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क्या चल रहा है बीजेपी में, क्या आपको लगता है मीडिया में बीजेपी की बात होती है?

Ravish Kumar Official64 views
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नमस्कार मैं रवीश कुमार आईए बीजेपी की बात करते हैं मतलब यहां मत आ जाये मेरे पास जहां से देख रहे हैं वही से बीजेपी की बात कीजे आपको लगता होगा हर तरब बीजेपी की ही चर्चा है अगर ऐसा है नहीं सबसे कम बीजेपी की बात होती है यह बीजे� जिस देश में डर से लोग महला छोड़ देते हैं उस देश में पाटी छोड़ देना कोई बड़ी बाद नहीं।बीजेपी को देख कर लगता है प्रधान मंत्री मोदी हमेशा विपक्षी दलों की पॉलिटिक्स करते हैं।उनके बारे में जानकारी रखना, कमजोरियों का प करोडो कारेकरताओं वाली BJP में भले ही दो लोग दिखाई देते हैं लेकिन मीडिया को उन करोडों की तरब भी देखना चाहिए यह भी देखना चाहिए कि BJP कब कब दिखाई देती प्रधान मंत्री मोदी के लिए मंदिर में आर्थी करते हुए मन की बात सुनते हुए ही क्य प्रॉब्लम देखते ही बीजेपी के सांसत कैसे चुप रह जाते हैं?यह बदलाव कैसे आया?इसलिए बीजेपी की बात होनी चाहिए।2014 के बाद से बीजेपी केंदर में प्रचंड रूप से सत्ता में है, कोई हिला नहीं सकता, डिगा नहीं सकता, राज्यों में भी कई द

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दश्यक के लिए सत्ता में आ गई।ऐसा बताते हैं।तो इतना सारा पावर बीजेपी के कारेकर्ताओं और निताओं के बीच कैसे बाटा जा रहा है।उसे लेकर किस तरह का आपस में कॉंपेटिशन है, इंसेक्यॉरिटी है, सेक्यॉर जैसे ये Newsclick का मामला है, फर्जी केस के आधार पर चापे पड़े, आठ महिने के लिए संपादक प्रभीर पुरकायस को जेल में डाला गया और अच्छा खासा एक News Organization बरबाद कर दिया गया. सौ लोगों की नौकरी चली गई, कोट में ये मामला नहीं टिका. BJP के नेता अनुर कि गाओं गाओं में बीजेपी के नीता, कारे करता और समर्तक इस बात से गदगद हैं कि न्यूज क्लिक को बरबाद कर दिया गया जूठे केस में फसा कर संपादक को जेल में डाल दिया गया और अब जब अदालत में इस केस को फर्जी पाया गया तब बीजेपी के नेता कैस क्या वे डांस करने लग जाते हैं कि ये एक और न्यूज अर्गिनाजिशन बंद करा दिया चलो प्रसाड चड़ाते हैं कुछ और पत्रकारों की नौकरी चली गई उनके घर का चूला सूख गया धम धमा धम धम डांस करते हैं क्या बीजेपी इस तरह से रियाक्ट करती होगी अब उनकी बात भी नेहरू के संधर्म में होती है।अटलपिहारी बाजपयी फूटनोट्स की तरफ जाते नज़र आते हैं।नेहरू से नंबर में बड़ा होना है।

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लेकिन इस तुलना का क्या है?है?जिस नेहरू की आलोचना, उनका अपमान दिन रात करते हैं, उनहीं से बड़ा होना है?क्या पावर ने बीजेपी के भीतर अटल प्राइट की जड़े नेहरू कॉंपलेक्स पैदा कर दिया है?नेह कि सरदार पटेल के पहले ग्री मंत्री होने के एतिहास पर भी खत्रा मंढरा रहा है।क्योंकि 1947 से 1952 के बीच चुनाव नहीं हुआ, ऐसा दावा किया जा रहा है।

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इससे गिना ही नहीं जा रहा है।लेकिन जिस सम्विधान सभा का गठन हुआ, जिसने सम्विधान बनाया, द कुल मिला कर 16 साल 9 महीने तक प्रधान मंत्री रहे, यानी 6 ,131 दिन इस पदपर रहे हैं।तो हमारा कहना है कि बीजेपी के नेटा क्या इस तरह के जूद को मान लेते होंगे या दिमाग भी लगाते होंगे, कि उनके भीतर किस तरह का reaction होता है, ये हम जानना चाहते हैं।इसल क्या BJP Amazon की तरह हो गई है, जहां सारे कर्मचारी एक ही स्तर के दिखते हैं, एक ही तरह के दिखते हैं, सभी से यही उमीद की जाती है, एक तरह से सोचे, एक तरह से काम करें, मगर नेता या बॉस के रूप में, Jeff Bezos ही दिखते हैं और अलग दिखते हैं. तो Amazon में काम करने और BJP गंभीर कमी नजर आ रही है।बीजेपी के पास अकूद पावर है।इस दौर में इस स्केल का पावर अब कहीं और नहीं दिखता।

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जो भी कुरसी पर बैठा है वो पावर को रिपरेजेंट नहीं करता है।seat ko kar raha hai, power ko represent keval BJP karti hai. Desh samvidhaan se nahi, Pradhaan se chal raha hai. Samvidhaan keval power ki vitran vyavastha ban kar rahe raha hai. Jo BJP me nahi hai, uski manasthiti to dikh rahi hai. Lekin jo BJP me hai, wo power ke is viraad swaroop ke saamne, khud ko kaisa paata hoga?Yaani jab vote chori, seat chori ki baat sunta hoga, to laja jaata hoga, ya khush hota hoga. इसलिए बात बीजेपी की होनी चाहिए हर दिन इन सांसदों की तस्वीरों को देखकर बीजेपी के नेटा क्या महसूस करते होंगे कल तक जिन से लड़ते थे आज वही उनकी पार्टी की तरफ हैं बीजेपी के निताओं को इनके बयान फलैश बैक में सुनाई देने लग जा अब उनहीं को ED, CBI नजाने किस वज़य से ऐसा वाइरल हो गया है कि इलाज कराने BJP में चले आ रहे हैं. ED से डरे हुए नेताओं का एक ही अस्पताल भारतिय जनता पार्टी, जो इसके भीतर पहले से है, उनके बीच डर का वाइरल कितना फैला है, इसकी रिपोर्ट नहीं आ ऐसा हो सकता है लेकिन कोई पाटी की हार के बाद दर से बीजेपी में चला आ रहा है तो उसे देखकर बीजेपी वाला नहीं डर जाएगा।उसे भी तो डर लगेगा कि अगर हमने कुछ बोला तो हम भीतर ही दबोच दिये जाएंगे।क्योंकि बाहर जाने के लिए कोई पा�दूसरे दलों से डरा धंका कर खरीद कर या घसीट कर लाए गए निताओं को देख कर बीजेपी के सांसदों विदायकों के मन मस्तिश पर क्या असर पड़ता होगा ब्रस्टाचार के खिलाब लडने वाला बीजेपी का कारिकरता या निता श्वेंदू अधिकारी और काकोली इसी के आधार पर कभी इन पर ब्रह्ष्ट होने का आरोब बीजेपी नहीं लगाया?

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अब इस वीडियो को बीजेपी का नेता किस तरह देखता है?क्या कीरती आजाद को वाकई उम्मीद है कि इस वीडियो को देखकर बीजेपी के भीतर कोई रियाक्शन हो जाएगा?

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कुछ शरम करो बीजेपी में जाना है तो बोलो तुम तो वैसे ही भुपेंदर यादव के यहां थे सुविंदु अधिकारी वहाँ बैठा वा था और तुम किस चीज़ का इलजाम लगा रहे हो करप्षन का अरे जिस आदमी को जिस आदमी को कैमरा पर देखा गया नरेंदर मो बहुत ज़रूरी है कि

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आप BJP के भीतर से BJP की तरब देखें जो वहाँ पहले से रह रहा है वो बाहर से घसीट कर लाए गए नेताओं को देखकर खुदका सीना चौड़ा कर लेता है या अपने आसपास दूसरे दलों स राम मंदिर के चड़ावे में चोरी का मामला आया।इससे लेकर पत्रकारों ने पुर्व सांसल बृज भूशन सिंग से सबाल पूचा।वही बृज भूशन सिंग जिनोंने महिला रेस्टलरों के आंदलनों को सुनाते वे कहा था दबदबा था, दबदबा है और दबदबा इसलिए डर के मारे मैं सच नहीं बोल रहा हूँ।बिरित भूशन सिंग्ग डर के मारे नहीं बोल रहा हूँ।सच राम के नाम पर कुछ भी कर जाने वाले पार्टी के नेता डर के मारे सच नहीं बोल रहा हूँ।इसलिए बीजेपी की बात कीजिए पावर में होते हुए जढडू च्छाप पार्टी का नेता फूल च्छाप में मिल गया है अब बीजेपी की टीम युवा हो जाएगी मजबूत हो जाएगी इसे हरा देगी उसे हरा देगी पुराने जमाने में ऐसा होता था लोग अपनी अपनी टीम बनाते थे काश इमरान खान भी भारत की टीम मे तो कोई नहीं हरा सकता

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बीजेपी में यह कैसे होता है कि जिससे बीजेपी गुंडा कहती है और जो बीजेपी को गुंडा कहता है दोनों ही बीजेपी में आ जाते हैं पस्चिम बंगाल से कितने वीडियो आये कि कुछ लोग त्रिनमुल के नि बीजेपी कहती है पबलिक का गुस्सा है क्या वाकई में बीजेपी के कारकरताओं के भीतर त्रिनमुल को लेकर गुस्सा नहीं है उनके बदले पबलिक गुस्सा निकाल रही है यह कौन सा सिंड्रोम है इसका नाम मैंने मिरर एंगर दिया है मतलब एक ऐसा एंगर गुस्सा ज बीजेपी का कारेकरता अपनी पाटी की जीत पर कोलकाता में मिठाई बान रहा है।खुश है।त्रिनमुल के नेताओं के महले में जाकर राधा बल्लवी भी बांटने लगा और वही नेता बाहर निकलता है बीजेपी का पटका पहना हुआ।जिससे हराकर जीत की खुशी ल बीजेपी के नेता कारेकरता भी तो ह्यूमन है।उनके क्वेस्ट्शन का क्या है?मान लीजे गौतम बीजेपी का पुराना कारेकरता है।

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बंगाल में बीजेपी की सरकार बनी अब गौतम त्रिनमुल के एक लोकल नेता गोविन्द अधिकारी से बदला लेना चाहता हत्रिनमूल का लोकल नेताग गोविन भागते भागते बीजेपी में शामिल होगी।तो अब गौतम क्या करेगा?बाकी बचे अंडो को वही फेक देगा या घर ले जाकर ओमलेट बनाएगा।उधर गोविन पर अंडे फेकने का वीडियो भी वाइरल है और गोविन बीजे� गौतम जैसे कारेकरताओं को अभी अपने अंडे बरबाद नहीं करने चाहिए।प्रॉबलम यही एंड नहीं हो।

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बीजेपी में आएगा तो फिर वह बीजेपी में जग़ा भी बनाएगा।हो सकता है वो समराट चौधरी, हिमन्ता विश्वशर्मा, शुबेंदू अधिका कहीं कोई रिपोर्ट नहीं कि इन लोगों को टॉप पर देखकर बीजेपी के पुराने कारेकर्ता क्या फिल करते हैं?दूसरी पार्टी से डरा धंका कर लाए गए नेताओं को देखकर उन्हें टॉप पर जाता देख बीजेपी के नेताओं के सीने पर क्या साइड इफेक्ट कॉर्पिरेट की नौकरी में ऐसा होता है आप सालों से इस उमीद में काम करते हैं कि एक दिन आप टॉप पर पहुँचेंगे।लेकिन अक्सर बाहर से कोई और CEO बनकर आ जाता है और वो अपनी टीम बनाने लग जाता है।कुछ पुराने लोगों को निकाल भी देता है औ क्या इस तरह की फिलिंग बीजेपी में आ रही है?क्या बीजेपी के पुराने नेटाओं को लगता होगा कि उसी का प्रमोशन हो रहा है जो बाहर से आया है?

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बीजेपी का कारेकरता अपनी यथा इस्थिती से परेजाननहीं।एक बेसिक सबाल तो है, दूसरे दल से घसीट कर लाए गए सांसदों के साथ बीजेपी के सामान्य नेता किस तरह से वहवार करते हैं?क्या मेल जोल बढ़ाने में टाइम लेते हैं या उसी वक्से आन कि आम आद्मी पार्टी, समाजवादी पार्टी, कॉंग्रेस, त्रिनमुल से आय सांसदों के साथ बीजेपी के सांसद कबड़ी खेल रहे हैं, शाखा में जाने लगे हैं. WhatsApp group में भी मनोज तीवारी, रवी किशन ने सब को जोड़ लिया है. अब जिस मीम को IT Cell में बनाया ग तब क्या होता होगा?अब रागव चड़्धा हर मीम पर हाट बना रहे होंगे?क्या ये लोग अपनी पुरानी पार्टी की यादों को साजा करते होंगे?

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या नाम तक नहीं लेते होंगे?याद है लोकसभा में एक बार जगदंबिका पाल को राहूल गांधी ने इसी तरह य तो बहुत जरूरी है प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी, ग्रे मंत्री के अलावा, बी जेपी की भी बात कीजा है, बी जेपी के एक नेता की दिनचर्या क्या होता है?होगी?मन की बात सुनने की ड्यूटी खुद से लगाता होगा या पाटी ओफिस से ड्यूटी लगाई जाती होगी?सुबह -सुबह कितने मेसेज फॉरवर्ड करने होते हैं?मेसेज आता कहां से?

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क दूसरे दल से लाए गए नेता सेम सेक्षन में बिठाय जाते हैं या उन्हें 20 सेक्षन में बिठाया जाता हैं?क्या बीजेपी के भीतर एक ही क्लास है या भीतरी बाहरी टाइप का वर्गी करण पनप रहा है?जो बाहरी हैं उनके भीतर किस तरह का क्लासिफिकेशन हो रहा है क्या वे खुद को 2016 बैच, 2026 बैच के रूप में देखते हुँगे?दस करोड सदस्य होने का दावा बीजेपी करती है।इसमें नेता लेवल के कितने हैं?इसकी गिनिती हमारे पास नहीं।

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विदायक, विदानपार्शद, सांसद, राजि सबा सांसद, मेयर, जिला पंचाय� इतनी भीड होगी कि बीजेपी को भी पता नहीं चलता होगा कि किस पत पर अपना बंदा चला गया या बीजेपी के नाम पर NCP वाला जाकर बैट गया?क्या बीजेपी ने ऐसा कोई चेक सिस्टम बनाया है कि पावर का बटवारा केवल बीजेपी के लोगों के बीच ही होगा, और नए लोगों को विदायक बना देती है, सांसत बना देती है।चुनाओं कैसे जीती है इस पर आने की जरूरत नहीं।उसका अब इस देश में कुछ नहीं होगा।लेकिन BJP पेंशन धारी निताओं की factory बनती जा रही है।इस पर जड़ा ध्यान दीजीए।

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पाटी के पाका चंदा, कभी 6 ,000 करोड का चंदा इस तरह के रिपोर्ट छपती नहीं।इस पैसे को बीजेपी कैसे मैनेज करती?इसे लेकर बात ही नहीं हो।बीजेपी को लेकर बात ही नहीं हो।नेता कई प्रकार के हो स उन में स्वार्थ की भावना विक्सित हो गई होगी और कुछ नेता चाहते भी होंगे उन्हें भी स्वार्थ की भावना विक्सित करने का मौका मिले, कुर्सी मिले इतना पावर आने के बाद किसी पार्टी के नेताओं के बीच समीकरण कैसे बदल ला है उसका वेहवार कैसे बदल रहा है, उसके भीतर गुटबाजी की कौन सी नई कैटेगरी पनपी है या हर तरह की गुटबाजी समाप्थ हो गई है।

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बीजेपी में निताओं की कमी नहीं है, फिर भी कहीं 10, 10, 15, 15 साल से एक ही आदमी मंतरी है।बाकि योग्य नेता क्या फिल कर बीजेपी के भीतर क्या ऐसी शिकायते जनरेट हो रही हैं कि फलाने इतना कमा लिया और हम सेवा ही करते रह गए।उनके बीज की प्रतिसपर्धा या इर्श्या का क्या लेवल है इसकी कोई कहानी नहीं।कहीं ऐसा तो नहीं हो गया कि बीजेपी के सारे कारेकर्ता और नेता � बीजेपी के करोडो सदस्यों के भी लटपट को लेकर खटपट क्या खत्म हो गया?सब एक दूसरे को पसंद करने लगे. इसी क्रांती की रोज रिपोर्टिंग होनी चाहिए. मगर शान्ती है, पावर का बहुत प्रेशर होता है. केवल विपक्ष पर नहीं होता, सत्तारूर �बहुतों को तो समझ नहीं आता इस pressure को handle कैसे करें और वे अपराद और भरस्टाचार की तरफ मुढ जाते होंगे सोना की तसकरी से लेकर इस्तिरी हिंसा में शामील पकड़े जा रहे हैं बीजेपी के नेटा कारेकरता इन खबरों को देखकर कभी कभी लगता है कि बीजेपी क योगी जी ने कहा है राष्ट्रवाद की भावना में डूबा हुआ ही बीजेपी का कारेकरता है, उसकी पहचान है।

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फिर वो इस तरह के अपराद की तरफ कैसे चला गया?बीजेपी अपने कारेकरताओं का पूरा ध्यान रख भी रही है या उनसे केवल काम करवा रही है?हो स मगर बीजेपी में कहीं से कोई फैटा फैटी की खबर नहीं आई।असल में भारत में पावर के मनोविज्यान को समझने और रिपोर्ट करने वाले पत्रकार ही नहीं हैं।यह शम्ता मुझ में भी नहीं।पत्रकारों ने चाटुकारिता के अलावा पावर को किसी और तरीके क्या भारत मंडपम में मौजूद बाकी लोगों को ज्हालमुडी मिली?

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Ruben, Netherlands

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उनकी कथोती अलग से लगी थी?इसका वीडियो मुझे ट्रेंडिंग सेक्शन में नहीं दिखा कि बाकी लोग भी मज़े से खा रहे हैं ज्हालमुडी ऐसी चीज है कि नाम सुनकर खाने का मन तो कर जातइंतजाम करने वाली टीम पर गुस्सा जताया गया होगा हमको नहीं मिला कम ही क्यों लाया बीजेपी को पत्थर की इमारत मान लेना ठीक नहीं उनके भीतर भी पावर से प्रतिक्रियाएं तो होती होंगी ऐसा नहीं है कि केबल आपके अच्छे दिन नहीं आये बीजेपी में � क्या यह बात बीजेपी को अच्छी लगेगी?बीजेपी क्या बिना विपक्ष के राजनिती करना चाहती है?क्या बीजेपी के भीतर किसी तरह का रचनात्मक असंतोष पनप रहा है?बीजेपी को अपनी पाटी के कारेकरताओं और नेताओं के लिए रचनात्मक असंतोष स� जो शिकायत नहीं कर पा रहा, वो इतनी तारीफ करे, इतनी तारीफ करे कि सुनने वाले बीजेपी के निता ही डर जाएं।

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इतनी तारीफ क्यों कर रहा है?यह तो त्रिनमुल से भी नहीं आया।यहीं का खाया पिया बड़ा हुआ है।जब भी बीजेपी छुनाव जितती है उनके दोस्त भी अब लाइक नहीं करते।बीजेपी को हर दिन एक कारेकरता की चर्चा करनी चाहिए, कि फलाने जी हैं, जो 20 साल से जिले में काम कर रहे हैं, वहाँ पार्टी ने त्रिनमुल को हरा दिया है, और त्रिनमुल का हरा हुआ उमिदवार पार्टी में भी आ गया है बीजेपीबात कीजिए करनी पड़ेगी जैसे योगी आदितनात को मुख्यमंतरी बनाने का उठ्सा और हिमन्ता विश्वा शर्मा को सीयम बनाने का उठ्सा क्या एक जैसा है बीजेपी चाहे तो चुनाओं जीतन इसके तहच सूटकेस में दो जोडी धोती, दो कुर्ता, एक गंचा, एक पटका, साबुन दानी, सेविंग किट और पढ़ने के लिए दो कितावे. कौन -कौन?

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एक प्रधान मंत्री का लिखा एक्जाम वारियर और दूसरा मेरा लिखा बोलना ही है. ये सब रखकर गिफ्ट कर जिने गुंडा लुटेरा कहती थी उसे अपनी पार्टी मिला कर बीजेपी गुंडों को कैसे बदल रही है ऐसे निताओं को बीजेपी में लाकर उनका शुद्धी करण घी से करती है या दूट से कहीं इन लोगों का कमाया हुआ पैसा तो रखवा नहीं लिया जाता सवाल है �

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