरक्षा कबर दे सकता है?इसे लिए Health और Term Insurance में भी निवेश करना चाहिए. महिने का 400 या 500 रुपए निकालना उतना मुश्किल नहीं, लेकिन जरूरत के समय लाखों का इंटिजाम मुश्किल हो जाता है. Insurance आपको All Round Protection देता है. Health Insurance से अस्पताल का लाखों का खर्चा समहल सकता है. और अगर आपकी जिं� term insurance आपके परिवार को वित्य सुरक्षात देगा. Home loan, EMI पढ़ाई के खद चुकाने के लिए इस तरह की सहायता से बहुत मदद मिलती हैं. बीमा की जब भी बात हो वीडियो स्किप मत कीजिए ध्यान से सुनिए हमारे डिस्क्रिप्शन में दिये गए लिंक को क्लिक कीज़े ट्रस्टेड पार्टनर्स के बीच तुलना कीज़े खुद फैसला कीज़े और देखिए कि कौन सा प्लान आप के लिए ठीक रहेगा विमान विमान कंपणियों को घाटे से बचाने के लिए मोधी सरकार ने दस हजार करोड के पैकेज का एलान किया है आलम यह है कि अर्थविवस्था संभलता हैना खबरें मैनेज हो पारी हैं कोई सरकार को कोस रहा है कोई कॉर्परेट को जो लोग भारत की अर्थविवस्था को डूपता हुआ देख रहे हैं उसके कारणों को समसते हैं तै नहीं कर पा रहे है कि इ Kotak Securities के Chairperson इनोंने Corporate को नींद से जागने का आहवान किया है दूसरी तरफ सरकार के समर्थक अर्थशास्री माने जाते हैं सुर्जीत भल्ला इनोंने फिर से इंडियन एक्सप्रेस में लिख दिया है कि भारत सरकार इतने साल से जिन बातों को रिफॉर्म बता रही थी दर असल वह कागस पर ही दिखाई देता है इसका मतलब है अब सब क कुछ दिन पहले खबर आई कि ताइवान के शेर मार्केट का आकार भारत से बड़ा हो गया अब दक्षिन कोरिया भी भारत से आगे निकल गया शेर मार्केट के आकार के हिसाब से भारत की रैंकिंग एक महिने से कम समय में दो पाइदान नीचे आ गई है भारत पहले पांचव तो क्या हो रहा है?क्या भारत की अर्थविवस्था तेजी से फिसलती जा रही है?

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कोटक सेक्यॉरिटीज के चेयर परसन उदै कोटक को क्यों कहना पड़ा है कि IPL खत्म हो गया अब भविश में निवेश करना शुरू कीजिए।उदै कोटक भारत के कॉर्पिरेट को एक कॉर्परेट का आदमी कॉर्परेट को एक तरह से अयाश और नकारा या बेखभर बनते हैं।है।।।।।॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥�

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बारा महिने का सबसे खराब प्रदर्शन किया है. भारत के बाजार में AI थीम ना होने के कारण निवेशकों पर असर पड़ रहा है. AI की रेस में अब भारत दूर दूर तक नज़र नहीं आ रहा और यहां अर्थविवस्था बिजली की गती से अपने रास्ते बदलती जा रही हैं. 2047 नहीं, टाइम आ गया है, 2026 का वर्तमान देखना शुरू कर दीजिए. केबल पेपर लीक ही नहीं, इकानौमी भी लीक करने लगी है. हालत ये हो गई है कि अब इंडिनेशिया के फैसले को दिखा कर भारत को आईना दिखाया जा रहा है सुरजीत भल्ला सरकार की आर्थिक नीतियों की तारीफ में कितने लेख मिल जाएंगे जिनने पढ़कर मोदी समर्थक फूले नहीं समाते हुँगे इनोंने एक महिने के भीत सुर्जीत भल्ला ने कहा है कि सरकार ने असली समस्याओं को ठीक ही नहीं किया भारती अदालतों की धीमी प्रक्रियाएं और विबादों के सुलजाने की प्रक्रियाओं के प्रती भरोसा इतना कम हो गया है कि निवेशकों ने भारत से सामान समेटना बंद कर दिया सरकार ने व जबकि इंडुनेश्या ने निवेश्कों की सुरक्षा पर काम किया भरस्ताचार को रोकने के लिए तंत्र को भेथर किया संस्थाओं की साख बढ़ाई है सुरजीत भल्ला कह रहे हैं कि इंडुनेश्या ने भरस्ताचार रोकने के तंत्र को मज़बूत नहीं किया यानि भारइन्होंने देश की हालत आपको बता दी अब भी उन लोगों का नाम सीधी सीधे लेने से बच रहे हैं जिनके कारण भारत यहाँ पहुचा है क्योंकि उदै कोटक और भारत के कॉर्पिरेट को पता है भारत की अर्थविवस्था भले खस्ता हाल में है ईडी की हालत बहुत मजबूत है उसमें कमजोरी नहीं आई दो जून को सवा लाक करोड से अधिक के मार्केट कैप की कमपनी व E .D. की तलाशी का एक संदेश यह भी जाएगा कि एकॉनमी भले गर्त में जा रही है मगर अभी आलोचना का टाइम नहीं आया इस छापे से भारत का डब्बू और डर्पोग कॉरपरेट और सहम जाएगा Corporate यहां सरकार से डरा हुआ है और यहां की सरकार अमेरिका को जवाब नहीं दे पा रही भारत पर टैरिफ लगाना या तै करना भारत किस से तेल खरीदे किस से नहीं कब खरीदे कितना खरीदे क्या यह सब भारत की आर्थिक संप्रभुता पर हमला नहीं भारत जवाब क्यों � सभी रियाइतों को खत्म करने जा रही है जिसके कारण भारत जैसा देश रूस से तेल खरीद रहे हैंक्या यह किसी भी तरह से अपमान जनक नहीं?भारत की आर्थिक संप्रबुता पर हमला नहीं?भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ट्रम्प को जवाब नहीं दे पा रहे, CBSE के चात्रों को जवाब नहीं दे पा रहे. अमेरिका भारत सहित 54 देशों पर 10 -12 % का अतिरिक्त टेरिफ लगाने पर विचार कर रहा है. आरोप है कि इन देशों में मजदूरों से जबरन काम कराया जाता है, सामान आयात किया जाता है के भारत सहित इन देशों पर टैरीफ लगाया जाएं क्या या सब भारत की अर्थविवस्था पर हमला नहीं?क्या भारत के पास इस बात का जवाब नहीं कि अमेरिका ने घलट टैरिफ लगाया है?

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उसकी बाते जूटी हैं भारत की फैक्ट्रियों में किसी से जबरन काम नहीं कराया जाता लोगों को नियूंतम मजदूरी से जाद फिर से खड़ी करने लगे हैं इस तरह के टेरिफ से भारत का निरयात घटेगा लोगों की नौकरियां जाएंगी अमेरिका से जब तब ऐसी खबर आ जाती है और भारत या तो चुपी साद लेता हैजवाग की आउचारिकता पूरी कर देता है वाणिज्य मंतराले का बयान आया है किसे लेकर अमेरिका से बाचित चल रही है ट्रेट डील के धाचे को लेकर भी बात हो रही है अभी तक बात ही हो र दो महिने से हर दिन अर्थ विवस्ता से जुड़ी कोई ना कोई बुरी खबर आ रही है।क्या निर्मला सीता रमन को प्रेस के सामने आकर बिजनेस कवर करने वाले इसे समझने वाले पत्रकारों के सवालों के जवाब नहीं देने चाहिए।चुनाओं में जीत मिलती है।मो� दिन भर बयान देने आयाते हैं जब अर्थविवस्था संकट में हैं तो सरकार सूत्रों के हवाले से बोलने लग जाती है भारत का शेर बाजार लगतार गिरता जा रहा है दो साल से अधिक समय से इसका रिटर्ण नेगेटिव में विदेशी निवेशक अपना पैसा निकाल कर अब खबरों का रंग बदलने लगा है।Bloomberg, Money Control, Economic Times, Mint, Hindu Business Line, Business Standard पलटते ही आर्थिक तुफान और तबाही से जुड़ी खबरें अब दिख जाती हैं।

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एक डेटा आया है कि इस साल के 96 ट्रेडिंग सेशन में हर घंटे विदेशी संस्थागत निवेशक भारत से 400 करोड रुपए 2025 में हर घंटे 161 करोड रुपया निकाल रहे थे इस साल इसकी रफ्तार दो गुनी हो गई।एक और डेटा है डस साल में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों का भारत में निवेश इतना कम कभी नहीं हुआ।2016 के बाद पहली बार एक जुन को अग्रिगेट नेट इंवविदेशी निवेशक ही नहीं भारत की कंपनिया भी दूसरे देशों में पैसे लगाने लगी हैं इसके जर्ये भी डौलर बाहर जा रहा है Reuters में जैश्री पी उपाध्याय और गोपीका गोप कुमार की रीपोर्ट आई है. RBI और भारत की वी नियामक संस्थाओं ने पिछले 3 हफ्तों में देश की 10 बिजनेस फर्म और Family Office से सबाल पूछे हैं के उनके विदेशी निवेश का उद्देश क्या है?सूत्रों के हवाले स नौकरी से कमा नहीं पा रहे, मार्केट में मुनाफा नहीं, सैलरी बढ़ने के आसार नहीं. भारत में स्मार्टफोन की बिक्री चीन और अमेरिका के मुकाबले जादा घट गई है, यानी असर भारत पर जादा है. एक रिपोर्ट आई है कि भारत में पिछले दो वर्षों में कहा जा रहा है मूच्वल फंड के भरोसे या बाजार टिका हुआ है लिकिन अब आकडे आ रहे हैं कि SIP खाते बंध होने लगे हैं बिजनिस्स स्टेंडर्ड के अभिशेक कुमार की रिपोर्ट है कि फरवरी से अप्रेल के बीज़ 3 .5 लाख SIP अकांट बंध हो गया है मार्च यह स्थिती क्या बताती है यही कि चोटे निवेशकों की हालत खराब है बाजार से उनका भरोसा घट रहा है और वे दूर जा रहे हैं मौनसून की भविश्वाणी अच्छी नहीं सुखे की आशंकात जताई जाने लगी है इससे भारत के गाउं में संकट और करता हैकी क्रेश शक्ती घड़ जाएगी कई लोग कहने लगे हैं कि अक्टूबर आते आते आर्थिक इस्तिती और बुरी हालत में दिखेगी अक्टूबर की बात जून में बहुत हो र वहां आपको लगेगा कि भारत में इतनी चुनौतियां है ही नहीं भारत सूपर पावर बन गया है मोदी सरकार को मन की बात में अपील करनी चाहिए कि जिसकी नौकरी जा रही है जिनें नहीं मिल रही है सैलरी घट रही है ये सभी वाटसब ग्रूप से बाहर ही ना निकलें ख

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