सोनम के अनशन का 16वाँ दिन, कब बात करेगी सरकार? #cockroachjantaparty
नमस्कार मैं रवीश कुमार सोनम वांगचुक की हालत बिगड़ती जा रही है आज 13 जुलाई है और जंतर मंतर पर उनके अंशन का 16 वा दिन है अभी तक सरकार का कोई प्रतिनिधी सोनम वांगचुक से बात करने नहीं आया और ना अंशन तुड़वाने की कोई कोशिश की ग उसे किस थर्मा मीटर से पता चलता है कि 69 साल के एक व्यक्ती की जिंदगी दाओं पर है कुछ हो गया तब भी इस देश कोई फर्क नहीं पड़ेगा क्या वाकई लोग ऐसे ही हो गये हैं या सरकार को यह भरोसा किसी और वज़ा से आने लगा है उसे अब लोगों की प्रतिक्र गिरता जा रहा है, बल्ड प्रेशर भी गिरता जा रहा है. वजन करीब 8 किलों घट गया है. सोनम वांग्चुक के समर्थक बेचैन होने लगे हैं कि इस हालत में कब तक अन्शन कर सकते हैं?उन्हें अन्शन तोड़ देनी चाहिए. उनसे सोनम वांग्चुक की हालत नहीं दे लोग चाहते हैं कि सरकार से भी अपील हो कि वो सोनम वांगचुक से बात करें क्या हम इस हाल में पहुँचा दिये गए हैं कि सरकार से बात करने के लिए किसी को अपनी जिंदगी दाओं पर लगानी पड़ती हैं आखिर सरकार क्या साबित करना चाहती है मेडिकल की परिक्षा का पेपर लीक हुआ ही लाखो रुपए देकर सॉल्वर लगाए गए जो दूसरे चात्रों को पास करा रहे थे डॉक्टर बनाने के लिए क्या इन सब का विरोध करना इतना खराब है कि मोधी सरकार ने अपने किसी मंत्री को
अभी हम सभी रोह सोनम सर की हेल्थ की रिकारडिंग काफ़ी चिंतित है।सोरा दिन हो चुकी है।उनके सवा आठ किलो वजन कम हो चुका है।बलड़ प्रेशर और शुगर लगातार कम है।और आज की डेट में वो ठीक से उठकर बेड़ भी नहीं सकते।उन्हें चक्कर आते ज� इंस्टाग्राम पर कौकरोच जनता पार्टी के मीम के पीछे जो भीड आई, जो माहौल बना, वो कहाँ चला गया?
कौकरोच जनता पार्टी को लेकर गाने भी बने, एनिमेशन बनने लगे?क्या एलगोरिदम से उसे मैनेज कर लिया गया है?या लोग डर के मारे किनारे हो ग आईसा के 6 चात्र अंशन पर बैठे हैं दो चात्रों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है इसी के साथ उनके समर्थक प्रदर्शनकारी भी यही अपना दिनराद गुजारते हैं 25 दिनों से इतनी गर्मी और उमस में धरने पर बैठे हैं आसान नहीं है उनका पूरा जीवन य कई राज्यों से आती हैं
देश भर के युवा अपनी अपनी परिक्षा को लेकर परिशान हैं अलग अलग कारणों से क्या सरकार इन युवाओं से बात कर सभी राज्जियों को परिक्षा आयोगों को संधेश नहीं देना च उनके सपोर्ट के लिए हम लोग आये हैं मैं Construction का काम करता हूँ चोटा मोटा यहाँ पर हम पेपर लीक के खिलाफ हमारे देश की शिक्षा व्यवस्ता के खिलाफ धर्ना प्रदेशन के लिए आये हैं और हमारे सोनम वांचिंजी जो बेटे हैं उनका हॉसला अपजाई करने के � आप लोग इस प्रोगेश से जुड़े हो गये हैं, कितने दिन इस मक्सद से हैं?
हम सुरु से ही, जब से यहाँ पे indefinite strike शुरू हुगा है, तब से हम यहां बैटे हैं, यानि 20 जून से हम लोग हैं लगतार बने हुए हैं एक जो मुख्य मांग है, कि धर्मिंदर प्रधा कोचिंग सेंटर जो तमाम कोचिंग सेंटर चलने हैं देश वर्वे, उन तमाम कोचिंग सेंटर को बैन किया जाएं।कोचिंग सेंटर को बैन करने के पिछे कारण यह है, तरक यह है कि कोचिंग सेंटर लगातार जो बच्चु में ब्याबत एक मजबूरी है उस मजबूरी
अपने Twitter हेंडल पर एक SOS जारी किया है हर भारतिया के नाम ये पत्र लिखा है और कहा है कि हालात रोज बिगरते जा रहे हैं मैं नहीं जानता कि सोनम सर और कितने दिन तक इस हाल में रह सकते हैं वे हमें कहते हैं कि और अन्शन कर सकते हैं लेकिन हम जो उनके साथ हैं बहुत चिंतित हैं सोनम आराम और मशूरियत की जिन्दगी जी सकते थे लेकिन नोबल प्राइज से तुलनिया रेमौन मेचसे से अवार्ड जीद चुके सोनम वांगचुक अपनी जिनदगी को दाओपर वे उन मिरत बच्चों के लिए बैठे हैं जिनने एक टूटी हुई भरष्ट शिक्षा प्रणाली ने तोड़ दिया।वे एक बड़े उद्देश के लिए अपने शरीर और शायद अपनी जान का त्याग कर रहे हैं।मैं सोचता हूँ कि यह हमारे बारे में क्या कहता है।कि भारत का एक बेटा जिसने इस देश को इतना गौरव दिया उसे अपनी सरकार द्वारा सुने जाने के लिए भूखा मरना पड़ रहा है यह मेरी कलपना का भारत नहीं है यह भारत नहीं है सरकार का मुझे भी समझ में नहीं आ रहा है कि ये सरकार इतनी ज़ादा इग्न के एक भी पेपर लीक ना हो कोई भी बच्चा सुसाइड ना करें पेपर लीक के कारण जिनके ऊपर ये जिम्मेदारी थी उस शिक्षा मंतरी को हटा कर किसी और को शिक्षा मंतरी बना दीजे हम यह थोड़ी ना कहरें कि मुझे शिक्षा मंतरी बना दो या सोनम सर को शिक्षा मेडिकल की परिक्षा में चोरी और पेपर लीक अकेला मामला नहीं है. CBSE में किस तरह की पेपर चेकिंग हुई, उसे लेकर कितने सवाल उठे, तब देखें.मंत्री की जवाब दे ही तै नहीं हुई लिकिन एक नागरी की जिंदगी दाव पर लगी है क्या सरकार को सम्वेधन शिल्ता नहीं दिखानी चाहिए इसी जंतर मंतर पर 2023 में कुष्ठी की उलंप सरकार उनसे बात तक करने नहीं आई हताशा में उन्होंने कुष्टी से सन्यास लेने का एलान कर दिया देश का ध्यान आकर्षित करने के लिए महिला खिलाडियोंने जंतर मंतर पर ही अभ्यास शुरू कर दिये गर्मी, बरसाग और पुलिस के दमन का सामना करती रहीं महिला ख मगर शाम को नीज चैनलों पर हमारे प्रदर्शन का कवरिज दिखाई क्यों नहीं देता है?2014 में मोदी सरकार के आने के बाद जंतरमंतर और मीडिया का संबंद बदल गया. मीडिया गोधी मीडिया हो गया. जंतरमंतर के प्रदर्शनों को नजर अंदास करने लगा ताकि सरका अगर गोधी मीडिया कवरेज करता भी है किसी अंधुलन का तो उसे देश के खिलाद साजिश का हिस्सा बना देता है यही कारण है कि अब प्रदर्शनों के बीच गोधी मीडिया को भगाया जाने लगा है लेकिन क्या गोधी मीडिया को कोशिश नहीं करनी चाहिए कि वो अप कह रहे हैं उस समय मन्मोहन सिंग सरकार के मंत्री प्रदर्शन कारियों से मिलने जंतर मंतर आया करते थे रामलीला मैदान जाते थे
मंतरालेयों में भी बुला कर बाचित होती थी अन्ना अंधुलन का 24 गंटे लाइब कवरेज होता था उस अंधुलन में शामिल बहुत से लोग आज मोदी सरकार के साथ खड़े हैं वो भी मांग नहीं करते कि सरकार को � अंशन के कारण एक नागरी की जान जा सकती है और कहीं कोई हलचल नहीं है जंतरमंतर का प्रदर्शन अब मीडिया के लिए लोकतंतर का मुद्धा नहीं रहा क्योंकि मीडिया के भीतर ही लोकतंतर खत्म किया जा चुका है आच का मीडिया यानि गोधी मीडिया लोकतंतर की हत् अब जनता से होकर नहीं गुजरता अन्ना आंदुलन के कवरिज्ज से जादा किसान आंदुलन के समय के कवरिज्ज को भी याद कीजिए जब गोधी मीडिया ने किसानों के आंदुलन में शामिल किसानों को आतंकवादी कह दिया जै जवान जै किसान का नारा भुला दिया गय किसान दिल्ली की सीमा में प्रवेश ना कर सकें दिल्ली की सीमा पर एक साल तीन महिने से अधिक समय तक किसान रहे उस समय किसानों से बात करने के नाम पर कितनी नौटंकी हुई सरकार दूसरे किसान निताओं को ले आई सुप्रीम कोट ने कमेटी बना दी किसान या सब खेल सम किरिशी कानून वापस लियेनवंबर 2021 में कहा कि निउनितम समर्थन मुल्य तै करने के लिए एक कमेटी बनाई जा रही है यह खबर उसी कमेटी के बारे में है न्यूज लॉंडरी की अकांख्या राउथ की रिपोर्ट है RTI से जानकारी मिली है कि चार साल यानी 48 महिनें बीट गए मगर अभी तक इ 54 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं और आज तक इस कमेटी की अन्तिम रिपोर्ट नहीं आई है जिसके बनाने की घोषना खुद प्रदान मंतरी नरेंद्र मोदी ने की थी जब कौकरोच जनता पार्टी को जनतर मंतर पर अनुमती मिली पुलिस की तब तरह तरह के शक्क किय उनकी सेहत बिगड़ती जारी आखिर एक प्रोटेस्ट के वैलिड होने का वैध होने का टेस्ट क्या है 25 दिनों से सरकार ने इस प्रदर्शन को कोई एहमियत नहीं दी फिर भी कौकरोच जनता पार्टी के सदस्य टिके रहे धरने पर बैठे रहे कौकरोच जनता पार्टी के � क्या इस प्रदर्शन से दूरी बनाकर लोग सरकार को ही रास्ता नहीं दे रहे कि पेपर लीक के सवालों से बचकर निकल जाए?सालों साल होने के बाद भी किसी की जवाब दे ही तैना. 11 जुलाई को 14 दिन के अंशन पर सोनम वांगचुक ने कहा था काफी कमजोर महसूस करने �
सोनम वांगचुक कमजोर हो भी गए हर दिन एक वीडियो डालते हैं लेकिन 11 जुलाई के बाद से उन्होंने कोई वीडियो नहीं डाला 12 जुलाई को उन्होंने ट्वीट किया कि कुछ भी कहने की हालत में नहीं हूँ काफी कमजोर हो चुका हूँ आज मेरे अंचन का 14 वीन दि मगर आज दिन बर में बहुत लोग आये समर्थन में और उनमें कुछ जाने माने हस्तियां भी आये जिनमें भूदपूर्व मंत्री केरला के त्रिपुरा के और फिल्मी सितारे परकाश राज भी आये दोस्तो आप उन्हें विलन की तरह जानते हैं मगर फिल्मी परदों पर अ हीरो वो हैं जो सच्चाई और इनसाफ के साथ खड़े रहते हैं और ना इनसाफी से डर से नहीं डरते मैं तो इस बात पर कहुंगा जिने हम हीरो मानते हैं पर्दों पर उन्हें भी कि वो असली जिंदगी में भी हीरो बनें सच्चाई के साथ खड़े हों बल्कि उन्हें ही न या पुलीस के अफसर हों या सरकार में अधिकारी हों या फिर राजनेतिक नेता हों चाहे कॉंगरस से हों या बीजेपी से हों बलकि जो बीजेपी से हैं उन्हें खास कर कहूंगा कि बहुत जरूरी है कि आप सच्चाई के साथ खड़े हों इनसाफ के साथ खड़े हों और अ�पर रखें ताकि ये पार्टी लोगों में लोगप्रिय बनी रहें वरना लोगों का विश्वास तूपता जाएगा जोकि पार्टी के लिए भी अच्छी बात नहीं है मैं तो कहुंगा कि आज रात जब आप सोने जाएं तो पांच मिनित आँ� सच्चाई और इनसाफ के साथ खड़े हैं या फिर अपने धन, दॉलक्त के साथ।आपको जवाब मिल जाएगा कि आप कितने हीरो हैं।बहराल मैं यही कहूंगा कि अपनी जिंदगी के हीरो खुद बनियें।सच्चे हीरो, रियल लाइफ हीरो।जैहिन।
सोनम वांगचुक गलत का विरोद करें।सबाल उनकी सेहत का भी है।क्या सोनम वांगचुक को अंशन स्थागित कर देना चाहिए।वे अपने इरादे से पीछे हटने वाले नहीं और सरकार बात करने नहीं आयेगी तो ऐसे में क्या करना चाहिए।शांती के रास्ते से यह प्रदर्शन चल र और बताया है कैसे वहां और दुनिया के कई देशों में संसत के सामने ही आम लोग प्रदर्शन करते हैं?भारत में आम लोगों के लिए संसत तक पहुँच पाना इतना मुश्किल क्यों है?
तोस्तों मैंने कहा था कि हम 20 जुलाय को जब संसत का सत्र शुरू होगा मार्च करें�तो बहुत से लोगों ने बोला है कि वो आएंगे कुछ ने पूचा है क्या ये मुम्किन है इससे पहले मैं आप लोगों को ये बताओं की दो हफते पहले मैं स्विच्जिलैंड में था जैसा की आपको पता है और वहा उपर एक marketplace में आया और ये देखिए तस्वीर जहां मैं खड़ा हूँ आप जो पीछे भवन देख रहे हैं आपको ये जानकर हैराणी होगी कि ये स्विट्जिलैंड की संसद है और इस संसद भवन में उसके अंदर से गुजरते हुए मैं आया था कोई रोक टोक नहीं सब ख� वहां पर तो बच्चे खेल रहे हैं लोग घूम रहे हैं और ये निर्धारित जगह है परदर्शनों के लिए भी तो कोई भी यहां परदर्शन कर सकते हैं धरने कर सकते हैं तो दुनिया के लोगतांत्रिक देशों में संसत तक जाना खुला छूट होता है बल्कि ज्यादातर � लंदन में वेस्ट मिन्स्टर है यहाँ पर भी लोग संसत तक जा सकते हैं और यहां भी परदर्शन कर सकते हैं वैसे ही स्वीडन, डेन्मार्ट, उस्ट्रेलिया, नुजीलन्ड सब जगा संसत खुली जगा है क्योंकि लोकतंतर में लोगों का संसत है तो दुनिया की लोकतंतरयहां नई दिल्ली में कैसे नसंबाव हो।अब बताया जाता है कि नई दिल्ली में तो दफा 144 लगा है, 163 BNS यहां तो परदर्शन कर नहीं सकते हैं और हमारा सम्विदान हमें अदिकार देता है अनुच्छे 19 में कि हम शांती पुर्ण परदर्शन कर सकते हैं तो ऐसा दफा और लगाए रखना स्थायी रूप में ये अपने आप में सम्विदानिक नहीं है।नाही यहां जंतर मंतर पर समय बध कर देना कि दस से पांच तक ही कर देंगे ये भी सम्विदानिक मेरे ख्याल से तो नहीं है।
इसलिए मैं विंती करना चाहूंगा इस देश के नियाय वि� वैसे तो ऐसा कोई कानून हो नहीं सकता है मगर फिर भी अगर ऐसा कानून है तो वो कानून ही गलत है और गान्दी जी ने कहा था कि अगर कोई कानून गलत है तो उसे तोड़ना बेहतर है आज बस इतना ही कहूंगा याद रखियेगा 20 जुलाई जैहन लोगकंत्र बिना प्र� उस जनता की हार हो रही है जिसके लिए सोनम वांगचुप ने अंशन किया है सरकार के खिलाब बोले तो जनता चुक कराने आ जाती है जनता के लिए बोले तो खुद गायब हो जाती है हालत यह है कि यह जनता अब खुद को भी गायब करने लगी है खुद को भी हराने लगी है सर्वे के पीछे छिपकर बोल रही हैइस से पहले भी सोनम वांगचुक ने लददाग से दिल्ली तक का मार्च किया एक सितंबर 2024 से मार्च शुरू हुआ ती सितंबर 2024 को दिल्ली पहुँचा मां क्या थी हिमालै और लददाग के इलाके में जलवायू परिवर्तन के कारणों को रोका जाय और लददाग को छटी अ दो दिनों तक हिरासत में रखे गए इस दोरान भी सोनम और उनके साथियों ने अलग -अलग थानों में भूख हरताल की दो दिन बाद दो अक्टूबर के दिन सब को रिहा किया गया सोनम वांगचुक और उनके साथी राज घाट गये महात्मा गांधी को श्रधांजली अरपि मैं कुछ दिनों से यहाँ से प्रोटेस्ट चल ला था हमने देखा उसके बाद मैं एक बहुत चोटा ही यूटूबर समझ लिए हैं हर लोगों को यह समझना चाहिए कि उनके पास फ़ोन है तो जो देश में गलत हो रहा है उन गलत नीतियों का बिरोध हर लोगों को करने का अ� इस प्रोटेस्ट मैं क्या बताऊं।
क्योंकि हमारी देश की जंता है और नेता है।ये मूर्ख हैं और जंता भी मरी भी है हमारी।
सोनम वांक्चुक के सेहत बिगड रही है।अकेले सोनम की नहीं।उस लोगतंत्र की भी जहां सबाल उठाने वाला खलनायक बना दिया जाताहर दिन कहीं पुल गिर रहा है, कहीं एक स्पेस्वे धंस रहा है, कहीं कोई कारवाई होती नहीं दिक्ती सरकार का मतलब जमिनदार हो गया है और जनता उसकी बंध हुआ नमस्कार मैं रवीश कुमार
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